
आरा/भोजपुर (डॉ दिनेश प्रसाद सिन्हा)03 अगस्त।रविवार को नागरी प्रचारिणी सभागार में महान पार्श्वगायक मोहम्मद रफ़ी की स्मृति में प्रतिवर्ष आयोजित होने वाला संगीतमय कार्यक्रम “तुम मुझे यूँ भुला न पाओगे” इस वर्ष भी अत्यंत गरिमामय एवं भावपूर्ण वातावरण में संपन्न हुआ। इस अवसर पर विभिन्न कलाकारों ने मोहम्मद रफ़ी के अमर गीतों की सुमधुर प्रस्तुतियों से उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित किए। साथ ही आशा भोंसले, सुमन कल्याणपुर एवं किशोर कुमार के लोकप्रिय गीत प्रस्तुत कर उन्हें भी संगीतमयी श्रद्धांजलि दी गई।
कार्यक्रम का उद्घाटन संगीत शिक्षक धर्मेंद्र सिंह, संगीत प्रेमी इकबाल इल्मी, रमेश कुमार, कीर्ति लता एवं ऋषिका शर्मा ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया। इसके पश्चात ऋषिका शर्मा ने शीर्षक गीत तुम मुझे यूँ भुला न पाओगे…..प्रस्तुत कर कार्यक्रम का भावपूर्ण शुभारंभ किया।
संगीत संध्या में कलाकारों ने एक से बढ़कर एक सदाबहार गीतों की प्रस्तुतियाँ दीं। राजाराम शर्मा ने ये चाँद सा रोशन चेहरा…एवं तक़दीर का फ़साना… प्रस्तुत किया। धर्मेंद्र सिंह एवं ऋषिका शर्मा ने पत्ता-पत्ता बूटा-बूटा… गाकर समां बाँधा। सीमा भारती ने बहारों फूल बरसाओ…. की मनमोहक प्रस्तुति दी। कुमार अनुपम ने दिल का सूना साज़….,तथा “मुझे इश्क़ है तुझी से… गाकर श्रोताओं का दिल जीत लिया। धर्मेंद्र सिंह एवं कीर्ति लता ने अगर तेरी जलवा-नुमाई न होती…. प्रस्तुत किया। रमेश कुमार ने याद न जाए बीते दिनों की….तथा कीर्ति लता ने एहसान तेरा होगा मुझ पर….. प्रस्तुत कर श्रोताओं को भावुक कर दिया।
मोहम्मद नौशाद ने क्या हुआ तेरा वादा…., अजय सिंह एवं आस्था सिंह ने रिमझिम के गीत सावन के…. तथा धर्मेंद्र सिंह ने न फ़नकार तुझ-सा तेरे बाद आया…..प्रस्तुत कर खूब तालियाँ बटोरीं। धर्मेंद्र सिंह एवं सीमा भारती ने बेखुदी में सनम…,कीर्ति लता ने दो लफ़्ज़ों की है….. तथा शमशाद प्रेम एवं रमेश कुमार ने बने चाहे दुश्मन ज़माना हमारा….. गाकर माहौल को संगीतमय बना दिया। रमेश कुमार एवं कीर्ति लता ने छुप गए सारे नज़ारे…….की प्रस्तुति से कार्यक्रम को यादगार बना दिया।
कार्यक्रम का समापन मोहम्मद शमशाद, धर्मेंद्र सिंह एवं सीमा भारती द्वारा प्रस्तुत देशभक्ति गीत मेरे देश प्रेमियों….. के साथ हुआ, जिसे उपस्थित श्रोताओं ने खड़े होकर सराहा।
पूरे कार्यक्रम का प्रभावशाली संचालन रेड क्रॉस सोसाइटी की सचिव डॉ. विभा कुमारी ने किया। अंत में शमशाद प्रेम ने धन्यवाद ज्ञापन देते हुए सभी कलाकारों, अतिथियों, साहित्यकारों, संगीत प्रेमियों एवं उपस्थित श्रोताओं के प्रति आभार व्यक्त किया।
इस अवसर पर शहर के अनेक साहित्यकार, संगीत प्रेमी एवं गणमान्य नागरिक बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। कार्यक्रम ने एक बार फिर यह सिद्ध कर दिया कि मोहम्मद रफ़ी के गीत आज भी संगीत प्रेमियों के हृदय में उसी आत्मीयता और लोकप्रियता के साथ जीवित हैं।
