कारगिल कथा
नान्हें उमिरिया से देखी-देखि सीखत रही,
काहे माई राखे दीया, उंच दीया रखवा प ऽ;
नीचवा में रखला प ऽ, हाथ-गोड़ जरी लाल,
नाही होइहें सगरी अंजोर नीचे रखला पऽ
उँचका प ऽ रखला से जादे ऊ अंजोर होई,
चोर-चंडाल चाई दूरे से चिन्हाई जाई।
नाही घुसपैठी एको आवहूँ के हिम्मत करिहें
पड़ी उनका मार अइसन छठिया इयाद परिहें।
लइकाई के सीखल अबतऽ दिने-दिन भुलाइल जाता,
ढीबरी उपर ढकना लागल, टेवुल पर रखाइल जाता।
खिड़की-दरवाजा पऽ डाली-डाली परदा,
उग अंजोर छीपावल जाता,
खोरी चलत में ठेसवो ना लागे, का अइसनदीया जरावल जाता ?
भर गइल भेदिया के भेजा में भूसा, उनको से अच्छा गड़ेरिया लागल, ठंढा घर के नेता ठंढइलन,
जवानन के लहू में लहरिया लागल।
चोटि के बर्फ भले ना पिघले लह लह दुपहरिया में,
जवानन के एड़िया के दावे पीघले लागल।
द्रास, बटालिक, कारगिल घाटी से चोटी के दूरी नीयरे लागल,
शेर हिन्द के आगे तऽ, दुश्मनावो बस गीदड़ अस लागल,
कोटला के पीच खोदला से दुश्मन के बंकर ढाहल अच्छा लागल;
भोरे-भोरे सूरज बर्फ पऽ सोनवा चुनरिया भले पेन्हावस;
शहीदन के खून से लथपथ लाल चुनरिया अच्छा लागल।
राजनीति के चौपड़ पर बइठल नेता से,
हर जवान, हर शहीद अच्छा लागसू, आहूजा, नचिकेता, सर्वानन, विद्यानंद,
गणेश, अरविन्द लिन्छु,
नागेश्वर, मनोज, योगेन्द्र विक्रम,
संजय हरदेव देवता असलागल ।
भारत माता के कोखी में जनमिके, देश खातिर जान देके अमर बनल ही अच्छा लागल।
लालकिला पर झंडा फहरेला,
बाकी टाइगर हील पर फहरावल अच्छा लागल,
कारगिल में तऽ पाक के मात देवे कइनी, कच्छ के रण में मारल अच्छा लागल।
तेल लगावल ललका लाठी लरिकाई में चलवले रही,
दुश्मन के मारे खातीर कान्ह पर बन्दूक राखल
अब अच्छा लागल।


