उत्तर प्रदेश सरकार बेरोजगार युवाओं को बना रही आत्मनिर्भर बदल रहा बागपत उभर रहा प्रदेश।
RKTV NEWS/बागपत(उत्तर प्रदेश)28 अप्रैल।उत्तर प्रदेश सरकार एवं भारत सरकार द्वारा संचालित जनकल्याणकारी योजनाएं आज समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक विकास की किरण पहुंचाने का कार्य कर रही हैं। इन्हीं योजनाओं में से एक है प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (PMEGP), जो बेरोजगार युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से संचालित की जा रही है। यह योजना न केवल युवाओं को स्वरोजगार स्थापित करने में मदद करती है, बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर भी सृजित करती है।
प्रधानमंत्री रोजगार सर्जन कार्यक्रम योजना सरकार की महत्वाकांक्षी योजनाओं में से एक है योजना के अंतर्गत 18 वर्ष से ऊपर के व्यक्ति लाभान्वित हो सकते हैं जिन्हें निर्माण क्षेत्र मे रु 50.00 लाख एवं सेवा क्षेत्र मे रु 20.00 लाख तक ऋण दिया जाएगा जिससे कि वह अपना कोई भी सूक्ष्म/लघु उद्योग स्थापित कर सके इसके लिए शिक्षण योग्यता न्यूनतम कक्षा 8 पास, इंटरमीडिएट अथवा समकक्ष की वरीयता होनी चाहिए इस योजना में आवेदन की प्रक्रिया के लिए अनलाईन पोर्टल पर www.kviconline.gov.in/pmegpeportal/ पर अपने मोबाइल से ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं।
PMEGP योजना के अंतर्गत सब्सिडी दरें (मार्जिन मनी):
सामान्य: 15% (शहरी), 25% (ग्रामीण)विशेष (अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति/अन्य पिछड़ा वर्ग/महिलाएं/पूर्व सैनिक/अल्पसंख्यक/पूर्ववर्ती क्षेत्र/पहाड़ी क्षेत्र): 25% (शहरी), 35% (ग्रामीण)
योगदान: लाभार्थी का योगदान परियोजना लागत का 10% (सामान्य) या 5% (विशेष) है। परियोजना लागत सीमा: नई विनिर्माण इकाइयों के लिए अधिकतम लागत ₹50 लाख और सेवा इकाइयों के लिए ₹20 लाख है।
जनपद बागपत के ग्राम बडागांव निवासी कामिल की सफलता की कहानी इस योजना की प्रभावशीलता का जीवंत उदाहरण है। सीमित संसाधनों और सामान्य पारिवारिक पृष्ठभूमि के बावजूद कामिल ने अपने आत्मविश्वास, परिश्रम और सरकारी योजना के सहयोग से न केवल अपना भविष्य संवारा, बल्कि अन्य लोगों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बन गए।
कामिल बताते हैं कि वे एक साधारण परिवार से आते हैं, जहां आर्थिक संसाधनों की कमी हमेशा एक चुनौती रही। उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा पूरी करने के बाद 10वीं कक्षा तक पढ़ाई की, लेकिन परिवार की कमजोर आर्थिक स्थिति के कारण आगे की पढ़ाई जारी रखना संभव नहीं हो पाया। ऐसे में उनके सामने सबसे बड़ा प्रश्न था—रोजगार का।
कामिल के मन में शुरू से ही कुछ अपना करने की इच्छा थी। वे नौकरी की तलाश में भटकने के बजाय स्वयं का उद्यम स्थापित करना चाहते थे, लेकिन इसके लिए आवश्यक पूंजी और मार्गदर्शन का अभाव था। कई बार प्रयास करने के बावजूद उन्हें सफलता नहीं मिली, जिससे वे निराश भी हुए, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी।
एक दिन उन्हें सूचना एवं जनसंपर्क विभाग के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के माध्यम से प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (PMEGP) के बारे में जानकारी प्राप्त हुई। यह जानकारी उनके जीवन का टर्निंग पॉइंट साबित हुई। उन्होंने तुरंत इस योजना के बारे में अधिक जानने का निर्णय लिया और जिला खादी ग्रामोद्योग कार्यालय, बागपत से संपर्क किया।
कार्यालय में उन्हें योजना की विस्तृत जानकारी दी गई। उन्हें बताया गया कि इस योजना के अंतर्गत ग्रामीण क्षेत्रों में उद्योग स्थापित करने पर सरकार द्वारा 35 प्रतिशत तक सब्सिडी (अनुदान) प्रदान किया जाता है। यह जानकारी उनके लिए अत्यंत उत्साहजनक थी, क्योंकि इससे उनके सामने वित्तीय बाधाएं काफी हद तक कम हो सकती थीं।
कामिल ने अपनी योग्यता और स्थानीय बाजार की मांग को ध्यान में रखते हुए बेडशीट निर्माण उद्योग स्थापित करने का निर्णय लिया। उन्होंने योजना के अंतर्गत आवेदन प्रक्रिया पूरी की, जिसमें जिला खादी ग्रामोद्योग विभाग ने उन्हें हर स्तर पर मार्गदर्शन और सहयोग प्रदान किया।
बैंकिंग प्रक्रिया भी उनके लिए एक नया अनुभव था, लेकिन केनरा बैंक, शाखा बडागांव के सहयोग और विभागीय मार्गदर्शन के चलते उनका ऋण आवेदन सफलतापूर्वक स्वीकृत हो गया। लगभग 0.50 लाख रुपये की परियोजना लागत के साथ उनका उद्यम स्थापित करने का सपना साकार होने लगा।
मार्च 2023 में कामिल ने अपने गांव बडागांव में बेडशीट निर्माण इकाई की स्थापना की। शुरुआत में कई चुनौतियां सामने आईं—कच्चे माल की व्यवस्था, मशीनरी संचालन, बाजार से जुड़ाव, और उत्पाद की गुणवत्ता बनाए रखना—लेकिन उन्होंने धैर्य और मेहनत के साथ इन सभी चुनौतियों का सामना किया।
धीरे-धीरे उनका व्यवसाय गति पकड़ने लगा। उन्होंने अपने उत्पाद की गुणवत्ता पर विशेष ध्यान दिया और स्थानीय बाजार के साथ-साथ आस-पास के क्षेत्रों में भी अपनी पहचान बनानी शुरू की।
आज कामिल का उद्यम सफलतापूर्वक संचालित हो रहा है। उन्होंने अपने उद्योग में 3 लोगों को रोजगार प्रदान किया है, जिससे न केवल उनकी स्वयं की आय बढ़ी है, बल्कि अन्य परिवारों की आजीविका भी सुदृढ़ हुई है।
वर्तमान में कामिल की मासिक आय लगभग 32,000 रुपये तक पहुंच गई है, जो उनके और उनके परिवार के लिए एक सम्मानजनक जीवनयापन सुनिश्चित कर रही है। इसके साथ ही योजना के अंतर्गत 35 प्रतिशत अनुदान भी उनके पक्ष में बैंक को प्राप्त हो चुका है, जिससे उनके वित्तीय बोझ में और कमी आई है।
कामिल कहते हैं कि यदि उन्हें इस योजना की जानकारी समय पर न मिलती, तो शायद वे आज भी रोजगार की तलाश में संघर्ष कर रहे होते। उन्होंने प्रधानमंत्री जी और जिला खादी ग्रामोद्योग कार्यालय, बागपत के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस योजना ने उनके जीवन की दिशा बदल दी है।
उनकी सफलता यह दर्शाती है कि यदि सही मार्गदर्शन, सरकारी सहयोग और दृढ़ इच्छाशक्ति का संगम हो, तो कोई भी व्यक्ति अपने सपनों को साकार कर सकता है।
आज कामिल अपने गांव के अन्य युवाओं के लिए प्रेरणा बन चुके हैं। वे उन्हें भी सरकारी योजनाओं का लाभ उठाने और स्वरोजगार की दिशा में कदम बढ़ाने के लिए प्रेरित करते हैं।
प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम न केवल आर्थिक सशक्तिकरण का माध्यम बन रहा है, बल्कि यह ग्रामीण क्षेत्रों में औद्योगिक विकास को भी बढ़ावा दे रहा है। इस योजना के माध्यम से हजारों युवा आत्मनिर्भर बन रहे हैं और “आत्मनिर्भर भारत” के संकल्प को साकार करने में योगदान दे रहे हैं।
कामिल की यह कहानी इस बात का प्रमाण है कि सरकार की योजनाएं सही लाभार्थियों तक पहुंचें तो वे जीवन में क्रांतिकारी बदलाव ला सकती हैं।
अंततः, यह कहा जा सकता है कि कामिल की सफलता केवल उनकी व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं है, बल्कि यह सरकारी योजनाओं की प्रभावशीलता, प्रशासनिक सहयोग और युवा शक्ति के सामर्थ्य का एक उत्कृष्ट उदाहरण है।
ऐसी प्रेरणादायक कहानियां समाज में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करती हैं और अन्य युवाओं को भी आगे बढ़ने का हौसला देती हैं।

