
आरा/भोजपुर ( डॉ दिनेश प्रसाद सिन्हा)20 अप्रैल।अक्षय तृतीया और भगवान श्रीपरशुराम के प्राकट्योत्सव पर श्रीसनातन शक्तिपीठ संस्थानम् द्वारा कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस अवसर पर भगवान शालग्राम, नर्मदेश्वर, श्रीहनुमान जी, तुलसी आदि का षोडशोपचार से पूजन किया गया।कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए श्रीमत्सनातनशक्तिपीठाध्यक्ष आचार्य डॉ भारतभूषण पाण्डेय ने कहा कि संसार के शिक्षण और रक्षण के लिए भगवान ने विविध अवतार धारण किए हैं।इस क्रम में तीन बार राम बनकर आए जिसमें पहले राम भार्गव परशुराम, दूसरे राम रघुवंशी श्रीराम और तीसरे राम यदुवंशी बलराम कहलाते हैं।जब वेद और वैदिक धर्म के घोर विरोधी राजा पृथ्वी पर मनमाने आचरण करने लगे और सभी प्राणियों के हित और उत्कर्ष के मार्ग का हनन करने लगे तब भगवान ने आवेशावतार लेकर परशुराम के रूप में आए। उन्होंने अनेक बार इस पृथ्वी से अवैदिक राजाओं का समापन कर राजगद्दी का शोधन और व्यासगद्दी-शिक्षातंत्र से शास्त्रोक्त समन्वय किया।आचार्य ने कहा कि आज तमिलनाडु में स्टालिन सनातन धर्म और मंदिरों को नष्ट करने का अभियान चला रहे हैं।सर्वत्र वैदिक सदाचार मर्यादा का क्षरण हो रहा है।ऐसे में समाज को भगवान श्रीपरशुराम की तपस्या,शास्त्र और शस्त्र ज्ञान से प्रेरित होकर धर्म-संस्कृति की रक्षा के लिए सन्नद्ध होना आवश्यक है।कार्यक्रम का संचालन सचिव सत्येन्द्र नारायण सिंह, स्वागत भाषण अंजनी श्रीवास्तव और धन्यवाद ज्ञापन विश्वनाथ दूबे ने किया। इस अवसर पर प्रो बलिराज ठाकुर, शिवदास सिंह, ध्रुव कुमार सिंह, मधेश्वर नाथ पांडेय और कुमार सौरभ ने पूजन-अर्चन में भाग लिया।
