
आरा/भोजपुर (डॉ दिनेश प्रसाद सिन्हा)02 अप्रैल।ठाकुरबाड़ी में आयोजित छः दिवसीय संगीत समारोह संपन्न हुआ। शास्त्रीय संगीत जगत के युवा एवं स्थापित कलाकारों ने इस समारोह में लगातार छः दिनों तक सजाई सुरमयी शाम। प्रत्येक संध्या रामलला की आरती व श्रृंगार लोगों को भक्ति में डुबोय रखा तो संगीत की सरिता में दर्शक गोते लगाते रहें। समारोह के समापन सत्र में बिहार की चर्चित कथक नृत्यांगना आदित्या श्रीवास्तव ने कथक की शुरुआत भगवान राम की वंदना “जय जय जय रघुबीर त्रिपुरारी” से करते हुए तीनताल में पारम्परिक कथक एवं बोल टुकड़ों पर क्रिकेट का खेल, सर्प की चाल की आकर्षक प्रस्तुति दी। वही ठुमक चलत राम चंद्र बाजत पैजानिया पर राम के बाल रूप एवं कौशल्या के वात्सल्य भाव की से दर्शकों को भाव विभोर कर दिया। वही डॉ. लाल बाबू निराला व शिवनंदन प्रसाद श्रीवास्तव ने तबले की थाप से पूरे वातावरण को लयात्मक कर दिया। महेश यादव ने राग जौनपुरी से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। इस समारोह में विदुषी बिमला देवी, श्रेया पांडेय, अजीत पांडेय, आरोही, सागर व चाँदनी ने अपने स्वरों से समां बाँधा। वहीं हर्षिता विक्रम, सिद्धि आनंद, सोमी सोनी, शान्वी सोनी, राका श्रीवास्तव ने कथक नृत्य प्रस्तुत कर खूब तालियां बटोरी। समापन सत्र का उद्घाटन करते हुए मशहुर तबला वादक राणा प्रताप सिन्हा ने कहा कि ठाकुरबाड़ी की संगीत परंपरा एक शताब्दी से भी ज्यादा प्राचीन है। आरा में शास्त्रीय संगीत की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि अत्यंत समृद्ध है। संगीत के क्षेत्र में आरा का वर्तमान भी सुखद है। युवा पीढी की साधना को देखकर पुराने गौरव को प्राप्त करने की संभावना प्रबल हो रही है। मंच संचालन शिक्षिका स्मिता सिंह व धन्यवाद ज्ञापन प्रोफेसर ट्विंकल केशरी ने किया। इस अवसर पर कवियित्री डॉ. ममता मिश्रा, डॉ. किरण कुमारी, कवि जनमजय ओझा, रंगकर्मी कृष्णा यादव कृष्नेंदु, संगीत प्रेमी अनिल सिन्हा, सुशील देहाती व अमित रंजन समेत कई गणमान्य उपस्थित थें।


