
RKTV NEWS/गोरखपुर (उत्तर प्रदेश)27 मार्च।लोकगायक डॉ. राकेश श्रीवास्तव को उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा लोकगायन के क्षेत्र में प्रतिष्ठित उत्तर प्रदेश संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार हेतु नामित किया गया है। यह पुरस्कार एक भव्य समारोह में अप्रैल माह में महामहिम राज्यपाल उत्तर प्रदेश द्वारा लखनऊ में दिया जाएगा।
इस उपलब्धि से भोजपुरी समाज एवं सांस्कृतिक जगत में हर्ष का वातावरण है। डॉ. राकेश श्रीवास्तव लंबे समय से पारंपरिक भोजपुरी लोकगीतों के संरक्षण, संवर्धन एवं प्रचार-प्रसार में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। लोकधुनों और पारंपरिक गीतों को नई पीढ़ी तक पहुँचाने के उनके सतत प्रयासों को सांस्कृतिक क्षेत्र में विशेष सम्मान प्राप्त है। वे आकाशवाणी के ए-ग्रेड अनुमोदित लोकगायक हैं तथा भारतीय रेल में मुख्य कार्यालय अधीक्षक के पद से सेवा निवृत्त हो चुके हैं।
भोजपुरी भाषा और भारतीय लोकसंस्कृति के वैश्विक प्रचार हेतु भारत सरकार द्वारा वर्ष 2023 में उन्हें यूनाइटेड स्टेट्स भेजा गया, जहाँ उन्होंने अपनी प्रस्तुतियों से भारतीय लोकधारा की विशिष्ट पहचान स्थापित की। वर्ष 2024 में मॉरिशस सरकार के आमंत्रण पर आयोजित अंतरराष्ट्रीय भोजपुरी महोत्सव में उनके व्याख्यान एवं सांस्कृतिक प्रस्तुति को विशेष सराहना मिली। इसके अतिरिक्त थाईलैंड, सिंगापुर तथा ओमान सहित अनेक देशों में उन्होंने भोजपुरी लोकसंस्कृति का प्रभावशाली प्रतिनिधित्व किया है।
डॉ राकेश श्रीवास्तव पूर्व में उत्तर प्रदेश संगीत नाटक अकादमी के सदस्य रह चुके हैं। वर्तमान में वे भोजपुरी एसोसिएशन ऑफ इंडिया “भाई” के राष्ट्रीय अध्यक्ष तथा विश्व हिंदू महासंघ के सांस्कृतिक प्रकोष्ठ के प्रदेश अध्यक्ष के रूप में भी सक्रिय दायित्व निभा रहे हैं।
भोजपुरी गीतों में बढ़ती अश्लीलता के विरुद्ध उनका सतत अभियान समाज में विशेष चर्चा का विषय बना हुआ है। वे निरंतर शुद्ध, संस्कारित एवं लोकमूल्यों से युक्त भोजपुरी साहित्य और संगीत के पक्षधर रहे हैं।
समकालीन भोजपुरी लोकसंगीत के क्षेत्र में डॉ. राकेश श्रीवास्तव एक महत्त्वपूर्ण नाम के रूप में स्थापित हैं। लोकपरंपरा, अकादमिक शोध और प्रशिक्षण के क्षेत्र में उनके योगदान को विशेष रूप से उल्लेखनीय माना जाता है। तीन दशकों से अधिक समय से सक्रिय डॉ. श्रीवास्तव ने भोजपुरी लोकधारा को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाने का कार्य किया है।
20 मई, 1963 को गोरखपुर में जन्मे डॉ. श्रीवास्तव को संगीत की प्रारंभिक प्रेरणा अपनी माता स्वर्गीय मैनावती देवी श्रीवास्तव से प्राप्त हुई, जो स्वयं भोजपुरी लोकगायन की प्रतिष्ठित साधिका थीं। उन्होंने स्नातक स्तर तक शिक्षा प्राप्त की तथा मौनीश्री विद्यापीठ एवं विक्रमशिला विद्यापीठ से “विद्यावाचस्पति” की मानद उपाधि अर्जित की।
व्यावसायिक जीवन में वे पूर्वोत्तर रेलवे, गोरखपुर में मुख्य कार्यालय अधीक्षक के पद से सेवानिवृत्त हुए। साथ ही वे आकाशवाणी के ‘ए ग्रेड’ अनुमोदित लोकगायक रहे हैं तथा भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद (ICCR) के पैनल कलाकार के रूप में भी कार्यरत रहे। वे उत्तर प्रदेश संगीत नाटक अकादमी के पूर्व सदस्य और भोजपुरी एसोसिएशन ऑफ इंडिया के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं।
शैक्षणिक क्षेत्र में डॉ. श्रीवास्तव ने भोजपुरी लोकसंगीत को विश्वविद्यालयीय अध्ययन से जोड़ने की दिशा में कई महत्त्वपूर्ण पहल की हैं। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के साथ संरक्षण हेतु समझौता, काशी हिन्दू विश्वविद्यालय में कार्यशालाएँ तथा विभिन्न महाविद्यालयों में प्रशिक्षण कार्यक्रम उनके प्रमुख योगदानों में शामिल हैं। उनकी शिक्षण पद्धति में सस्वर व्याख्यान, लोकधुनों का विश्लेषण और व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रमुख हैं।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी उन्होंने थाईलैंड, सिंगापुर, ओमान, संयुक्त राज्य अमेरिका और मॉरीशस में भोजपुरी लोकसंगीत की प्रस्तुतियाँ दी हैं। वर्ष 2024 में मॉरीशस में आयोजित भोजपुरी महोत्सव में उनके सस्वर व्याख्यान को विशेष सराहना मिली, जिससे प्रवासी भारतीय समुदाय में भोजपुरी की सांस्कृतिक पहचान और सुदृढ़ हुई।
डॉ. श्रीवास्तव लोकगीतों को भारतीय समाज की सांस्कृतिक स्मृति के रूप में देखते हैं और शुद्ध एवं श्लील भोजपुरी गायन के पक्षधर हैं। वे लोकसंगीत के संरक्षण, शोध और डिजिटल अभिलेखीकरण की दिशा में कार्य करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
भविष्य में वे भोजपुरी लोकसंगीत को विश्वविद्यालयीय पाठ्यक्रम में शामिल कराने, शोध को बढ़ावा देने तथा वैश्विक मंचों पर इसकी प्रतिष्ठा को सुदृढ़ करने की दिशा में कार्यरत हैं।


