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सरदार बल्लभ भाई पटेल

सरदार बल्लभ भाई पटेल

दो-दो फूल हैं खिले बाग में, एक नगर एक गाँव में; एक आन्नद भवन में पलता, एक करमसद गाँव में।
एक संगम का पानी पीता, एक सागर की बाँह में, एक बैरिस्टर के घर पलता, एक विद्रोही की छाँव में।
सागर तट का फूल विहँसता बगीया झवेर भाई के; सिंच-सिंच कर कैसे रखती, देखो उस लादो बाई को।
थी रही कृष्णा की कर्मभूमि, और भूमि थी रणछोड़ भाई की; कभी धरती रही दयानन्द की, बापू और विट्ठल भाई की।
31 अक्टूबर 1875 का दिन, कितना रहा महान है; आज वहीं बल्लभ भाई जन्मे, समझो उग आया चट्टान है।
बस उखाड़कर दूर फेंकना, हर खूँटे को, जो राहों में अड़चन हो; सहज खिलैना उनका ये बस, चाहे जितना बड़ा भी अड़चन हो।
मरी भली हो पत्नी घर पर, नहीं वह तार, द्रवित कर पाया; उससे अधिक द्रवित उस दीन पर, जिसको कोई नाहक ही, अपराधी ठहराया
बोले, जो मरी वे मरी, बचे को क्यों मरने दूंगा; क्षमता है तो फिर उसे, काल के गालों में नहीं जाने दूँगा।
बारदोली के वीर ये कितना, कृषकों में जोश जगा बैठे हो; अंग्रेजी सत्ता को ही तो, आज कंपा बैठे हो।
लो सिर पर ‘सरदार’ ताज आज इसे पहनाता हूँ; तेरे ही हर कदमों पर चलने को, हम तो कसमें खाता हूँ।
सारा देश उमड़ आया, तुम्हें देखकर आगे-आगे; बल पाकर फिर गाँधी आगे, नेहरू जागे, मेरठ जागा, चम्पारण भी आगे-आगे।
आजादी के आते कदमों को, पहचान लिया बल्लभ भाई ने; करो या मरो को, ठान लिया, फिर बल्लभ भाई ने।
दिग्भ्रमित किया अंग्रेजों ने कहकर, आजादी तो देंगे; पर ऐसे ही सारा देश न देंगे; भारत को दो फाँक किये ही देंगे।
बोले नेहरू बोले जिन्ना, दे दो पहले, जैसे भी हो दे दो; गरजे पटेल तब, आजादी तो लेके रहेंगे, अंग्रेजों तुम देश छोड़कर, जैसी भी हो भागो
तब भार आंतरिक थामें पटेल ने, कैसी कठीन अवस्था में, धुल चटाकर मिला लिए तब, सभी रियासत अपनी सत्ता में।
फिर 15 दिसम्बर 1950 को, यह सूर्य गया अस्ताचल को; आओ अर्ध्य करे उसे सूर्य को, कहें निशा को आलोकित करना अस्ताचल से
हे लौह पुरुष ! इतना संबल तू देते रहना, हर कदम पड़े तेरी कदमों पर; हम प्राण न्योछावर कर पाये, भारत माँ के चरणों पर।

(उक्त कविता ख्यातिप्राप्त लेखक,कवि,व्यंग्यकार,समीक्षक, अनुवादक “डॉ कृष्ण दयाल सिंह”जो एक अवकाश प्राप्त डाक सेवा अधिकारी भी है, उनके साहित्य काल के शुरूआती दौर में 09 फरवरी 1998 को प्रकाशित की गई कविता संग्रह पुस्तक “यत्र-तत्र”से ली गई है और यह कवि की उक्त संग्रह की नौवीं रचना है। RKTV NEWS नित्य इनके संग्रहित पुस्तक से क्रमवार एक एक रचना प्रकाशित करेगी। इनकी कई रचनाएं विभिन्न पत्र पत्रिकाओं और समाचार पत्रों में प्रकाशित होती रहती है साथ ही इनके दर्जनों पुस्तक भी प्रकाशित हो चुके है, वर्तमान में बिहार राज्य के भोजपुर जिला अंतर्गत आरा के वशिष्ठपुरी में निवास करते है। सुझाव और संपर्क हेतु: 9570805395)

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