
आरा/भोजपुर (डॉ दिनेश प्रसाद सिन्हा)04 फरवरी।महाराज जी लखनऊ घराने के सबसे उदयीमान सितारा हैं l महाराज जी के नृत्य की चमक से पूरा संसार प्रकाशित हो रहा हैं l घरानों की सीमाओं से उपर होकर आज़ पूरी दुनिया महाराज जी की शैली को अपना चुकी हैं l पंडित बिरजू महाराज जैसे विभूति युग प्रवर्तक होते हैं जिन्होंने कला को एक नई दिशा दी है। उक्त बातें वक्ताओं ने पंडित बिरजू महाराज जी के व्यक्तित्व पर प्रकाश डालते हुए कही। अवसर था विश्वविख्यात नृत्य सम्राट पंडित बिरजू महाराज की जयंती का। इस अवसर पर शिवादी द्वारा महाजन टोली स्थित सेंटर पर “संपूर्णता में पंडित बिरजू महाराज” कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के शुभारंभ में बिरजू महाराज जी के प्रतिमा पर माल्यार्पण एवं पुष्पांजलि किया गया। इसके बाद उपस्थित वक्ताओं ने संगीत नृत्य जगत में महाराज जी के योगदान पर परिचर्चा करते हुए सरकार से भारत रत्न की मांग की। इस अवसर पर सुविख्यात तबला वादक राणा प्रताप सिंहा ने तबला वादन प्रस्तुत करते हुए बनारस एवं अजराड़ा घराने की खूबसूरत बंदिशों को प्रस्तुत कर समां बाँधा। वही सुविख्यात कथक नृत्यांगना सोनम शांडिल्य ने कथक की शुरुआत शिव के आनंद तांडव “डिमक डिमक डमरू कर बाजे प्रेम मगन नाचे भोला” से करते हुए तीन ताल में पारंपरिक बंदिशों को प्रस्तुत करते हुए बनारसी दादरा ” डगर बीच कैसे चलू मग रोके कन्हैया ” पर भाव अभिनय से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। तबले पर संगत गुरु बक्शी विकास व हारमोनियम पर अजीत पांडेय ने संगत से रंग बिखेरा। मंच संचालन कथक नृत्यांगना आदित्या व धन्यवाद ज्ञापन श्रेया पांडेय ने किया।
