
RKTV NEWS/देवघर (झारखंड)24 जनवरी।उपायुक्त सह जिला दण्डाकारी नमन प्रियेश लकड़ा ने आज समाहरणालय परिसर से जन्म-मृत्यु का रजिस्ट्रीकरण संबंधित जागरूकता रथ का हरी झण्डी दिखाकर रवाना किया। इस दौरान उपायुक्त द्वारा जानकारी दी गयी कि रजिस्ट्रीकरण जागरूकता अभियान रथ के माध्यम से जिला, प्रखण्ड, पंचायत स्तर पर लोगों को जन्म मृत्यु का रजिस्ट्रीकरण से जुड़ी विस्तृत जानकारी दी जायेगी।
इसके अलावे उपायुक्त नमन प्रियेश लकड़ा द्वारा जानकारी दी गयी कि जन्म-मृत्यु निबंधन क्यों जरूरी है। साथ ही जन्म-मृत्यु निबंधन में होने वाली समस्याओं को दूर करने की जानकारियों के अलवा विभिन्न प्रपत्रों को भर कर आवेदन करने की प्रक्रिया की विस्तृत जानकारी से अवगत कराया। आगे उपायुक्त ने कहा कि जन्म प्रमाण पत्र लेना बच्चे का प्रथम वैधानिक अधिकार और पहचान पत्र है। जनसंख्या और स्वास्थ्य संबंधी आंकड़ों में भी इनका महत्व है। जन्म-मृत्यु रजिस्ट्रीकरण की प्रक्रिया के तहत घर के मुखिया या सगे संबंधी, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता या कोटवार को घर में जन्म-मृत्यु घटित होने पर, गांव के मामले में गांव के मुखिया द्वारा जन्म-मृत्यु होने पर पंचायत सचिव (उपरजिस्ट्रार) को घटना घटित होने के 21 दिन के अंदर सूचना देना आवश्यक है। अस्पताल या अन्य संस्थाओं में जन्म-मृत्यु होने पर अस्पताल संस्थाओं के प्रभारी द्वारा जिला रजिस्ट्रार को सूचना दिया जाना है। नगरीय क्षेत्र में नगरीय निकायों के अधिकारी रजिस्ट्रार के रूप में काम करते हैं। निजी अस्पतालों द्वारा नगरीय निकायों के रजिस्ट्रार को उनके अस्पताल में हुए जन्म-मृत्यु की सूचना दी जानी है। ऐसे में जन्म का रजिस्ट्रीकरण कराना बच्चे का जन्मसिद्ध अधिकार है। वहीं जन्म एवं मृत्यु का पंजीकरण कराना कानुनन अनिवार्य है।
इस दौरान उपरोक्त के अलावे जिला सांख्यिकी पदाधिकारी, संबंधित अधिकारी व समाहरणालय के कर्मी आदि उपस्थित थे।
