
RKTV NEWS/दुमका (झारखंड)17 जनवरी।निदेशालय समाज कल्याण (झारखंड महिला विकास समिति) के तत्वावधान में महिला, बाल विकास एवं सामाजिक सुरक्षा विभाग द्वारा कोवेंशन सेंटर, दुमका में सामाजिक कुरीति निवारण, राज्य सरकार की योजनाएँ एवं बाल विवाह मुक्त झारखंड विषय पर एक दिवसीय प्रशिक्षण-सह-कार्यशाला का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य समाज में व्याप्त कुरीतियों—विशेषकर बाल विवाह एवं डायन प्रथा जैसी अमानवीय प्रथाओं के उन्मूलन के प्रति जनजागरूकता बढ़ाना तथा महिलाओं एवं किशोरियों के सशक्तिकरण हेतु राज्य सरकार द्वारा संचालित योजनाओं की जानकारी जन-जन तक पहुँचाना रहा।
कार्यशाला में यह स्पष्ट किया गया कि बाल विवाह एक संज्ञेय एवं गैर-जमानती अपराध है, जिसके लिए कानून में कठोर दंड का प्रावधान है। किसी भी संदिग्ध स्थिति में महिला हेल्पलाइन-181, चाइल्ड हेल्पलाइन-1098 एवं पुलिस हेल्पलाइन-112 पर तत्काल सूचना देने की अपील की गई।
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री मंईयां सम्मान योजना, सावित्रीबाई फुले किशोरी समृद्धि योजना, मुख्यमंत्री कन्यादान योजना, राज्य विधवा पुनर्विवाह प्रोत्साहन योजना, सामाजिक कुरीति निवारण योजना एवं मिशन शक्ति योजना सहित अन्य कल्याणकारी योजनाओं की विस्तृत जानकारी दी गई।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि दुमका लोकसभा क्षेत्र के सांसद नलिन सोरेन ने अपने संबोधन में कहा कि आज का विषय समाज की उन गहरी जड़ें जमाए कुरीतियों से जुड़ा है, जो सामाजिक विकास में सबसे बड़ी बाधा बनी हुई हैं। उन्होंने विशेष रूप से बाल विवाह एवं डायन प्रथा का उल्लेख करते हुए कहा कि ये दोनों कुरीतियाँ आज भी समाज के लिए गंभीर चुनौती हैं और इनका उन्मूलन हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।
उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी कम उम्र में बच्चियों की शादी कर दी जाती है, जिससे उनका शारीरिक, मानसिक एवं सामाजिक विकास बाधित होता है। कम उम्र में विवाह होने से बच्चियों को अनेक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ता है, जिसका प्रभाव उनके पूरे जीवन पर पड़ता है। यह न केवल उनके भविष्य को प्रभावित करता है, बल्कि समाज की प्रगति को भी अवरुद्ध करता है।
उन्होंने कहा कि इस प्रकार के जागरूकता कार्यक्रम केवल जिला स्तर तक सीमित नहीं रहने चाहिए, बल्कि पूरे देश में आयोजित किए जाने चाहिए। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यदि निरंतर ऐसे कार्यक्रम आयोजित किए जाएँ, तो बाल विवाह जैसी सामाजिक बुराइयों पर प्रभावी रोक लगाई जा सकती है।
उन्होंने उपस्थित सभी लोगों से आग्रह किया कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में लोगों को बाल विवाह के दुष्परिणामों के प्रति जागरूक करें, सही उम्र में विवाह के लिए प्रेरित करें तथा डायन प्रथा जैसी अमानवीय कुरीतियों के खिलाफ एकजुट होकर आवाज उठाएँ। उन्होंने शिक्षा और जागरूकता को सामाजिक कुरीतियों के उन्मूलन का सबसे सशक्त माध्यम बताया।
जामा विधायक डॉ. लुईस मरांडी ने कहा कि दैनिक जीवन में आज भी बाल विवाह जैसी कुप्रथाएँ देखने को मिलती हैं। सरकार ने इसके विरुद्ध सख्त कानून बनाए हैं, लेकिन उन्हें प्रभावी रूप से लागू करना समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि किशोरी बच्चियों को शारीरिक एवं मानसिक रूप से परिपक्व होने का पूरा अवसर दिया जाना चाहिए, ताकि वे अपने जीवन के निर्णय स्वयं ले सकें। इसके लिए अभिभावकों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है।
उन्होंने बाल विवाह मुक्त जिला बनाने के लिए समाज, प्रशासन और सरकार के बीच समन्वय की आवश्यकता पर बल दिया तथा सभी से सामाजिक बुराइयों के खिलाफ एकजुट होकर कार्य करने का आह्वान किया।
उप विकास आयुक्त अनिकेत सचान ने कहा कि राज्य सरकार की प्राथमिकताओं में बाल विवाह की रोकथाम एक महत्वपूर्ण विषय है। केवल कानून के सहारे इस कुप्रथा को समाप्त नहीं किया जा सकता। इसके लिए समाज की सक्रिय भागीदारी और शिक्षा अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि जिन क्षेत्रों में शिक्षा का स्तर बेहतर है, वहां बाल विवाह की घटनाएं स्वतः कम हो जाती हैं। समाज यदि सामूहिक रूप से बाल विवाह को अस्वीकार कर दे, तो यह समस्या स्वतः समाप्त हो सकती है।
जिला परिषद अध्यक्ष जॉयस बेसरा ने महिला सशक्तिकरण पर बल देते हुए कहा कि जब महिला सशक्त होगी, तभी झारखंड सशक्त बनेगा। उन्होंने कहा कि छोटी उम्र में बच्चियों की शादी कर देना उनके स्वास्थ्य, शिक्षा और भविष्य—तीनों के लिए गंभीर नुकसानदायक है। इससे कुपोषण, मातृ स्वास्थ्य संबंधी जटिलताएँ एवं मानसिक तनाव जैसी समस्याएँ उत्पन्न होती हैं।
उन्होंने अभिभावकों से अपील की कि वे कानून द्वारा निर्धारित सही उम्र में ही अपने बच्चों की शादी करें तथा बेटियों को शिक्षा, स्वास्थ्य एवं आत्मनिर्भरता के अवसर प्रदान करें। उन्होंने कहा कि जागरूकता, शिक्षा और कानून के प्रभावी क्रियान्वयन से ही बाल विवाह जैसी सामाजिक बुराइयों का उन्मूलन संभव है।
इस अवसर पर सांसद नलिन सोरेन ने उपस्थित सभी लोगों को बाल विवाह मुक्त समाज के निर्माण की शपथ भी दिलाई।
इस दौरान बाल विवाह को रोकने के दिशा में कार्य करने वाले हीरामनि टुडू सेविका विजयबांध, बसंती मुर्मू मुखिया,पंचायत-नाचनगढ़िया एवं कमीशन सोरेन,मुखिया,पंचायत-भूटकोडिया को सम्मानित किया गया।
इस दौरान सामाजिक कुरीति निवारण से संबंधित जागरूकता रथ को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया गया।
बाल विवाह को रोकने और कम्युनिटी आधारित बाल संरक्षण सिस्टम को मज़बूत करने के लिए, जिला बाल संरक्षण इकाई के रिसोर्स पर्सन प्रेम कुमार, अमर जोशी ने ज़िला स्तर से लेकर ग्राम स्तर तक बाल कल्याण और संरक्षण समिति के गठन, कार्य एवं दायित्व पर विस्तार से चर्चा की। दुमका में बच्चों की सुरक्षा से जुड़े विभिन्न मुद्दों से निपटने के लिए स्थायी और उप-स्थायी समितियों की भूमिका पर ज़ोर दिया गया।
