
RKTV NEWS/गिरिडीह(झारखंड )04 जनवरी।श्रम अधीक्षक, प्रवीण कुमार के द्वारा जानकारी दी गई कि झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSCC) के अंतर्गत गिरिडीह जिले में नव नियुक्त 11 अभ्यर्थियों में से 06 श्रम प्रवत्तन पदाधिकारियों ने आवंटित प्रखंडों में योगदान दिया है। जिसमें से 1. सौरभ कुमार, गांडेय प्रखंड, 2. विवेक कुमार, पीरटांड़, 3. राजेश कुमार, गिरिडीह सदर, 4. सदानंद कुमार, बेंगाबाद, 5. दीपिका कुमारी, राजधनवार, 6. मो० शहाबुद्दीन, डुमरी प्रखंड है। सभी श्रम प्रवत्तन पदाधिकारी को पूरी पारदर्शिता, निष्ठा और जिम्मेदारी के साथ अपने कर्तव्यों का निर्वहन करने हेतु निर्देशित किया गया है। साथ ही नव नियुक्त श्रम प्रवर्तन पदाधिकारी को आवंटित प्रखंड में अपने प्रखंड विकास पदाधिकारी और अंचल अधिकारी के संरक्षण और निर्देशन में कार्य करने का निदेश दिया गया। श्रम विभाग द्वारा श्रमिकों के अधिकारों की रक्षा, सामाजिक सुरक्षा के विस्तार एवं श्रम कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु श्रम प्रवर्तन पदाधिकारी द्वारा निम्नलिखित प्रमुख कार्य किए जाते हैं :
1. श्रम कानूनों से संबंधित कार्य
• कारखाना अधिनियम, न्यूनतम मजदूरी अधिनियम, मजदूरी भुगतान अधिनियम, बोनस अधिनियम, ग्रेच्युटी अधिनियम, ठेका श्रम (विनियमन एवं उन्मूलन) अधिनियम, बाल एवं किशोर श्रम निषेध अधिनियम आदि का अनुपालन सुनिश्चित करना।
• प्रतिष्ठानों/उद्योगों का नियमित निरीक्षण कर श्रम कानूनों के उल्लंघन की जांच।
• श्रमिकों को निर्धारित न्यूनतम मजदूरी, कार्य के घंटे, साप्ताहिक अवकाश एवं अन्य वैधानिक सुविधाएं दिलाना।
• श्रम कानून उल्लंघन के मामलों में नोटिस निर्गत करना एवं आवश्यकतानुसार अभियोजन की कार्रवाई।
• औद्योगिक विवादों में श्रमिकों एवं नियोजकों के बीच समन्वय स्थापित कर समाधान का प्रयास।
2. BOCW (Building and Other Construction Workers) से संबंधित कार्य
• भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार (BOCW) अधिनियम का प्रभावी क्रियान्वयन।
• निर्माण स्थलों का निरीक्षण कर श्रमिकों की सुरक्षा, स्वास्थ्य एवं कल्याण सुविधाओं की जांच।
• BOCW बोर्ड में निर्माण श्रमिकों का निबंधन कराना।
• निबंधित निर्माण श्रमिकों को योजनाओं जैसे – दुर्घटना सहायता, चिकित्सा सहायता, मातृत्व लाभ, शिक्षा सहायता, पेंशन आदि का लाभ दिलाना।
• ठेकेदारों एवं नियोक्ताओं द्वारा सुरक्षा उपकरणों एवं मानकों के पालन को सुनिश्चित करना।
3. असंगठित श्रमिकों से संबंधित कार्य
• असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों की पहचान एवं निबंधन (ई-श्रम पोर्टल)।
• असंगठित श्रमिकों को सामाजिक सुरक्षा योजनाओं से जोड़ना।
• घरेलू कामगार, रिक्शा चालक, ठेला/फेरीवाले, कृषि मजदूर, दुकानों एवं प्रतिष्ठानों में कार्यरत श्रमिकों के अधिकारों की रक्षा।
• श्रमिकों को श्रम कानूनों एवं सरकारी योजनाओं के प्रति जागरूक करना।
• शिकायत निवारण एवं सहायता प्रदान करना।
4. प्रवासी श्रमिकों से संबंधित कार्य
• अंतर-राज्यीय प्रवासी श्रमिक अधिनियम का अनुपालन सुनिश्चित करना।
• प्रवासी श्रमिकों का निबंधन एवं उनके कार्यस्थल का निरीक्षण।
• प्रवासी श्रमिकों को मजदूरी भुगतान, आवास, चिकित्सा एवं अन्य वैधानिक सुविधाएं दिलाना।
• आपदा अथवा विशेष परिस्थितियों में प्रवासी श्रमिकों को सहायता एवं समन्वय।
• प्रवासी श्रमिकों की समस्याओं के त्वरित समाधान हेतु संबंधित विभागों से समन्वय।
श्रम प्रवर्तन पदाधिकारी द्वारा उपर्युक्त कार्यों के माध्यम से श्रमिकों के हितों की रक्षा, सामाजिक न्याय की स्थापना एवं श्रम कानूनों का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाता है।
