
कोईलवर/भोजपुर (डॉ दिनेश प्रसाद सिन्हा)05 दिसंबर।कोइलवर प्रखंड के पचैना गांव में आयोजित श्री लक्ष्मी नारायण महायज्ञ का समापन गुरुवार को प्रख्यात संत लक्ष्मी प्रपन्नाचार्य जीयर स्वामी जी महाराज के प्रेरक प्रवचन के साथ हुआ। अंतिम दिन दिए गए उपदेश में उन्होंने जीवन की व्यथा और उसके समाधान पर गहरी बातों को सहज भाषा में रखते हुए कहा कि मनुष्य के सभी दुखों की जड़ अनियंत्रित कामना है।
स्वामी जी ने कहा कि जब इच्छाएँ पूरी नहीं होतीं तो मन अशांत हो जाता है। इसलिए जीवन में जो भी मिले उसे प्रभु की इच्छा मानकर स्वीकार करने से ही सच्ची शांति मिलती है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि अपेक्षा कम और संतोष अधिक ही तनावमुक्त जीवन का वास्तविक मंत्र है।
संत ने आगे कहा कि पूजा, दान, व्रत या तीर्थ यात्रा से उतनी शांति नहीं मिलती, जितनी मन की स्थिरता और संयम से प्राप्त होती है। आज का मानव धन की अंधी दौड़ में उलझ कर अवसाद और अकेलेपन का शिकार होता जा रहा है, जबकि सादगी और संतोष से ही जीवन का सौंदर्य बढ़ता है।
महिलाओं के सम्मान पर बोलते हुए जीयर स्वामी जी ने कहा कि जहां नारी की पूजा होती है, वहीं देवता वास करते हैं। उचित शब्द और मर्यादित व्यवहार से ही समाज की गरिमा सुरक्षित रहती है। उन्होंने यह भी कहा कि महिलाओं का अपने अभिभावकों के साथ रहना परिवार, समाज और संस्कृति को मजबूती देता है।
