
भोपाल/मध्यप्रदेश (मनोज कुमार प्रसाद) 21 नवम्बर। रबीन्द्रनाथ टैगोर विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित “विश्वरंग” के आनुषांगिक कार्यक्रम “पूर्वरंग” के अंतर्गत “स्टेट बैंक साहित्य एवम कला परिषद” भोपाल द्वारा हिंदी भवन में काव्यगोष्ठी का कल आयोजन किया गया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता संस्था अध्यक्ष साहित्यकार गोकुल सोनी ने की। मुख्य अतिथि के रूप में वनमाली सृजन पीठ के निदेशक मुकेश वर्मा, विशिष्ट अतिथि साहित्य अकादमी के निदेशक डा. विकास दवे, सारस्वत अतिथि द्वय सुचर्चित साहित्यकार सुरेश पटवा एवम हरदा से पधारे वरिष्ठ साहित्यकार डा. प्रभुशंकर शुक्ल भी मंचासीन रहे । कार्यक्रम का सफल संचालन जयंत भारद्वाज ने किया। संगीता भरद्वाज द्वारा सरस्वती वंदना उपरांत स्वागत उद्बोधन मनोज गुप्त मनोज ने दिया।
डा. विकास दवे ने संस्था को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि आशा है कि स्टेट बैंक कर्मियों की यह संस्था समाज में उसी ईमानदारी और सुचिता का वातावरण निर्मित करेगी जो बैंक वालों की पहचान है। मुकेश वर्मा ने इस अवसर पर विश्वरांग के कार्यक्रमों से अवगत कराया।
गोष्ठी का शुभारंभ छतरपुर से पधारे अवनींद्र खरे अंशुमान ने “जग का कुम्हार यह” कविता से किया। स्टेट बैंक के कवि यशवंत सिंह ने “पत्नी और साइकिल” की तुलना करती मनोरंजक कविता पढ़ी। होशियार सिंह बघेल ने “गीत मेरे जीत के” कविता, स्टेट बैंक के उमाशंकर खरया ने “न गर्व करो वैभव पर” एवम बिहारी लाल सोनी अनुज ने एक सुंदर गीत प्रस्तुत किया।
तुलसी साहित्य अकादमी के राष्ट्रीय अध्यक्ष डा. मोहन तिवारी आनंद ने प्रभावी समसामयिक दोहे प्रस्तुत किए, कला मंदिर के राष्ट्रीय अध्यक्ष डा. गौरीशंकर शर्मा गौरीश ने सांप्रदायिक सद्भाव पर, संस्था के संरक्षक सुरेश पटवा ने भी प्रभावशाली कविता प्रस्तुत की पुरुषोत्तम तिवारी ने पढ़ा “यह उदय का रूप है, क्यों हो रहा अंधकार”, मोहम्मद आजम ने हिंदी ग़ज़ल पढ़कर लोगों को प्रभावित किया, शारदा दयाल श्रीवास्तव ने “पैरोडी” पढ़कर हंसाया, यशवंत गोरे ने गद्य व्यंग्य पढ़कर वातावरण में नया रंग भरा, बीच में संचालक जयंत भारद्वाज ने “मिमिक्री” आइटम्स से लोगों को खूब हंसाया। लक्ष्मीकांत जावणे ने “भस्म से इतिहास लिख” वीना विद्या गुप्ता ने “खूं से सनी एक बेटी” दिनेश गुप्ता मकरंद ने “वेद ही विज्ञान है” अशोक तिवारी अमन ने “में खुशियों का गीतकार हूं” डा संगीता गुप्ता ने “शब्दों के हीरे मोती मत खोना दंभ प्रमाणों में” पढ़ा। कवि डा. राजेश तिवारी, शिवांश सरल, शिवकुमार दीवान, दिनेश भदौरिया शेष, मनोज गुप्त मनोज, विपिन बिहारी वाजपेई, कैलाश मेश्राम, आदि की कविताओं ने भी खूब रंग जमाया।
अंत में अध्यक्षता कर रहे गोकुल सोनी ने संस्था के उद्देश्य और गतिविधियों की जानकारी देते हुए कहा कि यह संस्था स्टेट बैंक के साहित्यकारों और साहित्यिक के क्षेत्र के चर्चित साहित्यकारों के बीच पुल का काम करेगी। उन्होंने गीत “कल तलक किरदार था जिनका अपावन, आज जाने कैसे चंदन हो गए हैं।” पढ़कर वातावरण में रस घोला। कार्यक्रम में बाल कल्याण शोध केंद्र के निदेशक महेश सक्सेना, चरणजीत सिंह कुकरेजा, डा मीनू पाण्डेय नयन, मधुवेंद्र भूषण सिंघल, सहित बड़ी संख्या में साहित्यकारों ने अपनी उपस्थिति दी।
