
आरा/भोजपुर (डॉ दिनेश प्रसाद सिन्हा)15 नवंबर।आरा के शोधार्थी का बिरबल साहनी पुराविज्ञान संस्थान लखनऊ में उत्कृष्ट व्याख्यान के लिए शोधार्थी फ़ैज़ान अहमद ख़ान सम्मानित किया गया।
बताते चलें की ये आरा के प्रमुख समाज सेवी सरफराज अहमद और अ प्रा प्रधानाध्यापिका सबिहा बानू के पुत्र हैं।यह राष्ट्रीय पांच दिवसीय कार्यशाला बिरबल साहनी पुराविज्ञान संस्थान लखनऊ में 3 से 7 नवम्बर 2025 तक आयोजित हुआ। इन्होंने दिये गये टौपिक “भू-रासायनिक अनुसंधान हेतु स्पेक्ट्रोमेट्रिक विधियाँ पर शोध परक व्याख्यान देना था। शोधार्थी फ़ैज़ान अहमद ख़ान ने अपने उत्कृष्ट तथ्यपरक व्याख्यान,विषय विंदु तथा किये गये कार्यों की विवेचना से सबको प्रभावित किया।इसके साथ-साथ समर्पित वॉलंटियरिंग और विद्यार्थियों के मार्गदर्शन से सभी प्रतिभागियों को प्रभावित किया।इस कार्यशाला डॉ. जी.पी. गुरुमूर्ति (वैज्ञानिक ‘डी’) के संयोजन और डॉ. अनुपम शर्मा (वैज्ञानिक ‘जी’) के सह-संयोजन में आयोजित की गई। कार्यक्रम को भू-रासायनिक सोसाइटी ए.एन.आर.एफ. तथा विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (DST), भारत सरकार के सहयोग से सम्पन्न किया गया। देशभर के विश्वविद्यालयों और अनुसंधान संस्थानों से आए कुल 32 प्रतिभागियों ने इस प्रशिक्षण में हिस्सा लिया। प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को लोनई नदी खंड पर ले जाकर अवसाद, कैलक्रेट और जल नमूनों के संकलन का फील्ड प्रशिक्षण दिया गया। इसके बाद बीएसआईपी की अत्याधुनिक प्रयोगशालाओं में ICP–OES, ICP–MS, XRD, XRF और IRMS जैसे उपकरणों के माध्यम से नमूना तैयारी और भू-रासायनिक विश्लेषण की विधियों का प्रत्यक्ष अभ्यास कराया गया।उन्होंने अत्यंत सरल भाषा में समझाया कि पृथक्करण (Separation) और पूर्व-संकेन्द्रण (Preconcentration) भू-रासायनिक विश्लेषण की सटीकता की मूलभूत नींव हैं। उन्होंने बताया कि सॉल्वेंट एक्सट्रैक्शन, आयन एक्सचेंज क्रोमैटोग्राफी, सॉलिड फेज एक्सट्रैक्शन, को-प्रेसिपिटेशन और केलेशन तकनीकें किस प्रकार सूक्ष्म तत्वों की पहचान और मापन में उपयोगी हैं।
उन्होंने यह भी बताया कि इन तकनीकों का प्रयोग समुद्री एवं नदी अवसादों, आइसोटोप भू-रसायन, पेलिओरेडॉक्स अध्ययन तथा पर्यावरणीय प्रदूषण मूल्यांकन जैसे क्षेत्रों में किया जाता है।कार्यशाला के दौरान डॉ. जी.पी. गुरुमूर्ति ने “भू-रासायनिक विश्लेषण में गुणवत्ता नियंत्रण पर विशेष व्याख्यान दिया और डेटा की सटीकता एवं विश्वसनीयता बनाए रखने में मानक संदर्भ सामग्रियों के महत्व पर बल दिया।
कार्यशाला के सफल आयोजन में फ़ैज़ान अहमद ख़ान को उत्कृष्ट व्याख्यान देने, स्वयंसेवा और छात्र समूह परियोजना के मार्गदर्शन के लिए एक स्मृति-चिह्न और प्रशस्ति-पत्र देकर सम्मानित किया गया।
