अष्टांग योग : मन और आत्मा के सामांजस्य की प्रक्रिया : ब्रह्मचारी गिरीश जी
भोपाल/मध्यप्रदेश (मनोज कुमार प्रसाद)12 नवंबर।महर्षि सेंटर फॉर एजुकेशनल एक्सीलेंस लंबाखेड़ा में चल रहे “महर्षि राष्ट्रीय सांस्कृतिक महोत्सव “ के द्वितीय दिवस का प्रारंभ गुरु पूजा के साथ किया गया। कार्यक्रम के अंतर्गत महर्षि विद्या मंदिर अयोध्या नगर के विद्यार्थियों द्वारा स्वागत गीत एवं नृत्य की प्रस्तुति दी गई। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि महर्षि विद्या मंदिर विद्यालय समूह के अध्यक्ष माननीय ब्रह्मचारी गिरीश जी रहे। कार्यक्रम के अंतर्गत कई विशिष्ट अतिथिगण एवं निर्णायक भी उपस्थित रहे।
द्वितीय दिवस पर विद्यालय में कई प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया, जिसके अंतर्गत समूह नृत्य प्रतियोगिता ( कनिष्ठ वर्ग) उप-शास्त्रीय गायन प्रतियोगिता (कनिष्ठ वर्ग) वायु वाद्य यंत्र प्रतियोगिता (वरिष्ठ एवं कनिष्ठ वर्ग) अंग्रेजी, हिंदी ,संस्कृत वाद विवाद प्रतियोगिता, अष्टांग योग प्रतियोगिता, वाद्य-ताल प्रतियोगिता , वाद्य – तार प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के अंतर्गत विभिन्न प्रांतो से आए विद्यार्थियों द्वारा आकर्षक प्रस्तुति दी गई। अष्टांग योग प्रतियोगिता के अंतर्गत प्रतिभागियों ने योग के विभिन्न आसनों का उत्तम प्रदर्शन किया। इस अवसर पर ब्रह्मचारी गिरीश जी ने कहा कि अष्टांग योग शरीर – साधना की ही नहीं बल्कि मन और आत्मा के सामांजस्य की पूर्ण प्रक्रिया है, जो अनुशासन से आत्म साक्षात्कार तक की यात्रा कराती है ।
कार्यक्रम क भावातीत ध्यान के द्वारा पूर्ण किया गया।

