RKTV NEWS/सुमन कुमार सिंह,08 जून।गाँव में हूँ । शादी-व्याह की कचरम-कूट है । आज भी बेटहा ताव से और बेटिहा दबाव में सबकुछ निपटा लेने को जी-जान से लगे हैं।धूप दोनो को पका रही है ।बरतिहा हों या तिलकहरू , सब भीतर से ढब-ढब -ढब-ढब , खड़-खड़,खड़-खड़ बज रहे हैं। लगता तो यही है कि टाँग उठाके आकाश को जलप्लावित कर देंगे । रोज कोई न कोई अघट । सप्ताह भीतर की बात है कि पड़ोसी गाँव के एक दुल्हे ने शेरवानी की प्रतीक्षा में बरात जाने से पहले आत्म- हत्या कर ली । दूसरे पड़ोसी गाँव की बारात ससुराल तो पहुँच गई ,पर दुअरपूजा के समय दुल्हे के चाचा ने अपना चोरुआ कट्टा निकाल लिया । एक बार गोली मिस । दूसरी बार फायर क्या हो गया कि गोली पंडितजी की नाक को छुती हुई सीधे दुल्हे की पीठ में ।
मौत का मातम व जेल की जहमत नेवते में मिल गई। गोलीवाली यह घटना कई-कई गाँवों में दुहराई- तिहराई जा रही है । इसी बीच एक जगह पता चल रहा है कि गुरहथी के गहनों को समेटकर लड़की ने शादी से तौबा कर ली । और आज रात की वह घटना जिसने दो बापों का नशा काफ़ूर कर दी है , इस प्रकार है:-कल बड़े धूम-धाम से गाँव से एक बारात निकली ।चार-छह कोस की दूरीवाले किसी गाँव में जाना था । मोछइल व निसइल पिता ने अपना ही जोड़ीदार व पनिगर समधी खोजा था । इधर दरवाजे पर बारात पहुँची, उधर खमखम पुलिस ।
पुलिस को देखते ही दूल्हा,बाप और बराती सामियाना छोड़ भाग चले ।पता चला कि लड़की की उम्र लगभग बारह की थी और लड़का सीधे बत्तीस का । दोनों बापों को ऐतराज नहीं था । बेटी तो ठहरी बछिया ! जिस खूँटे बाँधो ! पर भाई साब , भाई का क्या कहें ! उसी ने चुपके से पुलिस को खबर कर दिया । शहनाई तो ना बजी पर दो मोछइलों की बैंड बज गई ! होत सुबह चर्चा गर्म थी । बेटहवा बाप खइनी मलते भेटा गये । हम सबों की खुशर-फुशर सुनकर थथम गये । खइनी ठोकते हुए बोले “बाबू , कड़इल खाँ हैं हम,कड़इल खाँ । कौन माई का लाल आँख देखाएगा जी ?” तो बस , भाई साहब ! जरा सँभल के । मोछ की बात है जी !
