
दल से हटकर भी पड़ते है मत एम.एल.सी चुनाव में।
आरा/भोजपुर ( नरेंद्र सिंह)05 मई।भोजपुर सह बक्सर स्थानीय प्राधिकार निर्वाचन क्षेत्र से एम एल सी के होने वाले चुनाव में सोशल मीडिया के जरिए एक दूसरे पर प्रत्याशी के परिजन ऐसी ऐसी बातें उछाल रहें हैं,जैसे लगता है की इनके बीच पुरानी दुश्मनी हो।लेकिन सच्चाई यह है की पूर्व में इन परिजनों के बीच आपसी भाई चारा कृष्ण और सुदामा जैसा था।कहने को तो छह हजार छियासी मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे पर मत उसी को ज्यादा प्राप्त होगा जिसकी गांठें आवश्यकता से ज्यादा मजबूत होंगी।क्योंकि इस चुनाव में दल से भी बड़ा होता है धनबल।जो दोनों प्रत्याशियों के परिजनों के बीच आवश्यकता से अधिक विराजमान है।
सोशल मीडिया के द्वारा जो एक दूसरे की कुंडलियां खंगाली जा रही हैं के संबंध में कुछ लिखना भी शर्म जैसा महसूस हो रहा है क्योंकि इनलोगों के पीछे माननीय शब्द भी लगा है।कभी समाज में ये लोग दूसरे रूप में भी देखे जाते थे।तो ऐसे में माना जा रहा है की यह व्यवस्था का दोष है।
इस बार के चुनाव में दोनों प्रत्याशी NDA से कन्हैया प्रसाद और महागठबंधन से सोनू राय इस उपचुनाव में पार्टी प्रत्याशी बने है और दोनों प्रत्याशी के पिता पूर्व एमएलसी रह चुकें है ।

जिसमे लाल दास राय और राधा चरण साह उर्फ सेठ जी है।वैसे लोजपा के हुलास पांडे भी इस क्षेत्र से एमएलसी रह चुकें हैं।पर आज के बदलते राजनीति परिवेश में और चौक चौराहों तथा प्रखंड और पंचायतों में जो दबी जुबान से चर्चाएं चल रही है के अनुसार राजनीति में कोई स्थाई दुश्मन या मित्र नहीं होता है।साथ ही राधा चरण साह हो या फिर लाल दास राय दोनों के अपने पुत्र मोह भी है।तब फिर कौन मजबूत पड़ेगा यह तो समय के गर्त में है। दोनों प्रत्याशी के परिजन अपने अपने कार्यकाल में किए गए विकास कार्यों को भी मतदाताओं के बीच रख रहे हैं।पक्ष- विपक्ष की भूमिका को भी उन्हें समझा रहे है। NDA के प्रत्याशी समझा रहे हैं की उनकी जीत से नीतीश कुमार और मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के हाथ मजबूत जबकि विपक्ष के प्रत्याशी यह समझने का प्रयास कर रहे हैं की जीत हुई तो लालू प्रसाद, राबड़ी देवी और विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव का मिट्टी पलित कर देंगे।वैसे में हमलोग एक जुट होकर NDA को करारा झटका दें ।
खैर इन सब बातों के बीच पक्ष हो या विपक्ष के खेमे से यह बाते सार्वजनिक नहीं हो पा रही कि एक वोट की कितनी कीमत आंकी जा रही है।मतदाता भी इसपर चुप्पी साध ले रहे हैं।वैसे भी इस चुनाव में चुनाव आयोग या फिर निर्वाची पदाधिकारी प्रत्याशी और मतदाताओं के बीच एक कमजोर कड़ी के रूप में देखे जाते हैं।ये बाते सार्वजनिक है।तभी तो गाँठ के मजबूत वाले सर्वाधिक मत प्राप्त करने में सफल हो जाते है।
