
RKTV NEWS/नई दिल्ली 31 अक्टूबर।जामिया मिल्लिया इस्लामिया (जेएमआई) के 105वें स्थापना दिवस के अवसर पर आयोजित ‘तालीमी मेला 2025’ ने दिल्ली की सांस्कृतिक और शैक्षिक धारा में नई ऊर्जा भर दी। ग़ज़लों की मिठास, कविताओं की गूंज, पूर्वोत्तर के नृत्यों की छटा और अंतर्राष्ट्रीय पकवानों की खुशबू से पूरा परिसर उत्सव में डूब गया।
एकता की दौड़ और राष्ट्रीय भावना का उत्सव
दिन की शुरुआत सरदार वल्लभभाई पटेल की 150वीं जयंती पर ‘रन फॉर यूनिटी’ से हुई। कुलपति प्रो. मजहर आसिफ़ और रजिस्ट्रार प्रो. महताब आलम रिज़वी के नेतृत्व में सैकड़ों प्रतिभागियों ने दौड़ लगाई। इसके बाद प्रो. ज़ुबैर मीनाई ने 500 से अधिक छात्रों और प्रतिनिधियों को ‘एकता की शपथ’ दिलाई, जिससे जामिया की राष्ट्र निर्माण के प्रति प्रतिबद्धता झलकी।
महफिल-ए-किरात और स्मृति व्याख्यान: आत्मा को छू लेने वाला अनुभव
‘महफिल-ए-किरात-ओ-नात ख्वानी’ और प्रो. मोहम्मद मुजीब स्मृति व्याख्यान ने समारोह को आध्यात्मिक ऊँचाई दी।
मौलाना मुफ़द्दल शाकिर और मौलाना शब्बीर हुसैन भोपालवाला ने जामिया की ऐतिहासिक विरासत पर प्रकाश डाला, जबकि प्रो. मोहम्मद असलम परवेज ने अपने व्याख्यान “कुरान और ब्रह्मांड” में कहा “कुरान केवल कथनी नहीं, बल्कि चिंतन और करनी का मार्गदर्शक है।”
एम.ए. अरबी के छात्रों द्वारा पेश की गई नात ने माहौल को भक्ति से सराबोर कर दिया।
ग़ज़लों और कविताओं की शाम
29 अक्टूबर की शाम को पद्मश्री उस्ताद अहमद हुसैन और मोहम्मद हुसैन की ग़ज़लों ने श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
अगले दिन ‘अखिल भारतीय कवि सम्मेलन’ में लक्ष्मी शंकर बाजपेयी, यश मालवीय, अमन अक्षर और कई प्रसिद्ध कवियों ने प्रेम, व्यंग्य और देशभक्ति से भरे गीतों से माहौल को सरस बना दिया।
पूर्वोत्तर भारत की झलक
एम्फीथिएटर में हुए रंग-बिरंगे नृत्य प्रदर्शनों ने पूर्वोत्तर भारत की सांस्कृतिक समृद्धि को जीवंत किया। छात्रों ने पारंपरिक परिधानों में असम की जनजातीय परंपराओं, चाय बागानों और लोक संगीत को मंच पर उतारा। कार्यक्रम में भूपेन हजारिका और जुबीन गर्ग को श्रद्धांजलि दी गई।
अंतर्राष्ट्रीय फ़ूड फ़ेस्टिवल: स्वाद का उत्सव
तालीमी मेले का एक आकर्षण रहा अंतर्राष्ट्रीय खाद्य महोत्सव, जहाँ भारतीय स्नैक्स से लेकर विदेशी व्यंजनों तक सब कुछ उपलब्ध था। छात्रों और आगंतुकों ने स्वाद और संस्कृति का आनंद एक साथ लिया।
कुलपति प्रो. आसिफ़ और प्रो. रिज़वी ने कहा “तालीमी मेला जामिया की बौद्धिक जीवंतता और सांस्कृतिक विविधता का जीवंत प्रतीक है। इसने शिक्षा, कला, भोजन और संवाद के माध्यम से एकता का सुंदर संदेश दिया।”
‘तालीमी मेला 2025’ ने यह सिद्ध कर दिया कि जामिया सिर्फ़ एक विश्वविद्यालय नहीं, बल्कि संस्कृति, एकता और ज्ञान का उत्सव है।
