
आरा/भोजपुर (डॉ दिनेश प्रसाद सिन्हा)19 अक्टूबर। शनिवार को भेलडुमरा स्थित आर्युविज्ञान विकास एवं शोध संस्थान के प्रधान कार्यालय मे हवन-यज्ञ कर संस्थान के अध्यक्ष डा उमेश सिंह के अध्यक्षता मे उपस्थित ग्रामीण चिकित्सको ने भी यज्ञ मे भाग ले धूम धाम से जयन्ती मानाये।
सभी ने एक दूसरे को धनतेरस व अमृत कलशधारी स्वास्थ्य व आयुर्वेद के देवता भगवान धनवंतरी जयंती की अनंत अशैष हार्दिक बधाईया व शुभकामनाएँ दिए।
अपने संबोधन मे चिकित्सको ने कहा कि आरोग्यम् धनसंपदा शरीर की स्वस्थता ही मनुष्य की सबसे बड़ी धनसंपदा होती है।बीमार व्यक्ति के लिए क्या होली! क्या दिवाली!।धनतेरस स्वास्थ्य और आयुर्वेद के देवता भगवान धन्वंतरि की जयंती के रूप में मनाया जाता रहा है,लेकिन व्यापारिक सोच वाले लोगों ने मार्केटिंग करके इस त्यौहार को सोना चांदी बर्तन फर्नीचर इलेक्ट्रॉनिक आइटम्स या अन्य सामानों की खरीद फरोख्त के रूप में प्रसिद्ध कर दिया है।
धनतेरस का सही अर्थ है स्वास्थ्य रूपी धन की रक्षा करना और स्वास्थ्य रूपी धन की रक्षा आयुर्वेदिक तौर तरीके और वैदिक जीवन शैली से जीवन जी कर ही हो सकती है।*जैसे दृष्टिहीन व्यक्ति के लिए यह संसार रूपी सौंदर्य व्यर्थ होता है। ठीक उसी तरह *तन और मन से बीमार व्यक्ति के लिए सुख सुविधाएं ऐश्वर्य संसाधन सब व्यर्थ होते हैं।स्वस्थ व्यक्ति के घर परिवार में ही हर तरह की समृद्धि आती है।प्राकृतिक योगपीठ ट्रस्ट के संस्थापक स्वामी विक्रमादित्य ने यज्ञ सम्पन्न कराए और अपना विचार व्यक्त करते हुए कहा कि धनतेरस का इतिहास अत्यन्त गौरवशाली व समृद्ध सनातन संस्कृतिक विरासत के रूप मे मनाए जाते रहे है।समुद्र मंथन के दौरान जो अमृत कलश लेकर प्रकट हुए वो धनवंतरि देव ही थे,जिस दिन वो समुद्र से निकले उस दिन कार्तिक मास की त्रयोदशी थी। हर साल इस दिन धनतेरस के रूप में मनाया जाता है। धनवंतरि देव को आयुर्वेद का जनक ( स्वास्थ्य का देवता)भी कहा जाता है।एक स्वस्थ व्यक्ति ही दूसरों की मदद या बीमारी में सेवा देखभाल कर पाता है।
