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बागपत:मिट्टी को समझकर ही फसल बोने का आह्वान, वैज्ञानिक परीक्षण से समृद्ध होंगे बागपत के किसान।

खेत की मिट्टी बोलेगी अब विकास की भाषा, 29 रुपए में मुख्य पोषक तत्व व 102 रुपए में सूक्ष्म तत्वों की जांच उपलब्ध।

सही खाद और संतुलित उर्वरक से 20 फीसदी तक बढ़ सकता है उत्पादन, पर्यावरण भी रहेगा सुरक्षित।

मिट्टी जांच बनेगी समृद्धि की राह, किसानों की बढ़ेगी आय, फसल विविधीकरण को बढ़ावा, पर्यावरण रहेगा सुरक्षित।

RKTV NEWS/बागपत(उत्तर प्रदेश)19 अक्टूबर। मिट्टी को समझना आधुनिक खेती की ओर पहला कदम है — इसी संदेश के साथ जनपद बागपत में कृषि विभाग ने किसानों से अपनी भूमि का वैज्ञानिक तरीके से मिट्टी परीक्षण कराने की अपील की है। विभाग का कहना है कि खेती की असली शुरुआत मिट्टी को समझने से होती है। जब किसान अपनी मिट्टी की गुणवत्ता और पोषक तत्वों को पहचान लेता है तभी वह सही फसल, सही खाद और सही मात्रा में उर्वरक चुन सकता है। इससे न केवल उत्पादन बढ़ता है बल्कि मिट्टी की सेहत भी लंबे समय तक बनी रहती है।
कृषि विभाग के विशेषज्ञों ने किसानों को मिट्टी का नमूना लेने की प्रक्रिया भी समझाई। किसान अपने खेत के 8 से 10 स्थानों से लगभग 15 सेंटीमीटर गहराई तक मिट्टी निकालें और इसे साफ कपड़े, बाल्टी या तसले में इकट्ठा करें। इसके बाद सभी मिट्टी को एक साथ हाथ से मिलाकर एक समान ढेर बनाएं। अब ढेर को चार भागों में बांटें, आमने-सामने के दो भाग हटा दें और बाकी दो भागों को फिर मिलाएं। यही प्रक्रिया तब तक दोहराएं जब तक लगभग 400–500 ग्राम मिट्टी बच जाए। इस प्रतिनिधि नमूने को साफ कपड़े की थैली में भरकर उस पर किसान का नाम, पिता का नाम, गांव और खेत का गाटा नंबर लिखें और उसे कृषि विभाग की प्रयोगशाला में परीक्षण हेतु भेजें।
कृषि विभाग के उपनिदेशक विभाति चतुर्वेदी ने बताया कि मुख्य पोषक तत्वों जैसे नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटाश की जांच के लिए मात्र ₹29 शुल्क निर्धारित है, जबकि सूक्ष्म पोषक तत्वों जैसे जिंक, आयरन, बोरॉन आदि की जांच के लिए ₹102 शुल्क देना होगा। ये जांचें किसानों को यह समझने में मदद करेंगी कि उनकी मिट्टी में कौन-कौन से पोषक तत्वों की कमी या अधिकता है। इसके बाद वे अपनी फसलों में संतुलित मात्रा में खाद का उपयोग कर सकेंगे, जिससे लागत घटेगी और उत्पादन में बढ़ोतरी होगी।
जिलाधिकारी अस्मिता लाल ने कहा कि मिट्टी परीक्षण किसान की समृद्धि की कुंजी है। सही उर्वरक प्रबंधन से उत्पादन में 15 से 20 प्रतिशत तक की वृद्धि संभव है। यह किसानों की आय बढ़ाने का सबसे सरल और टिकाऊ उपाय है। उन्होंने कहा कि जो किसान अपनी मिट्टी की जांच नियमित रूप से कराते हैं, वे वैज्ञानिक खेती की दिशा में आगे बढ़ते हैं और आत्मनिर्भर बनने की ओर अग्रसर होते हैं।
मिट्टी परीक्षण से किसानों को फसलवार लाभ भी मिलता है। कौन सी फसल खेत के लिए उपयुक्त है, कितनी मात्रा में कौन सा खाद डालना चाहिए और किन सूक्ष्म तत्वों की जरूरत है। इससे किसान फसल विविधीकरण कर सकते हैं और अपनी भूमि का अधिकतम उपयोग कर सकते हैं। इस प्रक्रिया से न केवल खेती की लागत घटती है बल्कि मिट्टी की उर्वरता लंबे समय तक बनी रहती है।
विशेषज्ञों के अनुसार, मिट्टी परीक्षण से किसान पर्यावरण संरक्षण में भी योगदान दे सकते हैं। संतुलित खाद और उर्वरक के उपयोग से भूमि प्रदूषण, जल प्रदूषण और मिट्टी की क्षारीयता में कमी आती है। यह प्रक्रिया खेती को अधिक टिकाऊ और पर्यावरण के अनुकूल बनाती है।
कृषि विभाग ने किसानों से अपील की है कि वे मिट्टी परीक्षण को खेती की नियमित प्रक्रिया बनाएं ताकि भविष्य में बागपत जिला मिट्टी स्वास्थ्य एवं आधुनिक कृषि के क्षेत्र में एक आदर्श जनपद के रूप में उभर सके। विभाग का मानना है कि मिट्टी परीक्षण सिर्फ एक जांच नहीं बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए उपजाऊ भूमि बचाने का संकल्प है।

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