
आरा/भोजपुर ( डॉ दिनेश प्रसाद सिन्हा)29 सितंबर। शनिवार को आईसीएआर-राष्ट्रीय उच्च सुरक्षा पशु रोग संस्थान, भोपाल एवं नई आशा द्वारा उदवंतनगर प्रखंड़ के चैराई मंगल भवन में एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया, जिसका उदघाटन वैज्ञानिक डाॅ अनुभा पाठक, पद्मश्री डाॅ भीम सिंह भवेश एवं डाॅ अनिल कुमार प्रभारी चिकित्सक उदवंत नगर सामुदायिकत स्वास्थ्य केन्द्र द्वारा संयुकत रूप से किया गया। इसमें पशुजन्य रोगों, अर्थात् पशुओं से मनुष्यों में संचरित होने वाली बीमारियों, पर विस्तृत जानकारी दी गयी। साथ ही प्रश्नोतरी के माध्यम से कार्यशाला में उपस्थित लोगों से संवाद किया गया। कार्यशाला में मुसहर समुदाय के 50 युवाओं एवं शिक्षित सदस्यों को पशुओं से फैलने वाली बीमारियों जैसे तपेदिक (टीबी), जापानी बुखार, प्लेग, लेप्टोस्पायरोसिस, ब्रूसेलोसिस और स्क्रब टाइफस आदि के कारणों, संचरण और निवारण पर व्याख्यान आयोजित किया गया। व्याख्यान से पूर्व एक प्री-टेस्ट और व्याख्यान के पश्चात पोस्ट-टेस्ट के माध्यम से ज्ञान में वृद्धि का मूल्यांकन किया गया। सभी प्रशिक्षणार्थियों को प्रशिक्षण किट प्रदान की गई और कार्यशाला के समापन पर प्रोत्साहन हेतु प्रमाणपत्र वितरित किए गए। कार्यशाला का आयोजन सचिव, वैज्ञानिक डॉ. अनुभा पाठक ने निदेशक, आईसीएआर-एनआईएचएसएडी की अध्यक्षता में टीम के अन्य सदस्यों डॉ. निखिता पेंडम (एमवी एससी स्कॉलर, आईवीआरआई), पूजा जैस्वार (वाईपी-11) और विक्रम की गौर (वाईपी-11) के साथ मिलकर किया। अनुसूचित जाति उप-योजना के अंतर्गत आयोजित इस कार्यशाला को संबोधित करते हुए डाॅ अनुभा पाठक ने कहा कि जानवरों के साथ रहने एवं खेतों में काम करने वाले लोगों को कई ऐसी बीमारियां पकड़ लेती हैं, जिनका उन्हें जानकारी प्राप्त नहीं होती है। ऐसी बीमारियों से जागरूकता के बदौलत बचा जा सकता है। उन्होंने कहा कि गाय या बकरी का प्रसव के दरम्यान मरा बच्चा पैदा कराते वक्त काफी सावधानी बरतनी चाहिए। साथ ही धान के खेतों में काम करने वाले लोगों को भी सावधानी बरतनी चाहिए। डाॅ पाठक ने विभिन्न जानवरों के संसर्ग में होने वाली बीमारियों की रोकथाम एवं बचाव आदि की विस्तृत जानकारी दी। डाॅ अनिल कुमार ने स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता के लिए साफ-सफाई एवं किसी बीमारी के लक्षण पर तत्काल निकट के स्वास्थ्य केन्द्र में जाने की बात कहीं। संचालन नई आशा के जिला समन्वयक कुंदन कुमार एवं धन्यवाद ज्ञापन जय प्रकाश दास ने किया।
