
आरा/भोजपुर (डॉ दिनेश प्रसाद सिन्हा) 16 सितंबर। सोमवार को 76वें हिन्दी-दिवस के अवसर पर अखिल भारतीय जनसंघ की जिला इकाई की ओर से फ्रेंड्स कॉलोनी कार्यालय में आयोजित कार्यक्रम में बतौर मुख्य-वक्ता बोलते हुए राष्ट्रीय अध्यक्ष आचार्य डॉ भारतभूषण पाण्डेय ने कहा कि सभी भारतीय भाषाओं की प्रतिनिधि और भारतीय जनमानस की प्रतिध्वनि है हिन्दी। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता संग्राम की न केवल प्रेरिका और वाहिका हिन्दी थी बल्कि सेनानियों का कंठहार और मुक्तिगान भी। जनसंघ अध्यक्ष ने कहा कि संविधान सभा में हिन्दी को राष्ट्रभाषा के साथ-साथ राजभाषा बनाने का विधान किया गया था किंतु आज हिन्दी भी कुत्सित राजनीति का शिकार हो गई है और इसे अपना उचित स्थान प्राप्त करने के लिए स्वतंत्र देश में संघर्ष करना पड़ रहा है। आचार्य पाण्डेय ने विद्यापति, नाभादास, सूरदास, कबीरदास, रैदास, गोस्वामी तुलसीदास, मीराबाई आदि से लेकर जायसी,रहीम, रसखान, बिहारी और आधुनिक युग में भारतेन्दु, द्विवेदी,पंत, प्रसाद, निराला प्रभृति तमाम हिन्दी सेवियों द्वारा देश एवं विश्व मानवता की की गई अमूल्य सेवा का कृतज्ञतापूर्वक स्मरण किया और हिन्दी के अधिकाधिक प्रयोग पर बल दिया। आचार्य पाण्डेय ने कहा कि जनसंघ ने शुरू से हिन्दी के लिए आग्रह रखा तथा इसे राष्ट्रभाषा बनाने में संविधान सभा के अंदर आचार्य डॉ रघुवीर तथा बाहर प्रो बलराज मधोक ने महती भूमिका निभाई थी। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए अधिवक्ता सत्येन्द्र नारायण सिंह ने कहा कि प्रशासन, न्यायपालिका, बैंक, रेलवे आदि में हिन्दी का प्रयोग बढ़ने से भाषाई स्वतंत्रता की दिशा में महत्त्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की जा सकती है। उन्होंने कहा कि उच्च न्यायालयों में कई न्यायाधीशों ने हिंदी में निर्णय देकर तथा कई अधिवक्ताओं ने हिंदी में बहस कर कीर्तिमान स्थापित किया है।कार्यक्रम का संचालन मधेश्वर नाथ पाण्डेय तथा धन्यवाद-ज्ञापन निलेश कुमार मिश्र ने किया। इस अवसर पर अखिलेश्वर नाथ तिवारी, सियाराम दूबे, नर्मदेश्वर उपाध्याय, विश्वनाथ दूबे, शिव शंभु तिवारी,सुरेन्द्र कुमार मिश्र, मृत्युंजय,जय प्रकाश तिवारी, ध्रुव कुमार सिंह, कृष्णाकांत दूबे,वीरेंद्र प्रसाद श्रीवास्तव ‘रवि’, शिवजी सिंह, अमरनाथ तिवारी, ब्रजकिशोर पाण्डेय समेत कई प्रमुख पदाधिकारी उपस्थित थे।
