RKTV NEWS/25 मई।सीएसआईआर-एनआईएससीपीआर की निदेशक प्रो. रंजना अग्रवाल ने कहा कि कार्बन डाइऑक्साइड की सांद्रता में वृद्धि ने हमारे हार्मोन, चयापचय और समग्र भावनात्मक संतुलन को प्रभावित किया है और इसलिए तनाव, अवसाद, चिंता जैसी मानसिक स्वास्थ्य स्थितियां आज के समय में बहुत आम हैं। उन्होंने कहा कि खुद, परिवार और दोस्तों के मानसिक स्वास्थ्य पर ध्यान देना समय की जरूरत है।
प्रोफेसर अग्रवाल सीएसआईआर-नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस कम्युनिकेशन एंड पॉलिसी रिसर्च (एनआईएससीपीआर) द्वारा भारतीय महिला वैज्ञानिक संघ (आईडब्ल्यूएसए) के सहयोग से आयोजित मानसिक स्वास्थ्य और भलाई पर केंद्रित आधे दिवसीय शिविर के उद्घाटन सत्र के दौरान अपने विचार साझा कर रही थीं।
प्रो. अग्रवाल ने कहा, ‘हम आमतौर पर अपने शारीरिक स्वास्थ्य पर चर्चा करते हैं, लेकिन सामाजिक कलंक हमें मानसिक स्वास्थ्य के बारे में बात करने से रोकता है. लेकिन मानसिक स्वास्थ्य को नज़रअंदाज़ करना हमारे शारीरिक स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है।” मानव विकास, भावनाओं और पर्यावरण परिवर्तनों के साथ इसके संबंध के बारे में बात करते हुए, उन्होंने कहा कि लगभग पिछली दो शताब्दियों के दौरान, हमने धरती माता पर कार्बन डाइऑक्साइड की मात्रा में धीरे-धीरे वृद्धि देखी है।सीएसआईआर-राष्ट्रीय भौतिक प्रयोगशाला की मुख्य वैज्ञानिक और आईडब्ल्यूएसए की अध्यक्ष डॉ. रीना शर्मा ने भी इस अवसर की शोभा बढ़ाई। अपने संबोधन में, उन्होंने IWSA के उद्देश्यों और कैसे यह संगठन विज्ञान को समाज तक ले जाता है, के बारे में चर्चा की। उन्होंने मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता फैलाने की आवश्यकता पर बल दिया।
केंद्रीय आयुर्वेद अनुसंधान संस्थान के अनुसंधान अधिकारी डॉ. अमित मदान ने “संतुलित जीवन शैली और मानसिक स्वास्थ्य” पर एक विशेष व्याख्यान दिया। उन्होंने शारीरिक और मानसिक कल्याण के बीच प्राकृतिक संबंध की व्याख्या की।
डॉ. कनिका मलिक, वरिष्ठ प्रधान वैज्ञानिक,सीएसआईआर-एनआईएससीपीआर और मानसिक स्वास्थ्य शिविर की समन्वयक ने धन्यवाद प्रस्ताव रखा। मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम के बाद एक स्वास्थ्य जांच सत्र भी आयोजित किया गया जहां सीएसआईआर-एनआईएससीपीआर के स्टाफ सदस्यों ने डॉक्टरों से मुलाकात की, स्वास्थ्य संबंधी मुद्दों को साझा किया और परामर्श लिया।
