
लुप्त होते परंपरागत शहनाई वादन पर जताई गई चिंता।

देश में हावी हो रही पाश्चात्य सभ्यता को वक्ताओं ने देशहित में बताया घातक।
RKTV NEWS/आरा(भोजपुर) 21 अगस्त।आज भारत रत्न प्रसिद्ध शहनाई वादक उस्ताद बिस्मिल्लाह खान की पुण्यतिथि पटेल बस पड़ाव स्थित भिखारी ठाकुर सांस्कृतिक मंच पर आयोजित हुई। कार्यक्रम की अध्यक्षता पूनम सिंह राष्ट्रीय अध्यक्ष स्वर्ण सेना ने की। इस अवसर पर सामाजिक कार्यकर्ता व रंगकर्मी, पत्रकार उपस्थित रहे। कार्यक्रम का शुभारंभ सर्वप्रथम उस्ताद बिस्मिल्लाह खान की मंच परिसर में स्थापित प्रतिमा पर माल्यार्पण और पुष्पांजलि से हुआ। तत्पश्चात में मृदंग वादक और भोजपुरी के शेक्सपियर भिखारी ठाकुर की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया गया। मंच संचालन करते हुए पत्रकार नरेंद्र सिंह ने भिखारी ठाकुर सांस्कृतिक मंच की गतिविधियों पर प्रकाश डालते हुए बताया कि यह मंच भोजपुरी भाषा,भोजपुरी कलाकारों के प्रति समर्पित है। यही कारण है कि संस्थान द्वारा भिखारी ठाकुर, मृदंगवादक बाबू ललन जी और शहनाई वादक उस्ताद बिस्मिल्लाह खान की प्रतिमा इस प्रांगण में अवस्थित है। इन लोगों को याद करते हुए संस्थान सदैव सामाजिक जागृति का कार्य वर्षों से करता चला आ रहा है। श्री सिंह ने संस्थान की स्थापना से लेकर अब तक के कार्यों का एक ब्योरा भी प्रस्तुत किया।
विषय परिवर्तन करते हुए पत्रकार डा दिनेश प्रसाद सिन्हा ने बताया कि भारतरत्न उस्ताद बिस्मिल्लाह खान पुराने शाहाबाद डुमरांव के मिट्टी के लाल है जिनकी शहनाई की मधुर आवाज़ देश-विदेश तक गूंजती रही है। इस महान विभूति ने शहनाई के क्षेत्र में जो कृतिमान स्थापित किया उसके लिए इन्हें भारत रत्न से नवाजा गया। स्वतंत्रता आंदोलन का जश्न जब देश में मनाया गया उसमें लाल किला की प्राचीर से इन्हें शहनाई वादन का ऐतिहासिक अवसर मिला।जिस प्रकार देश के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू द्वारा प्रथम ध्वजारोहण का स्वर्णिम इतिहास बना वैसे ही शाहाबाद के महान विभूति ने भी परंपरागत शहनाई वादन का इतिहास बनाया और सदा के लिए अमर हो गये।
भारत रत्न सम्मानित उस्ताद बिस्मिल्लाह खां की शहनाई की मधुर धुन पूरे राष्ट्रीय अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लोगों ने सुना और सराहा। आज शहनाई वादन विलुप्त की स्थिति में है,सामाजिक सद्भाव और प्राचीन सभ्यता संस्कृति को दरकिनार कर पश्चिमी सभ्यता हावी हो रही है जो देश के लिए घातक है।
वही समाजसेवी सुशील तिवारी ने श्रद्धा सुमन अर्पित करते हुए बताया कि शहनाई वादन आज विलुप्त के कगार पर है क्योंकि हमारा समाज पश्चिमी सभ्यता की ओर आकर्षित हो चुका है। वहीं दूसरी ओर कार्यक्रम में शिरकत करते हुए डॉ किरण कुमारी, अधिवक्ता देवी दयाल राम, राम सकल सिंह भोजपुरिया आदि ने अपने-अपने विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम में धन्यवाद ज्ञापन सेवानिवृत कैप्टन अर्जुन प्रसाद सिंह ने किया।
भिखारी ठाकुर सामाजिक शोध संस्थान के बैनर आयोजित कार्यक्रम में कृष्णकांत सिंह , पप्पू सिंह, गांधी जी, रविंद्र सिंह ,पप्पू सिंहा आदि ने अपनी सहभागिता निभाई
