
भोपाल/मध्यप्रदेश (मनोज कुमार प्रसाद)06अगस्त। मध्यप्रदेश के राजधानी भोपाल की जानी मानी ‘वास्तु सलाहकार एवं हीलर’ रागिनी उपलपवार की पुस्तक रिश्तों को सॅंवारने के लिए ‘‘वास्तु एवं हीलिंग’’ का लोकार्पण एवं पुस्तक चर्चा का कार्यक्रम ‘‘दुष्यंत कुमार स्मारक पाण्डुलिपि संग्रहालय’’ के सभागार में संपन्न हुआ। इस समारोह की अध्यक्षता पूर्व निदेशक म.प्र. साहित्य अकादमी, डॉ देवेंद्र दीपक ने की।
मुख्य अतिथि डाॅ. विकास दवे निदेशक म.प्र. साहित्य अकादमी। विशेष अतिथि महेश सक्सेना एवं सारस्वत अतिथि गोकुल सोनी मंचासीन रहे।
अपने उद्बोधन में डॉ देवेंद्र दीपक ने कहा कि वास्तुशास्त्र के बीज हमारे पुराणों में निहित हैं तथा सुख शांति इसी में निहित है कि आपके किसी से भी संबंध मधुर हों। उन्होंने यह भी कहा कि पुस्तक में सफाई कर्मचारी तक से अच्छे सम्बन्धों की बात कही गई है यह बात मुझे विशेष रूप से पसंद आई। डॉ विकास दुबे ने पुस्तक को श्रेष्ठ कृति बताते हुए कहा कि जिसका मन शांत होता है, विचार निर्मल होते हैं और व्यवहार सभी से प्रेमपूर्ण होता है उसके घर का वास्तु अपने आप अच्छा हो जाता है। श्री महेश सक्सेना ने कहा कि रागिनी जी ने यह पुस्तक सर्वथा नए विषय पर और बहुत मेहनत से लिखी है। इसका लाभ सभी को उठाना चाहिए। वरिष्ठ साहित्यकार गोकुल सोनी ने पुस्तक पर प्रकाश डालते हुए कहा कि प्रत्येक व्यक्ति का एक ओरा या आभामंडल होता है। जब कोई व्यक्ति जिसका ओरा हमारे ओरा से मेल खाता है तो वह व्यक्ति हमें अपना सा लगने लगता है, प्रिय लगने लगता है परंतु जिसका ओरा हमारे ओरा से विपरीत होता है है वह हमें अप्रिय या शत्रुवत लगता है। वास्तु का पालन करते हुए जब घर में चीजे सही दिशा में रखी जाती हैं तो घर में सुख शांति होती है। यह पुस्तक पाठकों के लिए बहुत उपयोगी है। रागिनी उपलप वार ने भी विस्तार से अपनी रचना प्रक्रिया पर प्रकाश डाला और बताया कि मैं एक सर्टिफाइड हेलर हूं तथा यह पुस्तक मैंने बहुत अनुभव लेने के पश्चात लिखी है। इस अवसर पर रागिनी जी के पति एवं सभी परिवार जन उपस्थित थे। इस पुस्तक को भव्या पब्लिकेशन भोपाल द्वारा प्रकाशित किया गया है। पब्लिकेशन के निदेशक हेमराज कुर्मी ने कहा कि आज समाज में जिस प्रकार से रिश्ते तार-तार हो रहे हैं। युवा पीढ़ी रिश्तों को सही ढंग से संभाल नहीं पा रही है जिससे उनमें निराशा, डिप्रेशन का ग्राफ लगातार बढ़ता चला जा रहा है। ऐसे समय में रागिनी जी ने समाज के बिखरे हुए रिश्तों को बेहतर बनाने के लिए बहुत ही खूबसूरत पुस्तक समाज को अर्पित की है। यह पुस्तक समाज के लिए बहुत ही लाभदायक सिद्ध होगी।
ज्ञात हो कि रागिनी उपलपवार की पाॅंच पुस्तकें पहले से प्रकाशित हैं उनकी मोटिवेशनल पुस्तक ‘‘डर को पहचानो डर को जीतो’’ पाठकों को खूब भा रही है। कार्यक्रम का संचालन युवा कवि दिनेश गुप्ता मकरंद ने किया एवं आभार सुनीता प्रकाश ने माना। कार्यक्रम में शहर के कई साहित्यकार एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
