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भोजपुर: बड़हरा,शाहपुर प्रत्याशी के स्वजातीय वोटो में बिखराव,आरा में दिख रहा हिंदुत्व का रंग।

आरा/भोजपुर (नरेंद्र सिंह)04 नवंबर। भोजपुर जनपद के बड़हरा,शाहपुर विधानसभा क्षेत्र में एक ही जाती के पक्ष और विपक्ष ने अपना अपना प्रत्याशी उतारकर शह और मात का खेल खेला है तो आरा में हिंदुत्व वाला कार्ड लेकिन खासकर आरा में जनसुराज को दरकिनार नहीं किया जा सकता।पर चौक चौराहों पर मतदाताओं के बीच चल रही चर्चाएं और राजनीति के गलियारों से छन छन कर आ रही बातें संकेत दे रही है की इस बार कुछ अप्रत्याशित न हो जाए।क्योंकि बड़हरा और शाहपुर में स्वजातीय प्रत्याशी होने के बाद भी स्वजातीय मतदाताओं की गोलबंदी पक्ष और विपक्ष के प्रत्याशियों के पक्ष में नहीं है।इस बार निर्णायक की भूमिका में रहेंगे अन्य जातियों के मतदाता।क्योंकि राजपूत व ब्राह्मण जाति के मतदाताओं का बिखराव बड़हरा और शाहपुर में देखने को मिल रहा है तो आरा में खासकर बनिया वर्ग के मतदाताओं में।

बड़हरा विधानसभा प्रत्याशी: राघवेंद्र प्रताप सिंह (भाजपा) और रामबाबू सिंह (राजद)

बड़हरा में आरा संसदीय लोकसभा के तथा बड़हरा विधानसभा के पूर्व के चुनाव परिणाम का आंकलन करने पर यह तथ्य सामने उभर कर आया है।लोकसभा के चुनाव परिणाम में माले के सुदामा प्रसाद को 72 हजार 651 और भाजपा के आर के सिंह को 70 हजार 869 मतों की प्राप्ति हुई यानी की लगभग 2 हजार मत से श्री सिंह को हार का मुंह देखना पड़ा।जबकि राजपूत जाति से आने वाले राघवेंद्र प्रताप सिंह का कभी राजद से तो अब भाजपा से इस विधानसभा में कब्जा बरकार है।2020 के विधानसभा चुनाव में भाजपा के राघवेंद्र प्रताप सिंह को 76182 और राजद प्रत्याशी सरोज यादव को 71209 मतों की प्राप्ति हुई और राजद को धूल चाटना पड़ा। क्षेत्र के लोग बताते है की तब राजपूत मतदाताओं की गोलबंदी हुई तथा राघवेंद्र प्रताप सिंह ने अपने प्रभाव वाले कुछ यादव मतदाताओं को भी अपने पक्ष में किया।लेकिन एक पक्ष रहा है पूर्व विधायक आशा देवी का जो पार्टी का टिकट नहीं मिल पाने के कारण निर्दलीय चुनाव के मैदान में कूदी और 7203 मत प्राप्त किए।
इस बार बागी के रूप में सूर्यभान सिंह चुनाव के मैदान में कूद पड़े।आशा थी कि भाजपा के प्रत्याशी होंगे।राजपूत जाति के सूर्यभान का राजपूत और ब्राह्मण समाज में अच्छी खासी पैठ है जो भाजपा प्रत्याशी के लिए सिरदर्द हो सकते हैं। इसी तरह का सिरदर्द राजपूत जाति से आने वाले पूर्व एम एल सी राजपुर(कोईलवर) वाले रणविजय सिंह होंगे।राजद (महागठबंधन) ने भी अपनी रणनीति के तहत इस बार राजपूत जाति के रामबाबू सिंह को चुनाव के मैदान में उतारा है।यानी राजपूत वोटों में सेंधमारी हो सके क्योंकि एम वाई समीकरण तो राजद के लिए गोलबंद है ही।इसी तरह राजद प्रत्याशी के लिए निर्दलीय चुनाव के मैदान में उतरे राजद के पूर्व विधायक भी सरदर्द हो सकते हैं।पर इन बातों के बीच खासकर राजपूत वोट में बिखराव की स्थिति से इनकार नहीं किया जा सकता।

शाहपुर विधानसभा प्रत्याशी: राहुल तिवारी(राजद) और राजीव रंजन ओझा(भाजपा)

इसी तरह बगल के शाहपुर विधानसभा क्षेत्र में स्वजातीय प्रत्याशी आमने सामने हैं। कभी अपनी चाची मुन्नी देवी ओझा (भाजपा प्रत्याशी)का विरोध कर स्व बिशेश्वर ओझा के पुत्र ने अपनी मां शोभा देवी को चुनाव के मैदान में उतारकर लगभग 24 हजार मत प्राप्त किए और भाजपा प्रत्याशी को हार का सामना करना पड़ा।राजद प्रत्याशी राहुल तिवारी को 64 हजार 393 मतों की प्राप्ति हुई।लोकसभा चुनाव में सुदामा प्रसाद ने यहां भी आर के सिंह को पटकनिया दी थी।आर के सिंह को 65607 और सुदामा प्रसाद को 67895 मतों की प्राप्ति हुई।लेकिन इस बार दोनों पक्ष ब्राह्मण जाति के है और चाची और भतीजा भी एक मंच पर हो गए है।पर ब्राह्मण वोट का बिखराव मतलब दो भागों में विभक्त होने से इनकार नहीं किया जा सकता।ऐसे में दोनों पक्ष और विपक्ष के प्रत्याशी सशंकित है।खासकर राहुल तिवारी के लिए वर्तमान चुनाव सरदर्द साबित हो सकता है। जबकि इस क्षेत्र में स्व बिशेश्वर ओझा और शिवाजीत मिश्र का झगड़ा सर्वविदित है।

आरा विधानसभा प्रत्याशी: क्यामुद्दीन अंसारी (माले) और संजय सिंह टाइगर (भाजपा)

इधर आरा विधानसभा क्षेत्र को देखा जाए तो इस क्षेत्र के मतदाताओं के बीच हिंदुत्व और जय श्री राम का मुद्दा मतदाताओं को गोलबंद करने में इस्तेमाल हो रहा है। संसदीय चुनाव में आर के सिंह ने 82324 और सुदामा प्रसाद ने 74053 मत प्राप्त किए। और श्री सिंह ने श्री प्रसाद को लगभग 20 हजार मतों से पटकनिया दिया।वर्ष 2020 के विधानसभा चुनाव में तब महागठबंधन प्रत्याशी के रूप में मो क्यामुद्दीन अंसारी की भाजपा प्रत्याशी अमरेंद्र प्रताप सिंह से टक्कर हुयी और लगभग 3000 मतों से क्यामुद्दीन को हार का सामना करना पड़ा।बदलते परिवेश में अमरेंद्र प्रताप की जगह साफ सुथरी छवि वाले पूर्व विधायक संजय सिंह टाइगर को भाजपा ने प्रत्याशी बनाया है जबकि महागठबंधन ने पूर्व के माले प्रत्याशी क्यामुद्दीन अंसारी को ही चुनाव में उतारा है। पूर्व की तरह पुनः जय श्री राम का नारा क्षेत्र में गूंज रहा है। अगर यादव वोट में बंटवारा नहीं हुआ तो कुछ भी हो सकता है।

आरा विधानसभा जनसुराज प्रत्याशी डॉ विजय कुमार गुप्ता

पर जनसुराज प्रत्याशी डॉ विजय गुप्ता जो बनिया समाज से आते है वो भाजपा प्रत्याशी के लिए सिरदर्द बन सकते हैं।
बहरहाल पूर्व विधानसभा तथा लोकसभा के चुनाव परिणामों, क्षेत्र में भ्रमण और चौक चौराहों पर चल रही चर्चाओं का आंकलन करने पर बड़हरा में राजपूत वोटों का बिखराव,शाहपुर में ब्राह्मण वोट में फाड़ होना और आरा में हिंदुत्व व जय श्री राम के नाम पर वोट की गोलबंदी नजर आयेगी।अगर कोई नया समीकरण बना या फिर मोदी नीतीश बनाम तेजस्वी के नामों पर वोटों की गोलबंदी हुई तब कहानी कुछ और बन सकती है।

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