
आरा/भोजपुर (डॉ दिनेश प्रसाद सिन्हा)02 अगस्त।मानसरोवर कालोनी स्थित डा प्रतीक के आवास पर मो.रफी की पुण्यतिथि 31 जुलाई को देर रात तक उनके गाये गये गीतको सुनाकर श्रद्धांजलि दी गई।
कार्यक्रम की अध्यक्षता पूर्व डिप्टी सुपरिंटेंडेंट डॉ सतीश कुमार सिन्हा ने की। मुख्य अतिथि के रूप में बलदेव चौधरी एडीएम भोजपुर,उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन डेंटल सर्जन डॉक्टर प्रतीक द्वारा किया गया। इन्होंने बताया की स्वर सम्राट,सुरों के बादशाह मु रफी एक ही आये और उनका कोई जोड़ा नहीं बना बल्कि बेजोड़ रहे।ऐसी शख्सियत पृथ्वी पर कभी कभी आते हैं और अपनी पहचान जन जन के दिलों में बैठा गये। आज भी कोई उनका अनुसरण ही करता है मु रफी नहीं बन पाया।विशिष्ट अतिथि थे पूर्व अपर मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी डॉ के एन सिन्हा, आनंद मोहन सिन्हा,डा दिनेश प्रसाद सिन्हा विशेष रुप से उपस्थित रहे। कार्यक्रम का शुभारंभ गायकी के बादशाह,हरदिल अजीज मुहम्मद रफ़ी के तस्वीर पर माल्यार्पण व पुष्पांजलि से हुआ। इसके बाद रफी साहब के गीतों को गाकर माहौल को सुरमय बनाया गया।मो.रफी के अनेकों प्रसिद्ध गानों को ,शहर के कई गायको ने गाकर श्रद्धांजलि अर्पित की। डॉ सतीश कुमार सिन्हा ने ,” जिंदगी भर नहीं भूलेगी, ये बरसात की रात”, डॉ के एन सिन्हा ने ,” ये जुल्फ अगर खुलकर बिखर जाए तो अच्छा” तथा “तुमसे इजहार हाल कर बैठे”,डॉ मदन मोहन द्विवेदी ने ,”छू लेने दो ना ,नाजुक होठों को”,डॉ राजीव रंजन ने “मेरे यार को मना लो”दीपक जैन ने” तू इस तरहा से मेरी जिंदगी में शामिल हो”रतन जी ने”अब क्या मिसाल दूं”इसके अलावा अशोक जी, आमिर खान, रतन जी सलाउद्दीन जी आदि कलाकारों ने भी गीत गाकर अपनी श्रद्धांजलि अर्पित की। रफी का एक गाना काफी चर्चित रहा, “जाने बहार हुस्न तेरा, बेमिसाल है, जिसे डॉ के एन सिन्हा , रतन जी तथा डॉ सतीश कुमार सिंह ने बारी बारी से गाया। इस कार्यक्रम के संयोजक थे प्रसिद्ध दंत रोग चिकित्सक डॉ प्रतीक तथा धन्यवाद ज्ञापन डॉ के एन सिन्हा और दीपक जैन ने किया।
मुख्य अतिथि एडीएम ने कहा कि अपनी आवाज से मो. रफी अमर है। तभी तो आज भी इनके तस्वीर के सामने इतने लोग इनको याद कर रहे हैं।डॉ के एन सिन्हा ने कहा कि सर्वश्रेष्ठ गायक रफी की आवाज एक दैविक आवाज है, जो कभी मिट नहीं सकती और युगों-युगों तक लोगों को आनंदित व उत्साहित करती रहेगी।
