
RKTV NEWS/आरा(भोजपुर) 9 जुलाई। मंगलवार शाम डा आनंद मोहन सिन्हा के आरा निवास पर राजा राम की न्याय प्रियता पर एक विचार गोष्ठी का आयोजन हुआ। संगोष्ठी के मुख्य वक्ता रांची विश्वविद्यालय के पूर्व हिंदी विभागाध्यक्ष डा जंग बहादुर पाण्डेय ने कहा कि यद्यपि कि राम का जन्म त्रेता में राज परिवार रघुकुल में हुआ था, लेकिन उनकी न्याय प्रणाली लोकतांत्रिक थी।जब वे अयोध्या के राजा बने तो उनके राज में दैहिक दैविक भौतिक तापा का निर्मूलन हो गया था और समाज में समरसता परिव्याप्त थी। तुलसी ने रामचरितमानस में रामराज्य का वर्णन करते हुए लिखा है कि
दैहिक दैविक भौतिक तापा।रामराज्य नहिं काहुहि व्यापा।सब नर करहिं परस्पर प्रीती।चलहिं स्वधर्म निरत श्रुति नीती। उन्होंने कहा कि सभी अपने धर्म का पालन वैदिक रीति से करते थे।राम के निर्णय में पारदर्शिता थी।कानून की दृष्टि में सभी समान थे।उनका आदर्श वाक्य था कि जिस राजा के राज्य में प्रजा दुखी रहती है,वह राजा अवश्य ही नरक का अधिकारी होता है:-
जासु राज प्रिय प्रजा दुखारी। सो नृप नरक अवश्य अधिकारी।राजा के द्वारा गलत करने पर प्रजा को टोकने का अधिकार राम ने जनता जनार्दन को दिया था।
जौं अनीति कछु भाखौं भाई।तौ मोहिं बरजेउ भय बिसराई।
अतः स्वतंत्र भारत में राष्ट्र पिता महात्मा गांधी का सपना राम राज्य की स्थापना था। वर्तमान मोदी सरकार भी उसी राम राज्य के सपने को साकार करना चाहती है। क्योंकि राम की न्याय व्यवस्था में भेद भाव नहीं अपितु पारदर्शिता शीघ्रता और निष्पक्षता थी।अपने वक्तव्य में उन्होंने कहा कि न्याय ही निर्णय की आत्मा है,जिस प्रकार आत्मा के बिना शरीर शव हो जाता है,उसी प्रकार न्याय के अभाव में कोई भी निर्णय निष्प्राण हो जाता है। उन्होंने कहा कि राम वन गये तो बन गये । प्रो. डॉ पाण्डेय ने कहा कि राजा राम की न्याय व्यवस्था निष्पक्ष, पारदर्शी और तटस्थ थी। गलती करने पर उन्होंने अपने प्रिय अनुज लक्ष्मण को राज्य से बहिष्कृत कर दिया था और लोक की आराधना के लिए जानकी तक का परित्याग कर दिया था। महर्षि वाल्मीकि ने अपनी रामायण में और भवभूति ने अपने उत्तर रामचरितं में इसका उल्लेख किया है। भवभूति के राम तो यहां तक कह देते हैं कि:-
स्नेहं दयां च सौख्यं च,यदि वा जानकीमपि।
आराधनाय लोकस्य ,मुच्चतोनास्ति में व्यथा। संगोष्ठी की अध्यक्षता करते हुए राष्ट्रीय सागर अखबार के ब्यूरो प्रमुख डा दिनेश प्रसाद सिन्हा ने कहा कि आज भारत वर्ष को राजा राम की न्याय प्रणाली अपनाने की जरूरत है,तभी भारत की न्यायिक व्यवस्था चुस्त और दुरुस्त होगी। उन्होंने हनुमान चालीसा की रचना प्रक्रिया पर भी गहन प्रकाश डाला।डा राम जी, डा गौरीशंकर प्रधान,डा पूनम कुमारी,डा मीरा देवी,डा कुमार शिवशंकर विजय नारायण, अधिवक्ता देवेन्द्र प्रसाद , अभिजीत तिवारी,संजय कुमार,हरि शंकर पाण्डेय,आशीष कुमार ,डा प्रतीक,डा ममता मिश्रा आदि ने भी अपने सारगर्भित उद्बोधन से संगोष्ठी में चार चांद लगाया।एस बी कालेज आरा की प्राचार्या डा पूनम कुमारी ने अपने गुरुदेव डा जंग बहादुर पाण्डेय को अंगवस्त्रं प्रदान कर सम्मानित किया,जबकि डा ममता मिश्रा ने अपनी सद्य: प्रकाशित कहानी पुस्तक छठ्ठी मैया की एक प्रति डा जे बी पाण्डेय को और एक प्रति डा आनंद मोहन सिन्हा को भेंट कीं। आगत अतिथियों का भव्य स्वागत डा आनंद मोहन सिन्हा ने, सरस्वती वंदना डा ममता मिश्रा ने,कुशल संचालन डा सत्य नारायण राय ने और धन्यवाद ज्ञापन शुभम् कुमार ने किया। शांति पाठ और राष्ट्र गान से संगोष्ठी की पूर्णाहुति हुई।
