RK TV News
खबरें
Breaking Newsधार्मिक

कर्म करने से दुर्भाग्य भी भाग्य में बदल जाता है : जीयर स्वामी

RKTV NEWS/पीरो ( भोजपुर)09 जुलाई।परमानपुर चातुर्मास्य व्रत स्थल पर भारत के महान मनीषी संत श्री लक्ष्मी प्रपन्‍न जीयर स्वामी जी महाराज ने भाग्य और अभाग्य का मतलब समझाए। स्वामी जी ने कहा जिस समय प्राणी का जन्म होता है। उसी समय उसके जीवन में घटने वाली सभी घटनाओं को लिख दिया जाता है। उस व्यक्ति के जीवन में कब दुख होगा। कब सुख होगा। प्रतिष्ठा, मान, सम्मान, समाज से तिरस्कार, दुख, तकलीफ, बीमारी इत्यादि की पूरी कहानी लिख दी जाती है।
लेकिन कर्म एक ऐसा माध्यम है। जिससे दुर्भाग्य को भी भाग्य में बदला जा सकता है। दुख को सुख में बदला जा सकता है। बड़े दुर्घटना को छोटे घटना में परिवर्तित किया जा सकता है। लेकिन यह सब कुछ तब संभव होता है। जब मानव जीवन में हम अपने शरीर से कर्म के द्वारा बेहतर कार्य करते हैं।
भाग्य भी उसी का साथ देता है जो कर्म करता है। इसीलिए जीवन में कर्म को प्रधान बताया गया है। रवि शंकर तिवारी ने बताया कि स्वामी जी ने कहा जिसके भाग्य में सब कुछ अच्छा लिखा गया है। लेकिन यदि वह अपने जीवन में कर्म को त्याग कर देता है। अपने शरीर के द्वारा भगवत स्वरूप का चिंतन, ध्यान, पूजा, पाठ, तप, दान, शिक्षा को प्राप्त नहीं करता है तो उसका अच्छा भाग्य भी दुर्भाग्य में बदल जाता है।
जिसका भाग्य कमजोर हैं वह भी अच्छा कर्म करता है तो उसका भाग्य मजबूत हो जाता है। स्वामी जी ने एक उदाहरण देते हुए कहा की दो चोर एक संत के यहां कथा सुनने के लिए गए थे। जहां पर महात्मा जी के द्वारा कथा सुनाया जा रहा था। महात्मा जी ने कहा चोरी करना पाप है। दोनों चोरों ने इस बात को सुनकर विचार किया। एक चोर ने कहा कि अब हम चोरी नहीं करेंगे। कथा चल हीं रहा था तब तक अंत में महात्मा जी ने कहा कि अपने काम का त्याग नहीं करना चाहिए। यानी जो आप काम कर रहे हैं उसको निरंतर करते रहना चाहिए।
आपस में दोनों चोर बात करने लगे। एक चोर ने कहा कि महात्मा जी ने लास्ट में कह दिया है कि अपने काम को नहीं छोड़ना चाहिए। इसीलिए हम अपना चोरी का काम नहीं छोड़ेंगे। दूसरे ने कहा हम चोरी नहीं करेंगे। दोनों वहां से निकल गए। एक चोर ने एक जगह पर जाकर के डाका डाला। जिसमें उसे ₹10000 प्राप्त हुआ। दूसरा जो चोर था जिसने चोरी का त्याग कर दिया था। वह एक नदी को पार कर रहा था। जहां पर नदी में पैर में उसको सीसा चुभ गया। जिससे उसको असहय पीड़ा हुई।
दोनों चोर फिर से आपस में एक दूसरे के साथ मिले तथा दोनों ने अपनी अपनी बातें बताई। एक ने बताया कि हमने चोरी करके 10000 प्राप्त कर लिया है। उसने कहा कि तुम देखो चोरी छोड़ दिए हो तो तुम्हें कष्ट सहना पड़ गया।
इसीलिए अपना काम नहीं छोड़ना चाहिए। फिर एक बार दोनों उस महात्मा के पास पहुंचे। दोनों ने अपनी अपनी कहानी बताई। स्वामी जी ने कहा की महात्मा जी ने बताया देखो तुमने 10000रू चोरी करके प्राप्त कर लिया है। लेकिन तुम्हारे भाग्य में करोड़ों रुपए मिलने वाला था। लेकिन तुमने गलत काम किया। जिस कारण तुम्हारा भाग्य और फल सूक्ष्म रूप में प्राप्त हुआ। क्योंकि तुमने गलत तरीके से काम किया है। दूसरा जो चोर जिसने चोरी करना छोड़ दिया। उसके भाग्य में एक बड़ी दुर्घटना लिखी हुई थी। लेकिन उसने चोरी करना छोड़ दिया। जिसके कारण उसके भाग्य में लिखी हुई बड़ी दुर्घटना भी एक छोटी घटना के रूप में परिवर्तित हो गई। जिसके फल स्‍वरूप उसके पैर में एक छोटा सा चुभन महसूस हुआ। यही भाग्य और दुर्भाग्य का महत्व है।
इसीलिए जीवन में कभी भी अच्छे कर्म का त्याग नहीं करना चाहिए। क्योंकि अच्छे कर्म से व्यक्ति का दुभाग्य भी अच्छे भाग्य में परिवर्तित हो जाता है।
आगे स्वामी जी ने अमृत और श्रीमद् भागवत ग्रंथ सहित अनेक वेद पुराण की महत्व पर चर्चा किया। स्वामी जी ने कहा कि एक समय इंद्र भगवान तराजू पर एक तरफ अमृत और दूसरी तरफ वेद ग्रंथ पुराण इत्यादि को तौल रहे थे। उस समय अमृत से भी भारी शास्त्र पुराण इतिहास ग्रंथ हो गए। स्वामी जी ने कहा देवताओं ने अमृत पान किया है। जिससे उन्हें मारना तो नहीं पड़ता है। लेकिन उन्हें राक्षसों के द्वारा प्रताड़ना का सहन करना पड़ता है। क्योंकि बार-बार राक्षस जन्म लेते हैं और देवताओं को परेशान करते हैं। जबकि धर्म, पुराण, ग्रंथ के अनुसार मर्यादा से जीवन जीने वाले व्यक्ति को मरना तो पड़ता है। लेकिन उनके कर्म के अनुसार उन्‍हें मोक्ष की प्राप्ति होती है।
स्‍वामी जी ने बताया कि जब सूत जी राजा परिक्षित को श्रीमद् भागवत कथा सुना रहे थे तभी इंद्र भगवान अमृत लेकर आए। उन्‍होंने कहा कि अमृत राजा परिक्षित पि लें और श्रीमद् भागवत हमें सुना दिजिए।
स्वामी जी ने कहा भगवान का साक्षात स्वरूप है श्रीमद् भागवत, रामायण, रामचरितमानस, विष्णु पुराण, गरुड़ पुराण, वेद, इतिहास के साथ जितने भी धार्मिक ग्रंथ हैं जिसमें भगवान की लीलाओं का वर्णन किया गया है। सभी ग्रंथ पुराण इतिहास में भगवान का साक्षात वास होता है।
जिस प्रकार से सरकार के द्वारा कानून किताबों में लिख दिए जाते हैं। वहीं लॉ बन जाता है। जिससे सभी प्रकार के न्याय कानून इत्यादि का पालन सभी लोगों को करना पड़ता है। जितने भी कानून बनाए जाते हैं। उसको भी एक साधारण पन्‍ने पर ही लिखा जाता है। लेकिन जिस पन्ने पर भी कानून लिखा जाता है। उस कागज का महत्व बहुत ही ज्यादा बढ़ जाता है। जिसके अनुसार ही नियमों को मानना पड़ता है। ठीक उसी प्रकार वेद पुराण इतिहास ग्रंथ इत्यादि साधारण पन्नों पर ही लिखे जाते हैं। किसी न किसी प्रेस में ही प्रिंट किया जाता है। लेकिन जब वह प्रिंट के बाद एक ग्रंथ के रूप में हो जाता है। तब वहीं साक्षात भगवान का स्वरूप होता है।
आगे स्वामी जी ने नारद जी के श्राप पर भी चर्चा की। नारद जी को श्राप था कि वह एक स्थान पर नहीं रह सकते हैं। क्योंकि एक समय एक राजा के हजारों पुत्रों को उन्होंने ब्रह्मचारी बना दिया था। जिसके कारण उस राजा ने क्रोधित होकर श्राप दे दिया कि आप किसी भी एक स्थान पर नहीं रह सकते हैं। इसीलिए नारद जी विचरण करते रहते हैं। लेकिन जब भी वह पूजा पाठ जप तप तपस्या में रहते हैं। उस समय यह श्राप उन पर लागू नहीं होता है। क्योंकि भगवान श्रीमन नारायण का यह आशीर्वाद है कि जब भी नारद जी जप तप पूजा पाठ में रहेंगे तब तक वह श्राप से मुक्त रहेंगे।
कथा के दौरान एक प्रसंग की चर्चा करते हुए स्वामी जी ने दामाद का मतलब भी समझाया। दामाद का मतलब जो जब भी ससुराल जाता है तब कुछ दान लेने के बारे में ही सोचता है। उसे दामाद कहा जाता है। चाहे स्थिति कैसा भी हो सुख दुख कुछ भी हो। लेकिन दामाद को पूरा जीवन कुछ ना कुछ लेने की ही आशा बनी रहती है। आगे स्वामी जी ने दूवार्थी का मतलब समझाएं। दूवार्थी बेटी को कहा जाता हैं। दूवार्थी उसे कहा जाता है जो प्रेम से हंस कर अपने माता-पिता से जीवन भर पैसा रूपया साड़ी कपड़ा लेते रहती है, उसे दूवार्थी कहते हैं। उदाहरण देते हुए स्वामी जी ने कहा कि लड़की अपने ससुराल से जब भी अपने गांव माता-पिता के घर जाती है तो उसके मन में भी कुछ लेने की ही इच्छा बनी रहती है। साड़ी मिल जाता, कपड़ा मिल जाता, कुछ पैसा मिल जाता, मतलब हंस खेल करके जो पूरे जीवन अपने माता-पिता भाई से कुछ लेने की इच्छा में रहती है। उसे ही दूवार्थी बताया गया है।

Related posts

भोजपुर: विवेकानंद की जयंती पर स्वामी विवेकानंद समाज कल्याण संस्थान द्वारा कार्यकम आयोजित।

rktvnews

रायपुर : आयुर्वेद महाविद्यालय चिकित्सालय में 1480 बच्चों को कराया गया स्वर्ण अमृत प्राशन।

rktvnews

भोजपुर:प्रस्तावित अधिवक्ता संशोधन विधेयक, 2025 कानूनी पेशे और अधिवक्ताओं के अधिकारों पर बड़ा हमला : आइलाज

rktvnews

आरएसएस ने दिखाए अपने नुकीले दांत।

rktvnews

उत्तराखंड: राजभवन में पारंपरिक हर्षोल्लास से मना ‘हरेला’ ।

rktvnews

अवैध गैस रिफिलिंग प्रवर्तन दल को देख सिलेंडर छोड़ भागे युवक।

rktvnews

Leave a Comment