
आरा/भोजपुर 03 जुलाई।चिकित्सक दिवस पर विशेष वार्ता में वरिष्ठ पत्रकार डा दिनेश प्रसाद सिन्हा ने महान शिक्षाविद प्रो जे बी पांडेय से ऐतिहासिक धार्मिक और वर्तमान तक का अद्यतन चर्चा की।प्रो पांडेय ने बताया की मनुष्य परमात्मा की सृष्टि की अनुपम रचना है। संसार की 84 लाख योनियों में श्रेष्ठ कर्म का फलाफल मनुष्य योनि में जन्म की प्राप्ति है।संत तुलसीदास ने रामचरितमानस में लिखा बड़े भाग मानुष तन पावा,सुर दुर्लभ सद्ग्रंथन गावा,आकर चारि लाख चौरासी,
जीवन में चार प्रकार के सुखों की चर्चा शास्त्रों में कहीं गई है. जिसमें प्रथम सुख स्वस्थ काया,दूजा सुख घर में माया,तीजा सुख पुत्र आज्ञा कारी,चौथा सुख कहे में नारी। मानव जीवन का प्रथम सुख स्वस्थ काया है और इसके संरक्षक डाक्टर हैं।
समुद्र मंथन से 14 रत्न निकले थे जिसमें डाक्टर भी एक हैं।ईश्वर सृष्टि के कर्ताधर्ता हैं लेकिन सृष्टि सुरक्षित, संरक्षित एवं स्वस्थ रहे – एतदर्थ परमात्मा ने धन्वंतरि के रूप में चिकित्सक को निरूपित किया।स्वास्थ्य को मनुष्य की अन्यतम् संपत्ति कहा गया है।बिना किसी कृत्रिम प्रसाधन के जो सौंदर्य चेहरे पर खिलता है,वही स्वास्थ्य का प्रमाण है।एक कहावत बहुधा सुनीं जाती है – जब धन जाता है,तब कुछ नहीं जाता।जब चरित्र जाता है,तब बहुत कुछ जाता है।लेकिन जब स्वास्थ्य जाता है,तब सब कुछ चला जाता है।
भारत रत्न डा विधान चंद्र राय (प्रथम भूतपूर्व मुख्य मंत्री प.बंगाल) की जयंती और पुण्य तिथि के उपलक्ष्य में प्रत्येक वर्ष 1 जुलाई को भारत में नेशनल डाक्टर्स डे मनाया जाता है।उनका जन्म 1 जुलाई 1882 को बांकीपुर पटना में हुआ था और 1 जुलाई 1962 को कोलकाता में उनकी मृत्यु हुई थी।उन्हें 4 फरवरी 1961 को भारत रत्न मिला था।भारत में पहली बार 1991 में डाक्टर्स डे मनाया गया था। अमेरिका में 30 मार्च, क्यूबा में 3 दिसम्बर, और ईरान में 23 अगस्त को डाक्टर्स डे मनाया जाता है।यह विशेष दिवस उन सभी डाक्टरों और स्वास्थ्य कर्मियों को समर्पित है,जो अपनी जान जोखिम में डालकर लोगों की सेवा कर रहें हैं।करोना काल में राज्य के 61 डाक्टरों ने मानवता की सेवा करते हुए अपनी जान गंवाई,उन्हें नमन ,वंदन अभिनंदन करते हुए परमात्मा से सबके मंगल की कामना है:
सर्वे भवंतु सुखिनः,सर्वे संतु निरामयाः स्रवे भद्राणि पश्यंतु ,मा कश्चिद् दुख भागभवेत्।
