
भोपाल/मध्यप्रदेश( मनोज कुमार प्रसाद)13 मई।इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मानव संग्रहालय के शैलकला भवन में आज संग्रहालय की हिन्दी अनुवादक श्रीमती सीमा के सम्मान में भावपूर्ण विदाई समारोह आयोजित किया गया। श्रीमती सीमा का चयन भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आई.सी.ए.आर.) में सहायक निदेशक (राजभाषा) पद पर चयन होने के उपलक्ष्य में यह कार्यक्रम आयोजित किया गया।
कार्यक्रम में संग्रहालय के प्रशासनिक अधिकारी पी. शंकर राव, जनसंपर्क अधिकारी हेमंत बहादुर सिंह परिहार, राजभाषा अधिकारी राजेंद्र झारिया, सहायक क्यूरेटर, सूर्य कुमार पांडे सहित विभिन्न अनुभागों के अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे। सभी ने श्रीमती सीमा द्वारा संग्रहालय में दिए गए योगदान, उनकी कार्यनिष्ठा तथा सरल एवं सहयोगपूर्ण व्यक्तित्व की सराहना की। वक्ताओं ने कहा कि उन्होंने राजभाषा से जुड़े कार्यों को सदैव गंभीरता, दक्षता और समर्पण के साथ संपादित किया तथा संग्रहालय में हिन्दी के प्रचार-प्रसार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
अपने संबोधन में जन संपर्क अधिकारी हेमंत बहादुर सिंह परिहार ने कहा कि श्रीमती सीमा का इंडियन कौंसिल आफ़ एग्रीकल्चर रिसर्च जैसे प्रतिष्ठित केंद शासन के संस्थान में सहायक निदेशक (राजभाषा) पद पर चयन संग्रहालय के लिए गौरव का विषय है। यह राजभाषा के क्षेत्र में उनकी मेहनत, प्रतिभा और प्रतिबद्धता का परिणाम है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि वे अपने नए दायित्वों का भी सफलतापूर्वक निर्वहन करेंगी तथा राजभाषा के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य करेंगी।
इस अवसर पर जनसंपर्क अधिकारी हेमंत बहादुर सिंह परिहार ने श्रीमती सीमा को पुष्पगुच्छ भेंट कर सम्मानित किया। सहायक क्यूरेटर सूर्य कुमार पांडे ने उन्हें संग्रहालय का स्मृति चिह्न एवं राजभाषा अधिकारी राजेंद्र झारिया ने संग्रहालय के निदेशक डॉ अमिताभ पांडे की ओर से रिलीविंग पत्र प्रदान किया । कार्यक्रम का सफल संचालन, संग्रहालय के प्रशासनिक अधिकारी डॉ पी शंकर राव ने किया ।
समारोह में संग्रहालय के उपस्थित अन्य अधिकारियों एवं कर्मचारियों , ललित बागुल, धीर सिंह, डा सुदीपा रॉय, तापस विश्वास, एन सकमाचा सिंह दीपक चौधरी,श्रीकांत, गजे सिंह आदि ने उनकी उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए उन्हें उज्ज्वल भविष्य के लिये शुभकामनाएँ दीं।
अपने उद्बोधन में श्रीमती सीमा ने संग्रहालय परिवार के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि मानव संग्रहालय में 13 वर्ष तक राजभाषा हिंदी के लिए कार्य करना उनके लिए अत्यंत प्रेरणादायक अनुभव रहा है। उन्होंने कहा कि यहाँ से प्राप्त सहयोग, स्नेह और कार्यानुभव उनके जीवन की अमूल्य धरोहर रहेगा।
