
RKTV NEWS/गिरिडी(झारखंड)13 मई। समाहरणालय स्थित सभाकक्ष में उपायुक्त रामनिवास यादव की अध्यक्षता में जिला स्वास्थ्य समिति की एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत स्वास्थ्य अवसंरचना मिशन (PM ABHIM) योजना की प्रगति, रक्त केंद्र सदर अनुमंडल गिरिडीह के संचालन, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं सहित विभिन्न स्वास्थ्य योजनाओं की विस्तृत समीक्षा की गई। इस दौरान उपायुक्त ने स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश देते हुए कहा कि जिले में स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में किसी भी प्रकार की कमी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। बैठक में उपायुक्त ने PM ABHIM योजना के तहत चल रहे कार्यों की प्रगति की बिंदुवार समीक्षा करते हुए संबंधित पदाधिकारियों को निर्देशित किया कि सभी कार्य निर्धारित समयसीमा के भीतर पूर्ण किए जाएं। उन्होंने कहा कि यह योजना ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है, इसलिए इसके क्रियान्वयन में किसी भी प्रकार की शिथिलता स्वीकार्य नहीं होगी। वहीं रक्त केंद्र सदर अस्पताल गिरिडीह के संचालन की समीक्षा करते हुए उपायुक्त ने आवश्यक संसाधनों की उपलब्धता, रक्त संग्रहण एवं वितरण की व्यवस्था को सुदृढ़ करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि रक्त की उपलब्धता किसी भी आपातकालीन स्थिति में जीवन रक्षक साबित होती है, इसलिए रक्त केंद्र को पूरी क्षमता के साथ संचालित किया जाना चाहिए। साथ ही, नियमित रक्तदान शिविरों के आयोजन पर भी बल दिया गया ताकि जरूरतमंद मरीजों को समय पर रक्त उपलब्ध हो सके।
स्वास्थ्य सेवाओं में लापरवाही बर्दाश्त नहीं, सभी अस्पतालों में मूलभूत सुविधाएं सुनिश्चित करें:उपायुक्त
बैठक में मुख्यमंत्री रख-रखाव मद के तहत प्राप्त आवंटन एवं व्यय की विस्तृत समीक्षा करते हुए उपायुक्त ने संबंधित अधिकारियों से किए गए कार्यों एवं खर्च की अद्यतन जानकारी प्राप्त की। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिया कि स्वास्थ्य संस्थानों में उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित करते हुए आम जनता को गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराई जाए। समीक्षा के दौरान उपायुक्त ने जिले के सभी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) एवं प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) में जेनरेटर, सोलर सिस्टम, इनवर्टर एवं बिजली की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि अस्पतालों में बिजली, पेयजल, बैठने की व्यवस्था एवं अन्य मूलभूत सुविधाओं में किसी प्रकार की कमी नहीं होनी चाहिए। उपायुक्त ने सभी स्वास्थ्य कर्मियों एवं चिकित्सकों की बायोमेट्रिक अटेंडेंस की समीक्षा करते हुए समय पर अस्पताल पहुंचने का सख्त निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि मरीजों को समय पर चिकित्सीय उपचार उपलब्ध कराना स्वास्थ्य विभाग की सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। बैठक में ब्लॉकवार सीएचसी में लगे सीसीटीवी कैमरों की स्थिति, ऑपरेशन थियेटर में हो रहे कार्य, चिकित्सीय उपकरणों की उपलब्धता एवं मरीजों की सुविधा से जुड़े विभिन्न बिंदुओं की भी समीक्षा की गई। बैठक में आभा कार्ड निर्माण की प्रगति की समीक्षा करते हुए बताया गया कि जिले में अब तक लगभग 11.4 लाख आभा कार्ड बनाए जा चुके हैं। उपायुक्त ने लक्ष्य के अनुरूप शत-प्रतिशत उपलब्धि सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। इसके साथ ही HMIS स्टेटस, ANC रजिस्ट्रेशन एवं एम्बुलेंस चालकों की नियमित मॉनिटरिंग की भी समीक्षा की गई। उन्होंने अधिकारियों को पूरी पारदर्शिता एवं जवाबदेही के साथ कार्य करने की सख्त हिदायत दी। समीक्षा के क्रम में उपायुक्त ने एक्टिव एवं इनएक्टिव सहियाओं के कार्यों की भी समीक्षा करते हुए कार्य में लापरवाही बरतने वालों पर आवश्यक कार्रवाई करने का निर्देश दिया। उन्होंने 9 से 11 माह के बच्चों के शत-प्रतिशत पूर्ण टीकाकरण सुनिश्चित करने पर विशेष जोर दिया। इसके अलावा कुपोषण उपचार केंद्र (MTC) की स्थिति, बेड की उपलब्धता एवं कुपोषित बच्चों के समुचित इलाज की समीक्षा करते हुए उपायुक्त ने अधिक से अधिक कुपोषित बच्चों को उपचार केंद्र में भर्ती कर बेहतर चिकित्सीय सुविधा उपलब्ध कराने का निर्देश दिया। वहीं ब्लड बैंक की कार्यप्रणाली की समीक्षा करते हुए आवश्यक दिशा-निर्देश भी दिए गए। उपायुक्त ने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं में किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी तथा आम जनता को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराना प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है। मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं की समीक्षा के दौरान उपायुक्त ने विशेष रूप से संस्थागत प्रसव (Institutional Delivery) को बढ़ावा देने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि सुरक्षित प्रसव सुनिश्चित करना स्वास्थ्य विभाग की प्राथमिक जिम्मेदारी है और इसमें किसी भी प्रकार की लापरवाही गंभीर मानी जाएगी। इस क्रम में उन्होंने सहिया कर्मियों की भूमिका को अत्यंत महत्वपूर्ण बताते हुए कड़े निर्देश जारी किए। उपायुक्त ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि सहिया को महीने में पांच संस्थागत प्रसव कराना होगा। उन्होंने कहा कि सहिया कर्मियों का मुख्य दायित्व ही गर्भवती महिलाओं को स्वास्थ्य संस्थानों तक लाकर सुरक्षित प्रसव सुनिश्चित करना है।
बैठक में उप विकास आयुक्त, स्मृता कुमारी, सिविल सर्जन, उप नगर आयुक्त, अस्पताल उपाधीक्षक, सहायक नगर आयुक्त, जिला आरसीएच पदाधिकारी, संबंधित कार्यपालक अभियंता, सभी प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी, गिरिडीह जिला, बीपीएम, एनएचएम समेत अन्य संबंधित अधिकारी उपस्थित थे।
