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रामगढ़:संघर्ष से सफलता की ओरः ममता कुमारी की प्रेरणादायक कहानी।

RKTV NEWS/रामगढ़(झारखंड)29 जून। जे०एस०एल०पी०एस० अंतर्गत रामगढ़ जिला के दुलमी प्रखंड के पोटमदागा गांव की निवासी ममता कुमारी का जीवन एक सामान्य ग्रामीण महिला की तरह बेहद संघर्षपूर्ण था। सीमित संसाधन, पारंपरिक खेती और आर्थिक तंगी के बीच ममता दीदी और उनका परिवार किसी तरह अपना जीवन व्यतीत कर रहे थे। एक पुराना कच्चा मकान, बच्चों के पास ढंग के कपड़े नहीं, शिक्षा के पर्याप्त साधन नहीं और रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करने के लिए कड़ा संघर्ष ऐसा था ममता दीदी का जीवन।

पारंपरिक खेती की चुनौतियाँ

ममता दीदी का परिवार पारंपरिक खेती पर ही निर्भर था। लेकिन यह खेती भी सीमित थी और लाभकारी नहीं थी। जानकारी के अभाव में वे रासायनिक खादों और कीटनाशकों का अत्यधिक प्रयोग करते थे, जिससे मिट्टी की उपजाऊ शक्ति दिन-ब-दिन कम होती जा रही थी। नतीजतन, खेती में लागत बढ़ती जा रही थी, जबकि उत्पादन घट रहा था। परिवार का खेती पर से भरोसा उठने लगा था और आर्थिक स्थिति दिन-प्रतिदिन बिगड़ती जा रही थी।

बदलाव की शुरुआत – JSPLS से जुड़ाव

इन कठिन परिस्थितियों में एक उम्मीद की किरण तब जागी जब झारखंड स्टेट लाइवलीहुड प्रमोशन सोसाइटी (JSPLS) द्वारा गांव में 15 दिनों का जागरूकता अभियान चलाया गया। इसी अभियान के दौरान ममता दीदी को स्वयं सहायता समूह (SHG) की जानकारी मिली। उन्होंने इस पहल को गंभीरता से लिया और गांव की 12 महिलाओं को जोड़कर चमेली सखी मंडल का गठन 2016 में किया।
समूह के गठन के बाद उन्होंने छोटी-छोटी बचत शुरू की और नियमित बैठकों में भाग लेने लगीं। ममता दीदी की लगन और सक्रियता को देखकर उन्हें “सक्रिय महिला” (Active Woman) के रूप में चुना गया। इसके बाद उनका जीवन तेजी से बदलने लगा।

मार्गदर्शन और प्रेरणा – AKM दीदी की भूमिका

ममता दीदी को उनके समूह की आजीविका कृषक मित्र (AKM) दीदी का पूर्ण सहयोग मिला। उन्होंने ममता दीदी को जैविक खेती के फायदों के बारे में बताया और समझाया कि रासायनिक खाद और कीटनाशक केवल मिट्टी को ही नहीं, स्वास्थ्य को भी नुकसान पहुंचाते हैं। जैविक उत्पाद न केवल सेहत के लिए बेहतर होते हैं. बल्कि बाजार में भी अच्छे दामों में बिकते हैं।
AKM दीदी ने ममता दीदी को विभिन्न आयवर्धक गतिविधियों जैसे मशरूम उत्पादन, बकरी पालन, मुर्गी और बतख पालन, और मछली पालन की भी जानकारी दी। ममता ने इन सुझावों को गंभीरता से लिया और आजीविका के नए रास्तों की ओर कदम बढ़ाया।

आर्थिक मदद और नवाचार

ममता दीदी ने JSPLS के सहयोग से ₹50,000 का CC1. लोन लिया और ड्रिप सिंचाई प्रणाली अपनाई। साथ ही, उन्होंने जैविक खाद का प्रयोग शुरू किया। परिणामस्वरूप, खेती की लागत घट गई और उत्पादन बढ़ गया।
अब उनके खेतों से ताजी, स्वादिष्ट और सेहतमंद सब्जियां घर में भी उपयोग हो रही थीं और बाजार में भी अच्छे दामों में बिक रही थीं। परिवार की सेहत में सुधार आया और दवाइयों पर खर्च भी कम होने लगा।
इसके बाद ममता दीदी ने ₹25,000 का और लोन लेकर मशरूम की खेती, बतख और मुर्गी पालन, मछली पालन और बकरी पालन की शुरुआत की। धीरे-धीरे उनके परिवार की आय के कई स्रोत बन गए। अब वे केवल खेती पर निर्भर नहीं थीं।

आय में उल्लेखनीय वृद्धि

JSPLS से जुड़ने और आजीविका के विविध स्रोतों को अपनाने के बाद ममता दीदी की वार्षिक आय में अत्यधिक वृद्धि हुई। उनकी वर्तमान वार्षिक आय इस प्रकार है:

1. कृषि ₹1,00,000

2. मशरूम उत्पादन ₹15,000

3. बतख व मुर्गी पालन – ₹50,000

4. बकरी पालन- ₹20,000

5. मछली पालन – ₹50,000

कुल वार्षिक आय – ₹2,35,000

इस प्रकार, पहले जहां परिवार को दो वक्त की रोटी के लिए भी संघर्ष करना पड़ता था, वहीं आज ममता दीदी का परिवार आत्मनिर्भर और आर्थिक रूप से सक्षम हो चुका है।

सामाजिक और पारिवारिक बदलाव

ममता दीदी की मेहनत और उपलब्धियों का असर उनके पूरे परिवार पर देखने को मिला। अब उनके बच्चे अच्छे स्कूलों में पढ़ाई कर रहे हैं। परिवार के पास साफ-सुथरे कपड़े हैं, पर्याप्त भोजन है और एक बेहतर जीवनशैली अपनाई जा रही है। ममता दीदी अब पक्का मकान बनाने की योजना पर काम कर रही हैं और उनका अगला सपना है- एक चार चक्का वाहन खरीदना, जिससे उनका परिवार और भी आरामदायक जीवन जी सके।

प्रेरणा का स्रोत बनीं ममता दीदी

ममता दीदी की कहानी न सिर्फ उनके परिवार के लिए, बल्कि पूरे गांव की महिलाओं के लिए प्रेरणा बन चुकी है। आज वे अपने अनुभव और ज्ञान को अन्य महिलाओं के साथ साझा करती हैं। वे उन्हें समूह से जुड़ने, बचत करने, लोन लेकर उत्पादक कार्य शुरू करने, और आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रोत्साहित करती हैं।
अब ममता दीदी न सिर्फ एक किसान हैं, बल्कि एक सफल उद्यमी, एक प्रेरक और एक मार्गदर्शक भी हैं। गांव की अन्य महिलाएं उन्हें एक रोल मॉडल के रूप में देखती हैं और उनके दिखाए रास्ते पर चलने की प्रेरणा लेती हैं।
ममता दीदी की कहानी इस बात का प्रमाण है कि यदि महिलाओं को सही मार्गदर्शन, मंच और सहयोग मिल जाए तो वे किसी भी चुनौती को पार कर सकती हैं। JSPLS ने ममता दीदी को न केवल आर्थिक रूप से मजबूत बनाया, बल्कि उन्हें आत्मविश्वासी और स्वावलंबी भी बनाया। ममता दीदी की यह प्रेरणादायक कहानी दर्शाती है कि अगर महिलाओं को सही मार्गदर्शन, संसाधन और समर्थन मिले, तो वे न केवल अपने जीवन को संवार सकती हैं, बल्कि पूरे समाज के लिए एक मिसाल बन सकती हैं।
यह सफलता की कहानी हमें यह सिखाती है कि संघर्ष चाहे कितना भी बड़ा क्यों न हो, अगर संकल्प, मेहनत और सही दिशा हो, तो कोई भी महिला अपने जीवन को संवार सकती है और समाज में बदलाव की मिसाल बन सकती है।

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