
नई दिल्ली/रविशंकर सिंह,08 मार्च।विमला आर्ट फोरम, गुरुग्राम द्वारा आईफेक्स गैलरी, नई दिल्ली में 28 फरवरी 2025-6 मार्च 2025 तक लोककला एवं समकालीन कला प्रदर्शनी में विनिता कुमारी की पिड़िया कलाकृति प्रदर्शित हुई। जिसकी चर्चा काफी हुई।
विनिता कुमारी की कलाकृति को देखते हुए एक परम्परा की याद ताजा हो जाती है । जो बिहार के भोजपुरी भाषी क्षेत्रों में विद्यमान है। अगहन महीने के शुक्ल पक्ष द्वितीया को औरतें – युवतियां इस त्यौहार को करती हैं।
औरतें दीवार पर प्राकृतिक रंगों से पिड़िया माई का चित्रण करती हैं। लेकिन अब इसकी परम्परा धीरे-धीरे समाप्त होती जा रही है। बहुत कम औरतें पिड़िया लेखन कर रही हैं।
विनिता कुमारी द्वारा चित्रित पिड़िया कलाकृति को जब हम देखते हैं तो पिड़िया माई को मानवाकृति की तरह बनाती हैं। सबसे पहले पृष्ठभूमि में गोबर रंग को डालती है,उसका प्रभाव छोड़ती हैं। उसके बाद हरे रंग से मानवाकृति की तरह चकोर आकृति बनाकर उपर सिर, अगल बगल हाथ एवं नीचे पैर उजले रंग से बनाती हैं।
विनिता की पिड़िया माई के चित्रों में उजले रंग से जो रेखांकन करती हैं, वे काफ़ी बारीक होते हैं। जो काफी चक्षुप्रिय लगते हैं। विनिता पेपर पर या कैनवस पर एक्रेलिक रंग से चित्रण करती है।
विनिता कुमारी को सी. सी आर टी. , नई दिल्ली द्वारा पिड़िया लेखन के पुनर्लेखन के लिए जुनियर फेलोशिप प्राप्त है। वे इस विषय के इतिहास एवं वर्तमान स्थिति पर शोध कर चित्रों का सृजन कर रही हैं। विनिता के चित्र महज पिड़िया का चित्र नहीं बल्कि वहाँ की संस्कृति है जिसकी चर्चा होनी चाहिए ।
विनिता कुमारी को पिड़िया लेखन करने के लिए विभिन्न जगहों सम्मानित, पुरस्कृत किया जा चुका है। नई दिल्ली, आरा, राजगीर, सिवान ,गुरुग्राम आदि शहरों में इनकी पिड़िया कलाकृतियों की प्रदर्शनी हो चुकी है। राष्ट्रीय शिल्प संग्रहालय, नई दिल्ली के बाहरी दीवार पर इन्होंने बड़ी पिड़िया-लेखन कलाकृति का चित्रण किया है जिसकी चर्चा खूब होती है।
इसके साथ ही राजगीर में एक विद्यालय की दीवार पर पिड़िया लेखन इन्होंने किया है। गुरुग्राम, हरियाणा एवं सिवान, बिहार के विभिन्न जगहों पर होने वाली कला शिविरों में इनकी भागीदारी हो चुकी है। इसके साथ ही कई जगहों से इन्हें पुरस्कृत एवं सम्मानित किया जा चुका है।
