
RKTV NEWS/नई दिल्ली 27 जून।भारत के चुनाव आयोग (ईसीआई) ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की अध्यक्षता में चुनाव आयुक्त डॉ. सुखबीर सिंह संधू और डॉ. विवेक जोशी के साथ मिलकर 345 पंजीकृत गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों (आरयूपीपी) को सूची से हटाने की कार्यवाही शुरू की है, जो 2019 से पिछले छह वर्षों में एक भी चुनाव लड़ने की अनिवार्य शर्त को पूरा करने में विफल रहे हैं और इन दलों के कार्यालय कहीं भी भौतिक रूप से स्थित नहीं हो सके हैं। ये 345 आरयूपीपी देश भर के विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से हैं।
आयोग के संज्ञान में आया है कि वर्तमान में ईसीआई के साथ पंजीकृत 2,800 से अधिक आरयूपीपी में से कई आरयूपीपी उन आवश्यक शर्तों को पूरा करने में विफल रहे हैं जो आरयूपीपी के रूप में जारी रहने के लिए आवश्यक हैं। इस प्रकार, ईसीआई द्वारा ऐसे आरयूपीपी की पहचान करने के लिए एक राष्ट्रव्यापी अभ्यास किया गया था और अब तक 345 ऐसे आरयूपीपी की पहचान की जा चुकी है। यह सुनिश्चित करने के लिए कि कोई भी पार्टी अनुचित रूप से डी-लिस्ट न हो, संबंधित राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के सीईओ को ऐसे आरयूपीपी को कारण बताओ नोटिस जारी करने का निर्देश दिया गया है, जिसके बाद इन पार्टियों को संबंधित सीईओ द्वारा सुनवाई के माध्यम से अवसर दिया जाएगा। किसी भी आरयूपीपी को डी-लिस्ट करने के संबंध में अंतिम निर्णय भारत के चुनाव आयोग द्वारा लिया जाएगा। देश में राजनीतिक दल (राष्ट्रीय/राज्य/आरयूपीपी) जनप्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 29ए के प्रावधानों के तहत ईसीआई के साथ पंजीकृत हैं। इस प्रावधान के तहत, एक बार राजनीतिक दल के रूप में पंजीकृत होने के बाद, किसी भी संघ को कुछ विशेषाधिकार और लाभ मिलते हैं, जैसे कि कर छूट आदि।
यह अभ्यास राजनीतिक व्यवस्था को साफ करने और ऐसे दलों को सूची से हटाने के उद्देश्य से किया गया है, जिन्होंने 2019 के बाद से लोकसभा या राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों की विधानसभाओं या उपचुनावों का कोई चुनाव नहीं लड़ा है और जिनका भौतिक रूप से पता नहीं लगाया जा सका है। इस अभ्यास के पहले चरण में इन 345 आरयूपीपी की पहचान की गई है, जिसे राजनीतिक व्यवस्था को साफ करने के उद्देश्य से जारी रखा जाएगा।
