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बागपत प्रशासन की मातृत्व सुरक्षा के लिए नई पहल, सार्वजनिक स्थान बड़ौत बस डिपो पर स्थापित स्तनपान कक्ष।

बड़ौत बस डिपो पर बने स्तनपान कक्ष का जिलाधिकारी ने किया उद्घाटन।

महिला सशक्तिकरण एवं बाल कल्याण के लिए जिला प्रशासन बागपत की अनोखी पहल।

स्तनपान कक्ष से मां को मिलेगी सहूलियत, शिशु को बेहतर पोषण — बागपत के बड़ौत में शुरू हुई अनोखी पहल।

आंचल की छांव में मातृत्व को मिलेगा सम्मान, बड़ौत बस डिपो बनेगा नजीर।

‘आंचल’ पहल से मातृत्व को मिलेगा नया स्वरूप, अब बिना झिझक शिक्षा और रोजगार के लिए निकल सकेंगी महिलाएं।

‘आंचल’ से बदलेगी सोच, बढ़ेगा महिला सम्मान: डीएम अस्मिता लाल की पहल बनेगी प्रदेश में मॉडल।

RKTV NEWS/बागपत(उत्तर प्रदेश)09 जून। नवजात शिशु को सार्वजनिक जगह पर स्तनपान कराना मां के लिए हमेशा आसान नहीं होता। अक्सर असुविधा, शर्मिंदगी, सामाजिक नजरिया और सुविधाओं की कमी माताओं के लिए मुश्किलें बढ़ा देती हैं और माताएं इस प्राकृतिक और महत्वपूर्ण प्रक्रिया को सहजता से पूरा नहीं कर पातीं। क्या आपने कभी सोचा है कि ऐसे में अगर उनके लिए कोई खास जगह हो, जहां वे आराम से, सम्मान के साथ अपने बच्चे को दूध पिला सकें, तो उनकी परेशानी कितनी कम हो जाएगी? बागपत प्रशासन ने इसी सोच के साथ ‘आंचल’ नाम से एक नई पहल शुरू की है, जो माताओं को न सिर्फ सहूलियत देगी, बल्कि पूरे परिवार को गर्व महसूस कराएगी।
जिलाधिकारी अस्मिता लाल द्वारा जनपद के पहले स्तनपान कक्ष का बड़ौत बस डिपो पर आज उद्घाटन किया गया ।जनपद बागपत में इस तरह की सार्वजनिक स्थान पर स्तनपान कक्ष की यह पहली पहल है, जो माताओं की गरिमा और सुविधा सुनिश्चित करती है।
यह स्तनपान कक्ष लिटिल फिट फाउंडेशन डॉक्टर अभिनव तोमर द्वारा संचालित , विश्व स्वास्थ्य संगठन और यूनिसेफ के सहयोग से संचालित इस महत्वाकांक्षी मुहिम के तहत बड़ौत बस डिपो पर उत्तर प्रदेश का पहला स्तनपान कक्ष स्थापित किया जाएगा, यह पहल न केवल माताओं के लिए सहूलियत की नई दिशा है, बल्कि पूरे परिवार के लिए गर्व का विषय भी बनेगी। मातृत्व के सम्मान और शिशु के स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में ‘आंचल’ एक मिसाल साबित होगी।
उल्लेखनीय है कि यह स्तनपान बूथ पर्यावरण के अनुकूल होगा और इसे 350 किलो प्लास्टिक, 170 किलो आयरन स्क्रैप और 15 किलो लकड़ी जैसे रीसाइकल्ड मटेरियल से बनाया जा रहा है। यह पर्यावरणीय जागरूकता और सामाजिक सेवा का सुंदर संगम प्रस्तुत करता है।
वहीं, इस सुविधा से महिलाओं को घरों से बाहर अपने रोजगार अथवा शिक्षा हेतु निकलने में सुगमता होगी, क्योंकि बड़ौत बस डिपो जैसे स्थान पर उपलब्ध सुविधा उनकी तमाम चिंताओं को दूर करेगी और वे अपने छोटे बच्चों के साथ यात्रा करने में सक्षम होंगी।
जिलाधिकारी ने कहा कि “मां और बच्चे की सेहत केवल परिवार की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि पूरे समाज का कर्तव्य है।” वर्तमान परिप्रेक्ष्य में महिलाएं राष्ट्र निर्माण में समान रूप से भाग ले रही हैं और बड़ी संख्या में महिलाएं आत्मनिर्भरता हेतु घरों से बाहर यात्रा करती हैं, इसलिए आंचल पहल का महत्व बढ़ जाता है। जब महिलाओं के पास अपने बच्चे की देखभाल के लिए बड़ौत बस डिपो जैसे स्थान पर एक बूथ स्थापित होगा, तो निश्चिंत होकर महिलाएं घरों से निकलकर सफलता पाएंगी और शिक्षा, रोजगार के क्षेत्र में आगे बढ़ेंगी।
वहीं, स्तनपान नवजात शिशु की रोग-प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है, पोषण को बेहतर बनाता है और कई बीमारियों से बचाता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, जन्म के पहले छह महीने तक केवल मां का दूध ही सबसे उत्तम पोषण है। ‘आंचल’ पहल इस लक्ष्य को सामाजिक समर्थन के साथ हासिल करने में मदद करेगी, जहां पर्याप्त सुविधाएं और सुव्यवस्थित वातावरण उपलब्ध होगा। इस स्तनपान कक्ष, यानी ब्रेस्टफीडिंग बूथ पर फीडिंग एवं चाइल्ड केयर की सुविधा भी उपलब्ध होगी।
सामाजिक स्वीकृति और स्वाभिमान के लिहाज से यह कदम बेहद अहम है। अक्सर माताएं सार्वजनिक जगहों पर स्तनपान कराने में असहज महसूस करती हैं। कई बार शर्मिंदगी, नाक-भौं सिकोड़ना, या फिर सुविधा का अभाव उन्हें मजबूर करता है कि वे कहीं छुपकर स्तनपान करें। आपने अक्सर किसी मां की बेचैनी महसूस की होगी जब वह सार्वजनिक स्थान पर अपने नवजात को गोद में लेकर इस सोच में उलझी हो कि अब कहां जाकर अपने बच्चे को दूध पिलाए? नज़रों से बचती, इधर-उधर देखती, कई बार तो केवल इसलिए बच्चा भूखा रह जाता है क्योंकि समाज ने उसके लिए कोई सुरक्षित और सम्मानजनक जगह नहीं दी।
‘आंचल’ पहल इस दृश्य को पूरी तरह बदल देगी। अब सार्वजनिक जगहों पर स्तनपान करना न तो शर्म की बात होगी और न ही मुश्किल। बागपत प्रशासन की यह पहल इस बाधा को दूर कर स्तनपान को एक स्वाभाविक और सम्मानजनक प्रक्रिया के रूप में स्थापित करेगी। ‘आंचल’ से लैंगिक समानता और परिवार के सभी सदस्यों की सहभागिता को भी बढ़ावा मिलेगा। जब परिवार के पुरुष सदस्य भी इस प्रक्रिया में सहयोगी बनेंगे, तो मातृत्व के प्रति समाज में सकारात्मक बदलाव आएगा और पारिवारिक संबंध मजबूत होंगे।
बड़ौत बस डिपो जैसे व्यस्त सार्वजनिक स्थान पर पहला स्तनपान कक्ष स्थापित करने से ज्यादा से ज्यादा महिलाएं इस सुविधा का लाभ उठा सकेंगी। रोज़ाना हजारों यात्रियों की आवाजाही वाले इस स्थान से यह संदेश दूर-दूर तक पहुंचेगा कि बागपत में मातृत्व को सम्मान मिल रहा है, और बच्चों का स्वास्थ्य प्राथमिकता बन चुका है। यह कदम मातृत्व को सम्मान देने और बाल स्वास्थ्य को प्राथमिकता देने की दिशा में एक बड़ा सामाजिक संदेश भी है। बागपत प्रशासन की यह पहल पूरे समाज के समावेशी विकास का प्रतीक है, जो महिलाओं के लिए सम्मान, परिवार के लिए सहयोग और बच्चों के लिए बेहतर भविष्य सुनिश्चित करती है।
जिलाधिकारी अस्मिता लाल की सोच और संवेदनशील दृष्टिकोण से प्रेरित यह पहल मातृत्व के सम्मान और शिशु के स्वास्थ्य के लिए एक नई मिसाल साबित होगी। यह पहल प्रदेश में एक मॉडल के रूप में उभर सकती है, जो अन्य जिलों के लिए प्रेरणा बनेगी। ‘आंचल’ के माध्यम से बागपत प्रशासन ने यह साबित किया है कि मातृत्व सुरक्षा और बाल स्वास्थ्य को प्राथमिकता देने से समाज का समग्र विकास संभव है।
बड़ौत बस डिपो स्तनपान कक्ष का उद्घाटन जिला अधिकारी के साथ नवजात शिशु श्री की माता निशि ने किया जिलाधिकारी ने सभी माता को प्रोत्साहित किया।
इस अवसर पर डिप्टी कलेक्टर भावना सिंह, डिप्टी कलेक्टर अमरचंद वर्मा, एसडीएम बड़ौत मनीष कुमार यादव, डॉ अभिनव तोमर सहित अधिशासी अधिकारी बड़ौत मनोज रस्तोगी सहित आदि उपस्थित रहे।

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