
आरा/भोजपुर (डॉ दिनेश प्रसाद सिन्हा)05 जून।पुराना शाहाबाद का आरा शहर एक पौराणिक ऐतिहासिक धार्मिक और कायस्थों की विरादरी का महत्वपूर्ण गढ़ रहा है।बदलते परिवेश में सबका उत्थान,विकास और कार्यक्षेत्र में दबदबा बढ़ा है केवल तय कायस्थों को छोड़कर। यह केवल कहने सुनने की बात नहीं है बल्कि सच्चाई और चिंतनीय प्रश्न है। समाज और देश को ज्ञान और दिशा देने वाला सबसे प्रबुद्ध शिक्षित विकसित जाति कैसे पिछड़ कर हांसिए पर आ गया ?
इसी प्रश्न को लेकर एक युवा सामाजिक, राजनीतिक कार्यकर्ता सचिन सिन्हा से वरिष्ठ पत्रकार डा दिनेश प्रसाद सिन्हा ने आंतरिक भावना को टटोलने का प्रयास किया है। बताते चले की सचिन महाराजा हाता निवासी 46 वर्षीय, हायर डिप्लोमा डिग्रीधारी, अनेक सामाजिक संगठनों यथा भाजपा के पूर्व कार्यालय प्रभारी, भाजपा युवा मोर्चा उपाध्यक्ष, संयोजक ग्रंथालय विभाग ,यूथ हॉस्टल ,संगत पंगत कायस्थ क्रांतिकारी मंच,कायस्थ महासभा, युवा चित्रांश वाहिनी,से जुड़कर वर्षों से जनहित में समाज सेवा जिसमें निशुल्क स्वस्थ जांच, निर्धन युवाओं को कम्प्यूटर प्रशिक्षण, कमजोर लोगों को आर्थिक, सामाजिक संरक्षण प्रदान करते हैं।
राजनीति में आने के प्रश्न के जवाब में बताया कि कायस्थ युवा नेतृत्व को दबाया और हटाया जा रहा है, पार्टी में कोई स्थान न सम्मान दिया गया, बल्कि केवल शत प्रतिशत वोट लेने का साधन और बाद में यूज एण्ड थ्रो की नीति पर काम करते हैं। जीत के संबंध में इन्होंने बताया की जातीय वोटर्स 50 हजार के पार है अन्य पिछड़ा,हरिजन, बुद्धिजीवी, युवा वर्ग सहयोगी है जो राजनीति की दिशा बदलेंगे।
समाज कई हिस्सों में बंटा है इस पर सचिन ने बताया कि सभी संगठनों के पदाधिकारी अपने अस्तित्व के लिए एक राय व सहमति से वोट करेंगे जिसके लिए संपर्क एवं डोर टू डोर कैंपेन अभियान चल रहा है।
किन मुद्दों पर चुनाव लड़ेंगे के जबाब में बताया की सबसे पहले हमारा समाज जिसको शत प्रतिशत वोट देते रहा हैं उसके द्वारा नाइंसाफी, किया गया छल और इग्नोर करने की बात को घर घर घुमकर सभी लोगो को बतायेंगे, बिहार निर्माता और संविधान सभा के प्रथम अध्यक्ष डॉक्टर सच्चिदानंद सिन्हा को सम्मान दिलाना, डॉ राजेंद्र प्रसाद के लिए आवंटित प्रतिमा स्थल को प्राप्त करना, कायस्थ बिरादरी का एकमात्र प्राचीन चित्रगुप्त मंदिर का निर्माण और अनाधिकृत लोगों से मुक्त कराना, संपर्क अभियान चलाकर नगर निगम में पार्षदों की संख्या बढ़ाना आदि है। इन्होंने बताया की हार जीत मुद्दा नहीं,जो साथ देगा वहीं सही।
न कभी छल किया है न करेंगे,मुंह पर सही को सही और ग़लत को ग़लत कहेंगे।
एक नया मुद्दा के थ्री (कायस्थ,कोइर कहार ) जातीय गोलबंदी पर काम चल रहा है।
