
RKTV NEWS/आरा (भोजपुर)25 मई।आज आरा के पकड़ी स्थित गैस एजेंसी रोड में सोनू पासवान के कार्यालय में जसम व युवानीति से जुड़े संस्कृतिकर्मी रवि रंजन राकेश की स्मृति में श्रद्धांजलि सभा आयोजित की गई। उपस्थित लोगों ने उन्हें पुष्पांजलि दी और उनके परिजनों के साथ मिलकर दो मिनट का मौन रखा। वे लंबे समय से माउथ कैंसर जैसी असाध्य बीमारी से जूझ रहे थे। विगत 10 मई को उनका निधन हो गया था।
अपनी श्रद्धांजलि व्यक्त करते हुए जसम के राज्य अध्यक्ष जितेंद्र कुमार ने कहा कि रवि रंजन राकेश जैसे युवा का असामयिक जाना एक प्रगतिशील वाम सांस्कृतिक आन्दोलन के लिए बडी़ क्षति है। ऐसे हीं रंगकर्मियों व संस्कृतिकर्मियों के छोटे-छोटे प्रयासों से सामाजिक-सांस्कृतिक चेतना में बदलाव होते रहे हैं। जसम, युवानीति व माले के साथ रवि रंजन राकेश एक मजबूत कड़ी बने रहे। कवि सुमन कुमार सिंह ने बताया कि रंजन एक अध्ययनशील चिंतक, संस्कृतिकर्मी व समाजकर्मी थे। उनकी राजनीतिक-सांस्कृतिक चेतना काफी सृजनात्मक रही है। बहुचर्चित रंगकर्मी कृष्णेंदु ने उन्हें याद करते हुए बताया कि न सिर्फ रंजन बल्कि उनका पूरा परिवार ही सांस्कृतिक चेतना संपन्न रहा है। वे हजार चौरासिवें की माँ, कौन मरा किसका लहू है ,तेरा नहीं मेरा नहीं तथा अश्लीलता के खिलाफ चलाये गये अभियान का नाटक – जरा सोचिए आदि में वे सक्रियता से शामिल रहे। उनके पड़ोसी व रंगकर्मी रहे सुनील कुमार ने बताया कि वे चित्र बनाने, कविताएँ व भोजपुरी में गीत लिखने आदि में भी रूचि रखते थे। उनकी उपस्थिति शहर में आयोजित होनेवाले ‘कउडा़ काव्य गोष्ठी’ में भी हुआ करती थी। समाजकर्मी व उनके मित्र क
कमलेश पासवान ने बताया कि 1990 के बाद भोजपुर में जो प्रगतिशील वाम सामाजिक- सांस्कृतिक आन्दोलनों में सक्रियता आई उसमें रवि रंजन जैसे नौजवानों की बड़ी भूमिका रही है। उनके पडो़सी और दलित राजनीतिकर्मी अजय पासवान ने रंजन को याद करते हुए बताया कि आज जब सामाजिक-सांस्कृतिक आन्दोलनों को पुन: छोटे-छोटे स्तर पर तेज़ करने की जरूरत है तब ऐसे में रंजन का हमारे बीच न होना बेहद चिंता की बात है। रंगकर्मी धनंजय ने बताया कि वे समय के पाबंद रंगकर्मी थे। साहित्य व कला संस्कृति के सचेत अध्येता भी थे।
इस अवसर पर रंजन के पुत्र-पुत्री व भाइयों की उपस्थिति रही। छोटे भाई प्रदीप ने उनके सपनों को साकार करने और परिवार के साथ मजबूती से जुड़कर आगे बढ़ने का संकल्प लिया। शमशाद प्रेम ने संचालन करते हुए बीच-बीच में रंजन की सांस्कृतिक चेतना, उनकी सक्रियता और युवानीति के नाटकों में उनकी संलग्नता की चर्चा की। कार्यक्रम में रामाशंकर पासवान, सरस्वती देवी, भूपेंद्र कुमार, राजू नैना, तन्नू यादव, तथा संतोष कुमार आदि भी उपस्थित रहे। धन्यवाद ज्ञापन युवानीति के रंगकर्मी किशोर कुमार किया।
