
RKTV NEWS/पटना(बिहार )22 मई। मंत्रिमंडल सचिवालय विभाग (राजभाषा) के तत्त्वावधान में बुधवार को फणीश्वरनाथ रेणु ‘हिन्दी भवन सभागार, छज्जूबाग में आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी एवं सुमित्रानंदन पंत जयंती समारोह का आयोजन हुआ।
कार्यक्रम का उद्घाटन मंचासीन अतिथियों द्वारा दीप प्रज्वलन कर किया गया। तत्पश्चात् दोनों साहित्यकारों के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित की गयी। बिहार गीत के साथ कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ।
कार्यक्रम के प्रारंभ में स्वागत भाषण में निदेशक सुमन कुमार ने आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी के बारे में बताया कि उन्होंने भाषा का मानकीकरण किया, उसे सुसंस्कृत रूप दिया। उन्होंने हिन्दी साहित्य को एक मजबूत स्तंभ प्रदान किया।
विद्वान वक्ता अनुग्रह मेमोरियल कॉलेज, गयाजी के सहायक प्राध्यापक डॉ० उमाशंकर सिंह ने अपने संबोधन में बताया कि द्विवेदी जी ने पहली बार साहित्य का पर्याय वाङ्मय बताया। उन्होंने हिन्दी साहित्य में सौम्य यथार्थ को अपनाया। उन्होंने भाषा का मानकीकरण कर उसे परिष्कृत रूप दिया।
दूसरे विद्वान वक्ता एम० एम० कॉलेज, विक्रम, पाटलिपुत्र विश्वविद्यालय, पटना के हिन्दी विभागाध्यक्ष डॉ० अजेय कुमार ने बताया कि आचार्य द्विवेदी ने सदा लीक से हटकर चलने का काम किया। उन्होंने कभी आलोचनाओं की परवाह नहीं की क्योंकि उन्हें समुद्र बनना था। उन्होंने खड़ी बोली को हिन्दी गद्य-पद्य साहित्य में स्थापित किया। तीसरे विद्वान वक्ता बी० बार० ए० विश्वविद्यालय, मुजफ्फरपुर के हिन्दी विभाग के सहायक प्राध्यापक डॉ० सुशांत ने अपने संबोधन में सुमित्रानंदन पंत के बारे में नामवर सिंह की पुस्तक ‘छायावाद’ का जिक्र करते हुए बताया कि पंत का प्रकृति प्रेम देश प्रेम का दूसरा रूप था। उन्होंने प्रकृति प्रेम के माध्यम से देश प्रेम को सिद्ध किया है। अंतर्मुखी कवि पंत स्वतंत्र रूप से प्रकृति के पास जाते हैं और उसमें प्रकृति के सिर्फ कोमल पक्ष को अभिव्यक्ति देते हैं जोदेश प्रेम की ओर इसलिए संकेत करता है क्योंकि उनके अनुसार प्रकृति से प्रेम देश के कण-कण से प्रेम करना है।
कार्यक्रम के अगले चरण में डॉ० गोरख प्रसाद मस्ताना, डॉ० पंकज कर्ण, डॉ० कुमारी अनु, उत्कर्ष आनंद, कुमार आर्यन, पंकजवासिनी, मधुरानी, शालिनी सिन्हा आदि ने अपने काव्य पाठ से सबको मंत्र मुग्ध कर दिया।
धन्यवाद ज्ञापन उप निदेशक अनिल कुमार लाल और मंच संचालन उप निदेशक डॉ० प्रमोद कुँवर ने किया।
