
आरा/भोजपुर( डॉ दिनेश प्रसाद सिन्हा)28 मार्च।आरा के जगदेव नगर में विश्व अध्यात्म मंडल के 6 वें त्रिदिवसीय अधिवेशन का श्रीगणेश दीप प्रज्ज्वलित कर संतों और आयोजकों की उपस्थिति में रांची विश्वविद्यालय के पूर्व हिंदी विभागाध्यक्ष प्रो डा जंग बहादुर पाण्डेय ने किया।डा पाण्डेय ने अपने उद्घाटन भाषण में कहा कि श्रीमद्भागवत महापुराण की रचना हस्तिनापुर नरेश महाराज परीक्षित की मृत्यु के भय से निवृत्ति के लिए हुई।महाराज परीक्षित ने अपने गुरु महाराज शुकदेव मुनि से पूछा कि मरणासन्न व्यक्ति को क्या करना चाहिए!महाराज परीक्षित के इस जिज्ञासा के समन के लिए महा ज्ञानी शुकदेव जी ने भागवत की कथा सात दिनों तक सुनाई और कहा कि मरनासन्न व्यक्ति को उस परम पिता परमेश्वर का स्मरण करना चाहिए,जिसकी असीम कृपा से यह दुर्लभ मानव शरीर मिला है। हरि की कृपा के बिना कुछ भी संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि –
श्रुति पुरान सब ग्रंथ कहाहीं।
रघुपति भगति बिना सुख नाहीं।
उन्होंने कहा कि श्रीमद्भागवत पुराण में 12 स्कंद हैं और एक लाख श्लोक हैं।1 से 9 स्कंदो में भगवान के भक्तों की कथा है और 3 स्कंदो में भगवान श्रीकृष्ण की पावन लीलाओं का आख्यान है। भगवान् का हो जाना ही भागवत का परम अभीष्ट है।इस अवसर पर जमानियां से आये हुए सुप्रसिद्ध रामायणी डा अखिलेश चंद्र उपाध्याय ने कहा कि जो जगत् से जुड़ता है,उसे लौकिक सुख और जो जगदीश से जुड़ जाता है उसे पारलौकिक सुख की प्राप्ति होती है और परमात्मा जीवात्मा के अनुराग के बिना नहीं मिलता।
इस अवसर पर मानस मर्मज्ञ अनिल मिश्र,अजय मिश्र,राज बल्लभ सिंह, रमा देवी शास्त्री तथा रामामणी बाबा, बच्चा जी आदि ने अपने सार्थक उद्बोधनों से इस अनुष्ठान को भव्यता प्रदान की।इस पावन पुनीत अवसर पर जिन विद्वानों एवं विदुषियों की गरिमामयी उपस्थिति से इस अधिवेशन में चार चांद लगा -उनमें श्री कृष्ण गुप्ता, शशिभूषण राय,अवधेश राय, मधेश्वर पाण्डेय,डा सत्यनारायण राय, रामावतार राय,डा नथुनी पाण्डेय,डा महेन्द्र कुमार राय रसिक,ब्रज बिहारी सिंह, प्रमोद कुमार राय, डा जनार्दन मिश्र,डा रामजी राय,डा कुमार शिव शंकर, शुभम् कुमार,डा रेणु मिश्रा,डा मधु मिश्रा, बिनोद कुमार तिवारी,आदि प्रमुख रहे। पंडाल श्रोताओं से खचाखच भरा था।कथा प्रात: 10 बजे से रात्रि 12 बजे तक हो रही है।यह अधिवेशन 26 मार्च से 28 मार्च तक अबाध गति से चलेगा।इस अधिवेशन में भजन कीर्तन की भी उत्तम व्यवस्था है।आगत अतिथियों का भव्य स्वागत विश्व अध्यात्म मंडल के अध्यक्ष रामेश्वर तिवारी ने, कुशल संचालन राम नारायण पांडेय ने और धन्यवाद ज्ञापन लक्ष्मण राय ने किया।राष्ट्र गान से पूर्णाहुति हुई।
