RKTV NEWS/अनिल सिंह ,25 अप्रैल।प्रत्येक वर्ष भारत वर्ष में वैशाख शुक्ल पक्ष की पंचमी को आद्य शंकराचार्य की जयंती मनाई जाती है आद्य शंकराचार्य भारत के एक महान दार्शनिक एवं धर्मप्रवर्तक थे। भगवतगीता उपनिषदों और वेदांतसूत्रो पर लिखी हुई इनकी टिकाएं काफी प्रसिद्ध है।आज इनकी जयंती पर कवि अरुण दिव्यांश ने अपने शब्दों से श्रद्धांजलि अर्पित की है।
जब जब हुई है धर्म की हानि ,
ईश स्वयं अवतार ले आए हैं ।
सुने धरा की पुकार वे सदा ही ,
नहीं तनिक देर भी लगाए हैं ।।
धरा पे आने की थी जरूरत ,
देव ऋषिगण अरदास लगाए हैं ।
कर स्वीकार ऋषि देव प्रार्थना ,
माता आर्याम्बा स्वप्न दिखाएं हैं ।।
अवतरित हुए केरल मालावार में ,
नम्बूद्री ब्राह्मण एक परिवार में ।
बैशाख शुक्ल पंचमी थी तिथि ,
मां आर्याम्बा के घर अवतार में ।।
कम उम्र में ही घर को था त्यागा ,
निकल पड़े तब गुरु की खोज में ।
गोविंदा भगवत्पाद गुरु से मिले ,
लिए हुए वे कांतिपूर्ण ओज में ।।
गुरु से सुंदर गुरुदीक्षा वे लेकर ,
वेद ग्रंथ किया अध्ययन गहन ।
चार दिशा में चार मठ स्थापित ,
धर्म प्रचार प्रसार किए निर्वहन ।।
अल्प आयु में घर थे वे त्यागे ,
अल्प आयु में ही धर्म का प्रचार ।
अल्प आयु में ही गुरु थे खोजें ,
अल्पायु में बनाए मोती को हार ।।
बचपन में उन्हें ये ज्ञान जगा था ,
सात वर्ष में ही घर किए थे त्याग ।
पच्चीस वर्षों तक कार्य किए वे ,
बत्तीसवें आयु में देह दिए त्याग ।।
नमन आद्य शंकराचार्य जी को ,
श्रद्धा शब्द सुमन अर्पित करता हूं ।
हो रहे विचलित पुनः आज मानव,
कर्म देख शर्म से आहें भरता हूं ।।
…...अरुण दिव्यांश.
