भारत और नेपाल की मित्रता ऐतिहासिक है ,हिंदी और नेपाली एक दूसरे की सगी बहनें है एक के बिना दूसरे का है जीवन अधूरा:जनार्दन मिश्र।
RKTV NEWS/अनिल सिंह,25 अप्रैल।बिहार के चर्चित कवि कथाकार एवं उपन्यासकार डॉ जनार्दन मिश्र का हार्दिक स्वागत नेपाल की शस्य श्यामली उर्वर धरती काठमांडू में शैली साहित्य समाज नेपाल के तत्वावधान में आयोजित कार्यक्रम में साहित्यकारों द्वारा संयुक्त रूप से किया गया । संदर्भित प्रख्यात अंतर्राष्ट्रीय संस्था के विद्वान अध्यक्ष डॉ मंजूश्री प्रधान एवम् त्रिभुवन विश्विद्यालय , काठमांडू के वरिष्ठ हिंदी और संस्कृत के प्रोफेसर डॉ पूनम झा ने डॉ मिश्र के कृतित्व और व्यक्तित्व पर विस्तार से संदर्भित सम्मान संगोष्ठी में कहा कि जनार्दन मिश्र की समस्त साहित्यिक कृतियां सर्वहारा वर्ग को प्रतिनिधित्व करती हुईं विश्व बंधुत्व का संदेश देती हैं जो आज के कठिन समय के लिए बेहद ही अनिवार्य है ।
इन्होंने अपनी समकालीन कविताओं और कहानियों में रोजमर्रों से जूझ रहे आम जीवन की तलाश की है ।इन्हें विशिष्ट सम्मान पत्र , अंगवस्त्र , नेपाली शुभ सूचक सिर के पाग से मंगलाचरण की करतल ध्वनि से सादर सम्मानित किया गया ।इस अवसर पर अपने उद्बोधन में डॉ मिश्र ने कहा कि भारत और नेपाल की यह मित्रता ऐतिहासिक है ।इसकी नींव सदियों से काफी ही मजबूत है। हिंदी और नेपाली भाषा एक दूसरे की सगी बहन है ___ एक के बिना दूसरे का जीवन एक तरह से अधूरा । यह विशिष्ट सम्मान भारत और नेपाल के रिश्ते को और ही मजबूती प्रदान करेगा । डॉ मिश्र के सम्मानित होने पर यहां के साहित्यकारों में काफी ही खुशी है । वरिष्ठ कवि जगदीश नलिन , जितेंद्र कुमार , ओमप्रकाश मिश्र , सुमन कुमार सिंह , सुधीर सुमन , सिद्धार्थ वल्लभ , प्रसिद्ध रंगकर्मी श्रीधर शर्मा , कृष्णेंदु , आलोचक डॉ रविंद्रनाथ राय , वरिष्ठ कथाकार डॉ नीरज सिंह , प्रसिद्ध कथाकार डॉ मिथिलेश्वर , डॉ बलिराज ठाकुर , प्रो नंदजी दुबे , प्रो निलांबुज, प्रसिद्ध कवयित्री मीरा श्रीवास्तव , डॉ किरण कुमारी , डॉ रेणु मिश्र , डॉ ममता मिश्र , डॉ पूनम कुमारी आदि ने इन्हें अपनी हार्दिक शुभ कामनाएं व बधाइयां दी हैं ।

भारत और नेपाल की मित्रता ऐतिहासिक है ,हिंदी और नेपाली एक दूसरे की सगी बहनें है एक के बिना दूसरे का है जीवन अधूरा:जनार्दन मिश्र।