
आरा/भोजपुर (डॉ दिनेश प्रसाद सिन्हा)07 मार्च।बकाया वेतन के लिए”एम एम महिला कॉलेज शिक्षक संघ” के द्वारा विरोध प्रदर्शन गुरुवार को भी जारी रहा। पांचवा महीना चल रहा है फिर भी शिक्षकों और कर्मचारियों का वेतन मिलने का कोई आसार नहीं दिख रहा है।विश्वविद्यालय प्रशासन के कुछ पदाधिकारीयो के गलतियों के चलते ‘वीर कुंवर सिंह विश्वविद्यालय’ के शिक्षक और कर्मचारी उनके किए का भुगत रहे हैं। शिक्षक और कर्मचारी अपने घर से लेकर समाज में सब जगह जलील हो रहे हैं क्योंकि बिना पैसे का घर में न कोई वैल्यू होती है और ना समाज में मान होता है । बढ़ती महंगाई ने शिक्षकों की कमर तो पहले ही तोड़ दी थी, दूसरे वेतन नहीं मिलने से जिंदगी जीना दुश्वार हो गया है । शर्म आती है विश्वविद्यालय की ऐसी लचर व्यवस्था पर।
शिक्षक ही प्रशासनिक अधिकारी के पद पर आसीन है फिर भी यह शिक्षकों की समस्याओं को समझ पाने में असमर्थ हैं। ऐसा लगता है मानो इन्हें वेतन की जरूरत ही नहीं है।बिना वेतन 4 महीने से अधिक हो जाने के कारण शिक्षकों ओर कर्मचारियों की स्थिति, उनका घर_बार तबाह होने के कगार पर है पर इनकी सुध लेने वाला कौन है ?? इन प्रशासनिक अधिकारी को नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए अपने पद को त्याग देना चाहिए। वेतन के मांग करते हुए महिला कॉलेज शिक्षक संघ और यहां पर काम करने वाले कर्मचारीयो के द्वारा धरना प्रदर्शन के साथ-साथ शिक्षक कर्मचारी एकता को भी प्रदर्शित किया है। महिला कॉलेज- कर्मचारी हम साथ साथ हैं! शिक्षक कर्मचारी एकता जिंदाबाद! कुलपति इस्तीफा दो!कुलसचिव इस्तीफा दो!विश्वविद्यालय प्रशासन हाय_ हाय! विश्वविद्यालय प्रशासन की मनमानी नहीं चलेगी! अभिलंब वेतन जारी करो! जैसे नारों के साथ विरोध प्रदर्शन किया । शिक्षक और शिक्षककेटर कर्मचारियों ने मिलकर यह प्रण लिया है की जल्द से जल्द वेतन रिलीज नहीं किया गया तो महाविद्यालय में होने वाले कार्यों को पूर्ण रूप से बंद कर दिया जाएगा। वेतन नहीं तो काम नहीं, का निर्णय लिया गया। इसके लिये जिम्मेदार संपूर्ण रूप से विश्वविद्यालय प्रशासन होगा। महिला कॉलेज शिक्षक संघ की अध्यक्ष डॉ खुशबू कुमारी, सचिव डॉ सादिया हबीब, प्रोफेसर राजीव कुमार, डॉ रूपाली गुप्ता, डॉ मनोज कुमार ,वीनू, कुमारी शिल्पा आदि अन्य शिक्षक के साथ साथ कर्मचारी भाई बंधुओं में प्रेम शरण सिंह, कमलेश सिंह, नीलोफर नाहिद, नन्द कुमार सिंह, विमलेश सिंह, लाखपति देवी, आशा देवी एवं अन्य शामिल रहे।
