
नई दिल्ली/प्रो (डॉ) एम रहमतुल्लाह 25 अगस्त।जब कोई विश्वविद्यालय परिवर्तन और संस्थागत विकास के दौर से गुजरता है, तब उसकी प्रगति में शैक्षणिक नेतृत्व के साथ-साथ प्रशासनिक नेतृत्व की भूमिका भी अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाती है। जामिया मिल्लिया इस्लामिया आज जिस नई प्रशासनिक सक्रियता और संस्थागत गति के दौर से गुजर रही है, उसमें कुलपति प्रो मजहर आसिफ के नेतृत्व की महत्वपूर्ण भूमिका है। कुलपति द्वारा लिए गए महत्वपूर्ण निर्णयों में से एक था—जामिया के कुलसचिव जैसे अत्यंत महत्वपूर्ण पद की जिम्मेदारी प्रो मो महताब आलम रिज़वी को सौंपना।
समय के साथ यह निर्णय अपनी सार्थकता और महत्ता को और अधिक स्पष्ट करता गया है।
प्रो मो महताब आलम रिज़वी नवंबर 2024 से जामिया मिल्लिया इस्लामिया के कुलसचिव के रूप में अपनी जिम्मेदारी निभा रहे हैं। वे ऐसे प्रशासक नहीं हैं, जिनका विश्वविद्यालय प्रशासन से संबंध केवल नौकरशाही अनुभव तक सीमित रहा हो। वे एक प्रतिष्ठित शिक्षक, शोधकर्ता और अंतरराष्ट्रीय संबंधों, सामरिक अध्ययन, पश्चिम एशिया, शांति एवं संघर्ष समाधान तथा ऊर्जा सुरक्षा जैसे विषयों के विशेषज्ञ रहे हैं। कुलसचिव का दायित्व संभालने से पहले वे जामिया के नेल्सन मंडेला सेंटर फॉर पीस एंड कॉन्फ्लिक्ट रिज़ॉल्यूशन के प्रोफेसर एवं निदेशक थे।
उनका अकादमिक जुड़ाव मनोहर पर्रिकर इंस्टीट्यूट फॉर डिफेंस स्टडीज एंड एनालिसिस (MP-IDSA) जैसे प्रतिष्ठित राष्ट्रीय संस्थान से भी रहा है। शोध, प्रकाशन, अध्यापन और राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय अकादमिक मंचों पर उनकी सक्रिय भागीदारी ने उनके व्यक्तित्व को एक व्यापक दृष्टिकोण प्रदान किया है।
यही शैक्षणिक अनुभव, संस्थागत समझ और प्रशासनिक क्षमता का समन्वय उन्हें जामिया जैसे ऐतिहासिक केंद्रीय विश्वविद्यालय के कुलसचिव पद के लिए विशिष्ट रूप से उपयुक्त बनाता है।
शैक्षणिक दृष्टि वाला प्रशासक
किसी भी विश्वविद्यालय में कुलसचिव का पद अत्यंत चुनौतीपूर्ण होता है। कुलसचिव को प्रशासनिक, शैक्षणिक और वैधानिक मामलों के बीच समन्वय स्थापित करना होता है। उन्हें शिक्षकों, अधिकारियों, गैर-शिक्षण कर्मचारियों और विद्यार्थियों से जुड़े विभिन्न मामलों को एक साथ देखना पड़ता है।
जामिया मिल्लिया इस्लामिया जैसे केंद्रीय विश्वविद्यालय में यह जिम्मेदारी और भी जटिल हो जाती है। हजारों विद्यार्थी, सैकड़ों शिक्षक, विभिन्न संकाय, विभाग और केंद्र, प्रवेश एवं परीक्षा व्यवस्था, नियुक्तियां, पदोन्नतियां, सेवा संबंधी मामले, विश्वविद्यालय की वैधानिक संस्थाएं, वित्तीय प्रक्रियाएं, आधारभूत संरचना तथा अनेक प्रशासनिक निर्णय—इन सभी के बीच निरंतर समन्वय की आवश्यकता होती है।
प्रो. महताब आलम रिज़वी की शैक्षणिक पृष्ठभूमि इस संदर्भ में उन्हें एक अतिरिक्त दृष्टि प्रदान करती है। उन्होंने लंबे समय तक अध्यापन, शोध, अकादमिक प्रशासन और नीति-आधारित अध्ययन से जुड़कर कार्य किया है। अंतरराष्ट्रीय संबंधों, सामरिक मामलों, भारत-पश्चिम एशिया संबंधों तथा ईरान से जुड़े विषयों पर उनका शोध उनके व्यापक बौद्धिक दृष्टिकोण को दर्शाता है।
इस प्रकार उनका कुलसचिव बनना एक ऐसे अकादमिक को प्रशासन की जिम्मेदारी सौंपे जाने का उदाहरण है, जिसने विश्वविद्यालय को केवल प्रशासनिक फाइलों के माध्यम से नहीं, बल्कि शिक्षक और शोधकर्ता के रूप में भी समझा है।
जिम्मेदारी को परिणाम में बदलने की चुनौती
किसी प्रशासनिक पद की सफलता केवल निर्णय लेने में नहीं, बल्कि उन निर्णयों को प्रभावी ढंग से लागू कराने में होती है। कुलसचिव का कार्यालय विश्वविद्यालय की प्रशासनिक व्यवस्था का एक महत्वपूर्ण केंद्र होता है, जहां नियुक्तियों, पदोन्नतियों, सेवा संबंधी मामलों, वैधानिक संस्थाओं, विश्वविद्यालय के विभिन्न अंगों के बीच समन्वय तथा उच्च अधिकारियों के निर्णयों के क्रियान्वयन से संबंधित अनेक महत्वपूर्ण कार्य आते हैं।
जामिया जैसे बड़े विश्वविद्यालय में इन कार्यों को गति देना अपने आप में एक बड़ी जिम्मेदारी है। इसके लिए निर्णय के साथ-साथ निरंतर निगरानी, संवाद और विभिन्न कार्यालयों के बीच प्रभावी समन्वय आवश्यक है।
प्रो. रिज़वी की भूमिका को इसी व्यापक संदर्भ में देखा जाना चाहिए। कुलसचिव का कार्यालय विश्वविद्यालय की शैक्षणिक दृष्टि और उसके प्रशासनिक क्रियान्वयन के बीच एक महत्वपूर्ण सेतु का कार्य करता है।
समयबद्ध और संवेदनशील प्रशासन का महत्व
विश्वविद्यालय प्रशासन की प्रभावशीलता का एक महत्वपूर्ण पैमाना यह भी है कि मामलों का निपटारा उचित समय-सीमा के भीतर हो।
किसी शिक्षक के लिए पदोन्नति की प्रतीक्षा केवल एक प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं होती। किसी कर्मचारी के लिए सेवा संबंधी निर्णय उसके पूरे पेशेवर जीवन को प्रभावित कर सकता है। किसी विद्यार्थी के लिए प्रमाणपत्र या शैक्षणिक दस्तावेज समय पर मिलना उसके भविष्य की दिशा तय कर सकता है।
इसलिए किसी कुलसचिव की कार्यशैली केवल फाइलों और नियमों तक सीमित नहीं होती; उसके निर्णयों का सीधा संबंध विश्वविद्यालय समुदाय के लोगों के जीवन से होता है।
प्रो. महताब आलम रिज़वी के सामने भी यही चुनौती है कि नियमों और प्रक्रियाओं का पालन करते हुए प्रशासन को अधिक उत्तरदायी, संवेदनशील और समयबद्ध बनाया जाए। एक शिक्षक और शोधकर्ता के रूप में लंबे अनुभव ने उन्हें विश्वविद्यालय समुदाय की अपेक्षाओं और चिंताओं को समझने की अतिरिक्त क्षमता प्रदान की है।
आज के दौर में जब विश्वविद्यालयों से पारदर्शिता, जवाबदेही, दक्षता और विद्यार्थी-केंद्रित प्रशासन की अपेक्षा की जाती है, यह गुण विशेष महत्व रखते हैं।
परीक्षा और प्रवेश व्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका
जामिया की प्रवेश और परीक्षा व्यवस्थाएं विश्वविद्यालय की सबसे बड़ी प्रशासनिक गतिविधियों में शामिल हैं। हर वर्ष बड़ी संख्या में विद्यार्थी विभिन्न पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए आवेदन करते हैं और विभिन्न शहरों में प्रवेश परीक्षाएं आयोजित की जाती हैं।
ऐसी विशाल प्रक्रिया के सफल संचालन के लिए शैक्षणिक विभागों, परीक्षा प्रशासन और कुलसचिव कार्यालय के बीच घनिष्ठ समन्वय आवश्यक होता है।
वर्तमान प्रशासनिक व्यवस्था के दौरान विश्वविद्यालय की परीक्षा प्रणाली में भी उल्लेखनीय गतिविधियां देखने को मिली हैं। विश्वविद्यालय ने 280 से अधिक शैक्षणिक कार्यक्रमों की एंड-सेमेस्टर परीक्षाएं सफलतापूर्वक आयोजित कीं, जिनमें लगभग 25,000 विद्यार्थियों ने भाग लिया। निर्धारित समय-सीमा के भीतर बड़ी संख्या में परिणाम घोषित किए जाना भी एक व्यापक संस्थागत समन्वय का परिणाम है।
यहां कुलसचिव की भूमिका को किसी एक व्यक्ति की उपलब्धि के रूप में नहीं, बल्कि विश्वविद्यालय की सामूहिक प्रशासनिक व्यवस्था के महत्वपूर्ण हिस्से के रूप में देखना उचित होगा। कुलसचिव का दायित्व विभिन्न संबंधित प्राधिकरणों और कार्यालयों के बीच प्रशासनिक सहयोग और समन्वय सुनिश्चित करना है।
शैक्षणिक विस्तार को प्रशासनिक सहयोग
आज के समय में विश्वविद्यालय की प्रगति केवल मौजूदा पाठ्यक्रमों के संचालन तक सीमित नहीं रह सकती। नए और उभरते हुए क्षेत्रों में शैक्षणिक कार्यक्रम शुरू करना भी उच्च शिक्षा संस्थानों की आवश्यकता बन गया है।
जामिया ने भी उभरती प्रौद्योगिकियों, नवीकरणीय ऊर्जा, जैव-प्रौद्योगिकी, सामाजिक विज्ञान, प्रबंधन तथा अन्य समकालीन विषयों से जुड़े क्षेत्रों में अपने शैक्षणिक विस्तार की दिशा में कदम बढ़ाए हैं।
किसी नए पाठ्यक्रम की शुरुआत केवल अकादमिक निर्णय नहीं होती। इसके लिए स्वीकृतियां, शिक्षकों की नियुक्ति, आधारभूत संरचना, वित्तीय प्रावधान, प्रवेश प्रक्रिया और विश्वविद्यालय के विभिन्न निकायों के बीच समन्वय आवश्यक होता है।
इन सभी प्रक्रियाओं में कुलसचिव का कार्यालय एक महत्वपूर्ण संस्थागत केंद्र के रूप में काम करता है। इसलिए प्रो. रिज़वी की भूमिका पारंपरिक प्रशासनिक दायित्वों से आगे बढ़कर विश्वविद्यालय के शैक्षणिक विस्तार के लिए आवश्यक संस्थागत वातावरण तैयार करने से भी जुड़ती है।
शैक्षणिक और प्रशासनिक नेतृत्व के बीच सेतु
कुलसचिव के लिए सबसे महत्वपूर्ण क्षमताओं में से एक है—विश्वविद्यालय के अकादमिक और प्रशासनिक दोनों पक्षों को समझना।
प्रो. महताब आलम रिज़वी का पूरा अकादमिक जीवन उन्हें इस भूमिका के लिए विशेष रूप से तैयार करता है। वर्षों तक शिक्षक और शोधकर्ता के रूप में काम करने के कारण वे शिक्षकों की पेशेवर आवश्यकताओं और अकादमिक चिंताओं को समझते हैं। दूसरी ओर, वर्तमान पद उन्हें विश्वविद्यालय के नियमों, विनियमों और वैधानिक प्रक्रियाओं के अनुरूप कार्य करने की जिम्मेदारी देता है।
यह दोहरा अनुभव अकादमिक और प्रशासनिक वर्गों के बीच उस दूरी को कम करने में सहायक हो सकता है, जो कभी-कभी विश्वविद्यालयों में दिखाई देती है।
नेल्सन मंडेला सेंटर फॉर पीस एंड कॉन्फ्लिक्ट रिज़ॉल्यूशन के निदेशक के रूप में उनका पूर्व अनुभव भी इस संदर्भ में उल्लेखनीय है। वहां उन्होंने अकादमिक नेतृत्व, शोध प्रबंधन और संस्थागत समन्वय की जिम्मेदारियां निभाईं। कुलसचिव के पद पर ये अनुभव उनके वर्तमान दायित्वों में उपयोगी साबित हो सकते हैं।
संस्थागत सहयोग और साझेदारी
आधुनिक विश्वविद्यालय प्रशासन अब केवल विश्वविद्यालय की चारदीवारी तक सीमित नहीं है। दूसरे शैक्षणिक संस्थानों, सरकारी संगठनों, पेशेवर संस्थाओं तथा राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय अकादमिक नेटवर्क के साथ सहयोग भी विश्वविद्यालय के विकास का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है।
जामिया और स्कूल ऑफ प्लानिंग एंड आर्किटेक्चर, दिल्ली के बीच समझौता ज्ञापन से जुड़े एक कार्यक्रम में भी प्रो. रिज़वी ने अध्ययन, सेमिनार, प्रशिक्षण और संयुक्त शोध के महत्व पर जोर दिया। इस सहयोग का उद्देश्य सतत, लचीले और कम-कार्बन वाले शहरी नियोजन एवं डिजाइन के क्षेत्र में विशेषज्ञता विकसित करना था।
ऐसी पहलें यह दर्शाती हैं कि कुलसचिव की भूमिका केवल आंतरिक प्रशासन तक सीमित नहीं है, बल्कि संस्थागत साझेदारियों को मजबूत करने में भी उसकी महत्वपूर्ण भूमिका होती है।
विश्व को समझने वाला एक विद्वान
प्रो. महताब आलम रिज़वी की अकादमिक विशेषज्ञता उनके प्रशासनिक व्यक्तित्व को एक और महत्वपूर्ण आयाम प्रदान करती है।
अंतरराष्ट्रीय संबंधों और सामरिक अध्ययन के विशेषज्ञ के रूप में उन्होंने पश्चिम एशिया की राजनीति, भारत-ईरान संबंध, ऊर्जा सुरक्षा तथा शांति एवं संघर्ष समाधान जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर शोध किया है। राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय अकादमिक मंचों पर उनकी सक्रियता ने उन्हें विभिन्न देशों, संस्थानों और बौद्धिक परंपराओं से परिचित होने का अवसर दिया है।
यह व्यापक दृष्टिकोण जामिया जैसे विश्वविद्यालय के लिए महत्वपूर्ण है, जिसकी ऐतिहासिक पहचान के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय अकादमिक संपर्क और वैश्विक शैक्षणिक उपस्थिति भी लगातार महत्वपूर्ण होती जा रही है।
कुलपति के निर्णय का महत्व
कुलपति प्रो. मजहर आसिफ द्वारा प्रो मो महताब आलम रिज़वीको कुलसचिव की जिम्मेदारी सौंपना इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि किसी भी कुलपति की शैक्षणिक और संस्थागत दृष्टि तभी प्रभावी ढंग से लागू हो सकती है, जब उसके साथ एक सक्षम प्रशासनिक टीम हो।
कुलसचिव उस प्रक्रिया की सबसे महत्वपूर्ण कड़ियों में से एक होते हैं।
प्रो. रिज़वी के कार्यकाल को इसलिए कुलपति प्रो. मजहर आसिफ के नेतृत्व और उनके द्वारा स्थापित प्रशासनिक टीम के व्यापक संदर्भ में देखा जाना चाहिए।
प्रो. रिज़वी को नवंबर 2024 में कार्यवाहक कुलसचिव की जिम्मेदारी सौंपी गई थी और वे वर्तमान में जामिया के कुलसचिव के रूप में अपनी जिम्मेदारी निभा रहे हैं। उनका चयन ऐसे समय में हुआ, जब जामिया को प्रशासनिक दक्षता, शैक्षणिक विस्तार और संस्थागत समन्वय के बीच बेहतर संतुलन की आवश्यकता थी।
आगे की राह
जामिया मिल्लिया इस्लामिया का इतिहास अत्यंत गौरवशाली है। स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़ी इसकी विरासत, इसके शैक्षणिक मूल्य और भारतीय शिक्षा के क्षेत्र में इसके योगदान ने इसे देश के विशिष्ट विश्वविद्यालयों में स्थान दिया है। इसलिए इसके प्रशासन की जिम्मेदारी संभालने वाले प्रत्येक व्यक्ति के सामने केवल वर्तमान को संचालित करने की नहीं, बल्कि भविष्य को आकार देने की चुनौती भी होती है।
प्रो मो महताब आलम रिज़वीके सामने भी यही चुनौती है—जामिया की संस्थागत परंपराओं और मूल चरित्र को सुरक्षित रखते हुए उसे अधिक सक्षम, आधुनिक, उत्तरदायी और वैश्विक विश्वविद्यालय के रूप में आगे ले जाना।
अंततः जामिया की किसी भी उपलब्धि का श्रेय किसी एक व्यक्ति को नहीं दिया जा सकता। यह सामूहिक प्रयास का परिणाम होता है। कुलपति प्रो. मजहर आसिफ विश्वविद्यालय को समग्र नेतृत्व और दृष्टि प्रदान कर रहे हैं; कुलसचिव प्रो मो महताब आलम रिज़वीको प्रशासनिक समन्वय की अत्यंत महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई है और वे उसे निभा रहे हैं; नियंत्रक परीक्षा प्रो. अहतशामुल हक, वित्त अधिकारी प्रो. मो. कमालुन नबी, डीन स्टूडेंट्स वेलफेयर प्रो. नीलोफर अफ़ज़ल, चीफ प्रॉक्टर प्रो. असद मलिक, सभी संकायों के डीन, विभागाध्यक्ष, केंद्रों के निदेशक, गैर-शिक्षण कर्मचारी और सबसे बढ़कर जामिया के विद्यार्थी—सभी इस संस्थागत यात्रा के महत्वपूर्ण सहभागी हैं।
इन सभी के सामूहिक प्रयासों से जामिया मिल्लिया इस्लामिया को अधिक सशक्त, अधिक दक्ष, अधिक उत्तरदायी और अकादमिक रूप से अधिक जीवंत बनाने की दिशा में आगे बढ़ने का अवसर मिल रहा है।
प्रो (डॉ) एम रहमतुल्लाह
एजेके मास कम्युनिकेशन रिसर्च सेंटर जामिया मिल्लिया इस्लामिया, नई दिल्ली
मोबाइल: 9818462389
ई-मेल: mrahmatullah@jmi.ac.in



