
आरा/भोजपुर (डॉ दिनेश प्रसाद सिन्हा)28 जुलाई। भगवान महावीर मार्ग (जेल रोड) स्थित श्री दिगंबर जैन चंद्रप्रभु मंदिर में आचार्य श्री सुलभ सागर जी महाराज ससंघ के सान्निध्य एवं प्रतिष्ठाचार्य रवि कीर्ति शास्त्री के निर्देशन में चल रहे श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान के छठे दिन श्रद्धालुओं ने सिद्ध परमेष्ठी के 256 गुणों की आराधना की।मीडिया प्रभारी निलेश कुमार जैन ने बताया कि प्रातःकाल भगवान जिनेंद्र प्रभु का भक्तिभाव से अभिषेक, पूजन एवं शांतिधारा की गई। इसके बाद देव-शास्त्र-गुरु पूजा, श्री पार्श्वनाथ पूजा, श्री पंचमेरू पूजा और श्री नंदीश्वर द्वीप पूजा संपन्न हुई। तत्पश्चात श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान का आयोजन हुआ।विधान के दौरान सौधर्म इंद्र-इंद्राणी उर्मिला-सुनील जैन, कुबेर सपना-अनीश जैन, ईशान उषा-आलोक जैन तथा मैना सुंदरी के रूप में मंजुला-आदेश जैन सहित अन्य श्रद्धालुओं ने विधान मंडल पर 256 श्रीफल, ध्वज एवं अर्घ्य समर्पित कर पूजा-अर्चना की।इस अवसर पर आचार्य श्री सुलभ सागर जी महाराज ने अपने प्रवचन में कहा कि श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान अनंत सिद्धात्माओं की भक्ति का एक महान अनुष्ठान है। अष्टान्हिका महापर्व के दौरान श्रद्धा और शुद्ध भाव से की गई आराधना से असीम पुण्य की प्राप्ति होती है।आयोजन को सफल बनाने में चातुर्मास समिति के डॉ. शशांक जैन, रीना जैन, अजय जैन (बबलू), मनीष जैन, साहू जैन, रोहित जैन, ओंकार अग्रवाल, अलका जैन, ब्र. सुलोचना दीदी, रत्ना जैन, ज्योति जैन, जूही जैन, हर्षित जैन, अतिशय जैन, वंश जैन, आकाश जैन, मन्नू जैन का सक्रिय सहयोग रहा।
