
पटना/बिहार (डॉ दिनेश प्रसाद सिन्हा) 19 जून। फेडरेशन ऑफ यूनिवर्सिटी टीचर्स एसोसिएशन ऑफ बिहार (फुताब) के कार्यकारी अध्यक्ष कन्हैया बहादुर सिन्हा एवं महासचिव सह विधान पार्षद संजय कुमार सिंह ने वित्त विभाग और शिक्षा विभाग की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा है कि सरकार ने मार्च से मई तक के वेतन एवं पेंशन मद की तदर्थ अनुदान राशि तो विमुक्त कर दी, लेकिन उसे ऐसे नए पे एवं पेंशन लेजर में जमा किया गया है, जिसका संचालन विश्वविद्यालय तब तक नहीं कर सकेंगे जब तक पुराने लेजर से सभी आईडी नए लेजर में स्थानांतरित नहीं हो जातीं।नेताओं ने आरोप लगाया कि इस प्रक्रिया में 7 से 10 दिनों का समय लग सकता है। उनका कहना है कि यदि विश्वविद्यालयों को मार्च या अप्रैल में ही नए लेजर में राशि हस्तांतरण की जानकारी दे दी जाती तो वे आवश्यक तैयारी कर लेते।वर्तमान स्थिति ऐसी है कि “राशि दी भी गई और नहीं भी दी गई।”उन्होंने कहा कि हाल ही में मुख्यमंत्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा था कि वेतन और पेंशन कर्मचारियों का संवैधानिक अधिकार है तथा इसे अधिकारियों की लेटलतीफी और अनावश्यक कागजी प्रक्रियाओं पर नहीं छोड़ा जा सकता। इसके बावजूद संबंधित विभागों के अधिकारी मुख्यमंत्री की मंशा के अनुरूप कार्य करते नहीं दिख रहे हैं।संगठन ने उम्मीद जताई है कि सरकार 25 जून (आपातकाल दिवस) तक विश्वविद्यालयों को वित्तीय संकट से मुक्त कर वेतन एवं पेंशन के नियमित भुगतान की प्रभावी व्यवस्था लागू करेगी।फुताब ने चेतावनी दी है कि यदि इस दिशा में ठोस कदम नहीं उठाए गए तो 1 जुलाई को राज्यभर के कॉलेजों और विश्वविद्यालय मुख्यालयों में व्यापक विरोध-प्रदर्शन आयोजित किया जाएगा।
