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भोजपुर:जैनशास्त्र में ‘दर्शन’ का उद्देश्य जन-कल्याण के लिए एक अलौकिक स्थान मोक्ष : प्रो एन पी पालित

आरा/भोजपुर (डॉ दिनेश प्रसाद सिन्हा)20 नवंबर। बुधवार को महंथ महादेवानंद महिला महाविद्यालय के दर्शनशास्त्र विभाग तथा प्राकृत विभाग द्वारा विभागीय सेमिनार का आयोजन किया गया। इसका विषय जैनशास्त्र में ‘दर्शन’ जन-कल्याण के लिए एक अलौकिक स्थान था। इसकी अध्यक्षता प्राचार्य प्रो. (डॉ.) नरेंद्र प्रताप पालित द्वारा किया गया। प्राचार्य ने कहा कि जैनशास्त्र में दर्शन का उद्देश्य जन कल्याण के लिए एक अलौकिक स्थान मोक्ष है, जो आत्मा की शाश्वत प्रकृति और कर्म के सिद्धांत में विश्वास के माध्यम से प्राप्त होता है। यह जन्म-जन्मांतर के चक्र से मुक्ति दिलाकर एक सर्वज्ञ अवस्था तक पहुँचने में मदद करता है, जिसके लिए अहिंसा, कठोर तपस्या और आध्यात्मिक शुद्धि जैसे सिद्धांतों का पालन करना आवश्यक है। इतिहास विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. (डॉ.) राजीव कुमार ने कहा कि जैन दर्शन एक प्राचीन भारतीय दर्शन है जो अहिंसा, कर्म और आत्म-मुक्ति पर केंद्रित है। इसमें व्यक्ति को स्वयं ही अपने कर्मों का कर्ता और जिम्मेदार माना गया है, और मोक्ष पाने के लिए त्रिरत्नों (सम्यक दर्शन, सम्यक ज्ञान, और सम्यक चरित्र) का पालन करना आवश्यक है। दर्शनशास्त्र की विभागाध्यक्ष डॉ. स्मिता कुमारी ने कहा कि जैनदर्शन आत्मा की शाश्वत प्रकृति में विश्वास करता है और मानता है कि कर्म व्यक्ति के भविष्य के पुनर्जन्म को निर्धारित करते हैं। प्राकृत विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ कुमारी शिल्पा ने कहा कि जैनशास्त्र का अंतिम लक्ष्य कठोर तप और आध्यात्मिक शुद्धि के माध्यम से सभी कर्म बंधनों को समाप्त करके मोक्ष प्राप्त करना है। हिंदी विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ सुधा निकेतन रंजनी ने कहा कि जैनशास्त्र अलौकिक सिद्धियों को प्राप्त करने का मार्गदर्शन प्रदान करता है, जिससे व्यक्ति जन्म-मृत्यु के बंधन से मुक्त होकर मोक्ष प्राप्त कर सके। सेमिनार का संचालन दर्शनशास्त्र की विभागाध्यक्ष डॉ. स्मिता कुमारी द्वारा किया गया। प्राकृत विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. कुमारी शिल्पा द्वारा धन्यवाद ज्ञापन किया गया। सर्वश्रेष्ठ आलेख को प्रमाण पत्र तथा पुरस्कार से सम्मानित किया गया। सभी छात्राओं ने सेमिनार में बढ़ चढ़ कर हिस्सा लिया तथा अपने विचारों की अभिव्यक्ति की। इन सभी को प्रमाण पत्र तथा पुरस्कार से सम्मानित किया गया। प्रथम स्थान मुस्कान कुमारी, द्वितीय स्थान न्यासा नारायणी, तृतीय स्थान सानिया सुल्तान ने प्राप्त की। कार्यक्रम के दौरान अमरेश कुमार, डॉ. प्रीति , डॉ अनुपमा, डॉ विजय श्री, डॉ कुमारी आशा सिंहा, डॉ निवेदिता, डॉ शिखा, डॉ. शीला तथा अन्य सभी शिक्षक मौजूद रहे। इसके साथ छात्राओं की भी उपस्थिति रही।

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