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भोजपुर:बिहार में लड़कियों के बाल विवाह में 70 प्रतिशत की गिरावट शुभ संकेत: डा सुनीता सिंह

आरा/भोजपुर (डॉ दिनेश प्रसाद सिन्हा)30 सितंबर।कई दशकों से बड़े पैमाने पर बाल विवाह के लिएबिहार सुर्खियों में रहा है।लेकिन बिहार एक बड़े बदलाव की ओर है। बाल विवाह मुक्त भारत अभियान के तहत नागरिक संगठनों के नेटवर्क जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन एवं दिशा एक प्रयास द्वारा कार्यक्रम पूरे भारतवर्ष में चलाया जा रहा है।डा सुनीता सिंह ने बताया की बिहार में लड़कियों के बाल विवाह की दर में 70 प्रतिशत जबकि लड़कों के बाल विवाह की दर में 68 प्रतिशत कमी आई है। यह रिपोर्ट बाल अधिकारों की सुरक्षा व संरक्षण के लिए 250 से भी अधिक नागरिक संगठनों के नेटवर्क जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन (जेआरसी) ने जारी की। रिपोर्ट के अनुसार खराब आर्थिक स्थिति (90%), बच्चों के लिए अच्छा जोड़ीदार मिल जाना (65%) और सुरक्षा के सवाल (39%) अब भी इस राज्य में बाल विवाह के पीछे प्रमुख कारण हैं।भोजपुर में बाल अधिकारों के संरक्षण के लिए काम कर रहे जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन के सहयोगी संगठन दिशा एक प्रयास ने पिछले तीन वर्षों में जिला प्रशासन, पंचायतों और सामुदायिक सदस्यों के साथ बेहद करीबी समन्वय से काम करते हुए जिले में 1065 बाल विवाह रुकवाए हैं।
यह रिपोर्ट जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन के सहयोगी संगठन इंडिया चाइल्ड प्रोटेक्शन की पहल पर सेंटर फॉर लीगल एक्शन एंड बिहैवियरल चेंज फॉर चिल्ड्रेन (सी-लैब) ने तैयार की है। बाल अधिकारों की सुरक्षा के लिए 250 से भी अधिक नागरिक समाज संगठनों के देश के सबसे बड़े नेटवर्क जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन के बिहार में 32 सहयोगी संगठन राज्य के 38 जिलों में काम कर रहे हैं। इस सर्वे में बिहार के 150 गांवों के आंकड़े जुटाने के लिए सबसे पहले आशा, आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं, स्कूल शिक्षकों, सहायक नर्सों, दाइयों और पंचायत सदस्यों जैसे अग्रिम पंक्ति के लोगों से संपर्क कर उन्हें इस शोध और सर्वे से जोड़ा गया। ऐसे में रिपोर्ट के नतीजे बेहद अहम बदलावों की ओर इशारा करते हैं। बिहार के 150 गांवों में हुए इस सर्वे में 92% प्रतिशत उत्तरदाताओं ने कहा कि उनके गांवों में बाल विवाह या तो पूरी तरह बंद हो गया है या काफी हद तक इस पर लगाम लग चुकी है। साथ ही, 99% उत्तरदाताओं ने कहा कि उन्हें बाल विवाह की रोकथाम से संबंधित कानूनों के बारे में मालूम है और 89% ने कहा कि यह जानकारी उन्हें गैरसरकारी संगठनों से मिली। इसके अलावा 82% ने कहा कि उन्हें सामुदायिक बैठकों में यह जानकारी मिली।
अब हमें बदलाव की यह रफ्तार बरकरार रखने और बाल विवाह मुक्त बिहार सुनिश्चित करने के लिए जिला प्रशासन, कानून लागू करने वाली एजेंसियों और ग्रामीण समुदाय के साथ मिलकर और कड़ी मेहनत की जरूरत है।”जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन के संयोजक रवि कांत ने कहा, “राज्य सरकार ने ग्राम पंचायतों की जवाबदेही तय करने, पंचायतों के सशक्तीकरण और सभी संबंधित पक्षों को साथ लेते हुए जमीन पर जागरूकता अभियान चलाने जैसे नीतिगत कदम उठाए हैं।
रिपोर्ट की मुख्य सिफारिशों में कहा गया है कि बाल विवाह को 2030 तक पूरी तरह खत्म करने के लिए कानून पर सख्ती से अमल, बेहतर रिपोर्टिंग व्यवस्था, विवाह का अनिवार्य पंजीकरण और बाल विवाह मुक्त भारत पोर्टल के बारे में गांव-गांव तक लोगों में जागरूकता का प्रसार जरूरी है। साथ ही रिपोर्ट ने यह सुझाव दिया है कि बाल विवाह के खिलाफ देशभर में लोगों को जोड़ने और जागरूक करने के लिए एक राष्ट्रीय बाल विवाह विरोधी दिवस घोषित किया जाए।

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