
आरा/भोजपुर (डॉ दिनेश प्रसाद सिन्हा)30 सितंबर। सोमवार को महाजन टोली स्थित शिवादी आश्रम में शास्त्रीय संगीतज्ञों ने संगीत प्रस्तुतियों मां भगवती की स्तुति की। नवरात्रि के अवसर पर शिवादी क्लासिक सेंटर ऑफ आर्ट एंड म्युजिक के द्वारा आयोजित सप्तमी संगीत समारोह का उद्घाटन कवियित्री डॉ. ममता मिश्र, वरिष्ठ संगीतज्ञ जय किशोर सिंह, सुशील कुमार देहाती ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया । इस अवसर पर कथक नर्तक अमित कुमार व राजा कुमार ने कथक की युगलबंदी प्रस्तुत कर दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। वही सागर, लक्षमी व चाँदनी ने जगत जननी भवतारिणी भगवती स्तुति प्रस्तुत कर तालियां बटोरी । वही सिद्धि, सोमी, सानवी, नायरा व अभीश्री ने झपताल में दुर्गा के विभिन्न रूपों को प्रस्तुत कर वाहवाही लूटी । संगीत शिक्षक बी. डी. ठाकुर ने विद्यापति की रचना जय जय भैरवी असुर भयावही प्रस्तुत कर समां बाँधा । वही शास्त्रीय गायक ब्रजेंद्र महाराज ने राग शुद्ध सारंग में विलंबित ख्याल ”माता भवानी” व छोटा ख्याल प्रस्तुत कर भगवती की आराधना की । वही विदुषी बिमला देवी ने राग मुलतानी में झपताल की बंदिश “मंगलकरनी माई जय जय भवानी” व भजन पूत कपूत हो माता ना कुमाता ” प्रस्तुत कर भाव विभोर कर दिया । वही महेश यादव ने राग दुर्गा में स्वरों की अभिव्यक्ति से दुर्गा के रौद्र एवं दया भाव को प्रदर्शित किया । इस कार्यक्रम में डॉ. लाल बाबू निराला व श्री राणा प्रताप सिन्हा ने तबला वादन में कई क्लिष्ट रचनाओं को सुनाकर रंग बिखेरा। श्रेया पांडेय ने राग चारुकेशी व भजन कृपा करो हे माँ दया की देवी व संगीत शिक्षक अजीत पांडेय ने लोक भजन से दर्शकों को खासा प्रभावित किया । तबले पर देवेश दुबे व रोहित कुमार श्रीवास्तव ‘भोलू’ ने संगत से रंग बिखेरा । गुरु बक्शी विकास ने कहा कि पूजा पद्धति की परंपरा में आराधना व साधना मार्ग पर कठिन है।शास्त्रीय संगीत की बंदिशों को गाना स्वतः में पूजन विधि है । नवरात्रि उत्सव के अवसर को डांस इवेंट बनाने के बजाये इसके आध्यात्मिक भाव को समझना चाहिए । त्यौहार फैशन का उत्सव नही अपितु प्राचीन परंपरा व पद्धति है । इस अवसर रंगकर्मी समाज सेवक कृष्ण यादव कृष्नेंदु व कवि जनमजय ओझा ने कलाकारों को अंगवस्त्र व स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया।
