
पटना/बिहार (राकेश मंगल सिन्हा) 3 फरवरी। ऋतुराज वसंत के आगमन के साथ ही माघ महीने के शुक्ल पक्ष की पंचमी को वसंत पंचमी का त्योहार पारंपरिक रूप से खुशी-खुशी मनाया गया। इस अवसर पर विद्या एवं बुद्धि की अधिष्ठात्री माॅ शारदे की धूमधाम के साथ पूजा अर्चना की गई। रविवार को ही पंचमी तिथि आ गई थी जो सोमवार को अपराह्न 9:36 बजे तक थी। सोमवार को उदया तिथि पंचमी में होने के कारण सोमवार को सरस्वती पूजा का त्यौहार पूरे विधि विधान के साथ मनाया गया। सोमवार को रेवती नक्षत्र में सिद्धि एवं साध्य योग की उपस्थिति में सरस्वती पूजा की गई। घरों में तथा सार्वजनिक स्थलों पर लोगों ने माॅ सरस्वती की मूर्ति रखकर धूमधाम के साथ पूजा अर्चना की। बच्चे, बच्चियों के साथ-साथ पुरुष और स्त्रियों ने भी माॅ सरस्वती की पूजा अर्चना पूरे विधि विधान के साथ की। अक्षत, रोली, अबीर, गुलाल, फूल, माला, धूप, दीप, नैवेद्य एवं फल से श्रद्धालुओं ने माॅ सरस्वती का पूजन किया। पूजा के बाद लोगों ने एक दूसरे को अबीर गुलाल लगाया। विद्यार्थियों ने अपने पुस्तकों की भी पूजा की। इस दिन छोटे बच्चों को खल्ली छुआने की भी परंपरा है। धार्मिक परंपरा के अनुसार अभिभावकों द्वारा अपने बच्चों को पढ़ाई लिखाई शुरू कराने का विधान आज के दिन है। वसंत पंचमी या सरस्वती पूजा का दिन अति शुभ माना जाता है। इस दिन बिना किसी मुहूर्त के भी शुभ काम किया जाता है। एंगेजमेंट, शादी-विवाह, गृह प्रवेश, भवन निर्माण की नींव या शिलान्यास, जमीन या वाहन खरीद जैसे कार्य किये जाते हैं। बच्चियों, युवतियों, महिलाओं, युवकों एवं पुरुषों ने पीले वस्त्र धारण कर माॅ शारदे की पूजा की। ऐसी मान्यता है की माॅ सरस्वती को पीले वस्त्र प्रिय हैं। इस अवसर पर तरह-तरह के आकर्षक सजावटी सामानों एवं मनमोहक लाइट से पूजा पंडालों को भव्य रूप दिया गया है। बिजली की चकाचौंध से रात में भी दिन जैसा नजारा दिख रहा है।
